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गोविंदपुर पंचायत के जंगलों में अवैध साल कटाई से बिगड़ रहा पर्यावरणीय संतुलन, ग्रामीणों में चिंता

#जारी #पर्यावरण_संकट : तिगरा और कमलपुर गांव के जंगलों में अवैध सखुआ कटाई से हरियाली पर गंभीर खतरा।

गुमला जिले के जारी प्रखंड अंतर्गत गोविंदपुर पंचायत के तिगरा और कमलपुर गांव के जंगलों में अवैध रूप से सखुआ पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। लगातार हो रही कटाई से क्षेत्र का पर्यावरणीय और भौगोलिक संतुलन तेजी से प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से जंगलों का घनत्व घट रहा है। यदि समय रहते रोक नहीं लगी, तो इसके दूरगामी दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।

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  • गोविंदपुर पंचायत के जंगलों में अवैध सखुआ कटाई जारी।
  • तिगरा और कमलपुर गांव सबसे अधिक प्रभावित।
  • हरे पेड़ों की कटाई से जंगलों का घनत्व तेजी से घटा
  • जल संकट और मिट्टी कटाव का खतरा बढ़ने की आशंका।
  • ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।
  • वैकल्पिक ईंधन व्यवस्था की भी उठी मांग।

जारी प्रखंड के गोविंदपुर पंचायत अंतर्गत आने वाले तिगरा और कमलपुर गांव के जंगल इन दिनों गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहे हैं। यहां अवैध रूप से सखुआ (साल) पेड़ों की कटाई लगातार जारी है, जिससे न केवल जंगलों की हरियाली कम हो रही है, बल्कि पूरे क्षेत्र का प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ने की कगार पर है। ग्रामीणों में इसे लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है।

जंगलों में बढ़ती अवैध कटाई

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, तिगरा और कमलपुर गांव के आसपास स्थित जंगलों में चोरी-छिपे बड़े पैमाने पर हरे सखुआ पेड़ों को काटा जा रहा है। यह कटाई दिन के बजाय अधिकतर सुबह-सुबह या शाम के समय की जा रही है, ताकि प्रशासन और वन विभाग की नजर से बचा जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर गांवों में पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर जंगलों में खुलेआम पेड़ों की कटाई हो रही है, जो इन प्रयासों पर सवाल खड़े करती है।

महिलाओं द्वारा ईंधन के लिए कटाई का आरोप

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, गांव की कुछ महिलाओं द्वारा ईंधन और घरेलू जरूरतों के लिए हरे पेड़ों की कटाई की जा रही है। धीरे-धीरे यह गतिविधि बड़े पैमाने पर फैलती जा रही है, जिससे जंगलों का घनत्व तेजी से घट रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि वैकल्पिक ईंधन की समुचित व्यवस्था होती, तो जंगलों पर यह दबाव कम किया जा सकता था।

पर्यावरण पर पड़ रहा गंभीर प्रभाव

पर्यावरण जानकारों का मानना है कि सखुआ जैसे पेड़ जंगलों की रीढ़ होते हैं। इनकी अंधाधुंध कटाई से आने वाले समय में जल संकट, मिट्टी का कटाव और वन्य जीवों के आवास पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

पेड़ों की कमी से क्षेत्र का तापमान बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है, जिससे खेती और जनजीवन दोनों प्रभावित होंगे। बारिश के पानी को रोकने और भूजल स्तर बनाए रखने में जंगलों की अहम भूमिका होती है, जो अब कमजोर पड़ती जा रही है।

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ग्रामीणों की प्रशासन से मांग

गोविंदपुर पंचायत के ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि जंगलों में हो रही अवैध कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए। दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की गतिविधि करने से पहले सोचे।

साथ ही ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि गांवों में वैकल्पिक ईंधन, जैसे गैस कनेक्शन या अन्य साधनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान को और मजबूत किया जाए।

आने वाली पीढ़ियों पर खतरा

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो तिगरा और कमलपुर गांव के जंगलों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। इसका सीधा असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा, जिन्हें जल, खेती और शुद्ध पर्यावरण के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।

न्यूज़ देखो: जंगल बचेगा तभी जीवन बचेगा

गोविंदपुर पंचायत में हो रही अवैध सखुआ कटाई यह साफ दिखाती है कि पर्यावरण संरक्षण केवल नारों तक सीमित है। प्रशासन और वन विभाग की सक्रियता

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Ravi Ranjan Kumar

जारी, गुमला

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