
#लातेहार #वन्यजीव_तस्करी : गुप्त सूचना पर छापेमारी कर 3.929 किलो पैंगोलिन शल्क बरामद, तस्करी नेटवर्क पर करारा प्रहार।
लातेहार जिले के महुआडांड़ क्षेत्र में वन विभाग ने दुर्लभ वन्यजीव पैंगोलिन के शल्क की अवैध खरीद-बिक्री का पर्दाफाश किया है। 12 जनवरी 2026 की रात गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में दो आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान 3.929 किलोग्राम पैंगोलिन शल्क, एक स्कॉर्पियो वाहन और मोबाइल फोन जब्त किया गया। यह मामला वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- महुआडांड़ रेंज क्षेत्र में वन विभाग की संयुक्त टीम की कार्रवाई।
- 12 जनवरी 2026, रात लगभग 08 बजे कुरु पेट्रोल पंप के पास छापेमारी।
- 3.929 किलोग्राम पैंगोलिन शल्क बरामद।
- दो आरोपी आशीष सिंह और कमलेश्वर भुइयां गिरफ्तार।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज।
महुआडांड़(लातेहार) में वन विभाग को मिली गुप्त सूचना ने एक बड़े अवैध वन्यजीव तस्करी के प्रयास को नाकाम कर दिया। पैंगोलिन, जिसे सालक भी कहा जाता है, दुनिया के सबसे ज्यादा तस्करी किए जाने वाले वन्यजीवों में शामिल है और भारत में यह पूर्ण रूप से संरक्षित प्रजाति है। ऐसे में इसके शल्क की अवैध खरीद-बिक्री का मामला सामने आना प्रशासन और वन विभाग दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
सूचना के अनुसार, महुआडांड़ रेंज अंतर्गत कुरु क्षेत्र में पैंगोलिन शल्क का अवैध सौदा होने वाला था। जैसे ही यह जानकारी वन विभाग को मिली, तुरंत रणनीति बनाकर कार्रवाई की गई।
गारू रेंजर के नेतृत्व में सुनियोजित छापेमारी
इस पूरे अभियान का नेतृत्व गारू रेंजर उमेश दुबे ने किया। उनके नेतृत्व में वन विभाग की संयुक्त टीम ने रात के समय कुरु नामक स्थान पर पेट्रोल पंप के समीप घेराबंदी कर छापेमारी की। टीम ने मौके पर पहुंचते ही दो संदिग्ध व्यक्तियों को आपस में सौदेबाजी करते देखा।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपी पैंगोलिन शल्क की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया में थे। टीम ने बिना देर किए उन्हें चारों ओर से घेरकर पकड़ लिया, जिससे वे भाग नहीं सके।
गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई:
- आशीष सिंह, उम्र लगभग 36 वर्ष, ग्राम कविया, थाना कुसमी, जिला बलरामपुर (छत्तीसगढ़)।
- कमलेश्वर भुइयां, उम्र लगभग 40 वर्ष, ग्राम गारू, थाना गारू, जिला लातेहार (झारखंड)।
प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया है कि कमलेश्वर भुइयां पैंगोलिन का शल्क बेचने के उद्देश्य से महुआडांड़ पहुंचा था, जबकि आशीष सिंह पहले से ही सौदे को अंजाम देने के लिए मौके पर मौजूद था। इससे यह संकेत मिलता है कि इस अवैध कारोबार में अंतरराज्यीय नेटवर्क भी सक्रिय हो सकता है।
भारी मात्रा में शल्क और वाहन जब्त
तलाशी के दौरान वन विभाग की टीम ने आरोपियों के कब्जे से:
- 3.929 किलोग्राम पैंगोलिन शल्क,
- एक स्कॉर्पियो वाहन (पंजीयन संख्या JH-01-BE-9020),
- और एक मोबाइल फोन बरामद किया।
बरामद सभी सामग्रियों को मौके पर ही विधिवत जप्त कर लिया गया। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पैंगोलिन शल्क की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी कीमत होती है, जिस कारण इसका अवैध व्यापार लगातार बढ़ रहा है।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई
दोनों आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह एक गंभीर अपराध है, जिसमें कड़ी सजा का प्रावधान है।
वन विभाग की ओर से बताया गया कि आरोपियों से आगे पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तस्करी के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा शल्क कहां भेजा जाना था।
पैंगोलिन क्यों है इतना संवेदनशील मुद्दा
पैंगोलिन भारत में पूर्ण रूप से संरक्षित वन्यजीव है। इसके शल्क का उपयोग अवैध रूप से दवाइयों और अन्य उत्पादों में किए जाने की वजह से इसकी तस्करी होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पैंगोलिन की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है और ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है।
वन विभाग ने यह भी कहा कि महुआडांड़ और आसपास के जंगलों में निगरानी और गश्त और तेज की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
वन विभाग का स्पष्ट संदेश
वन विभाग के अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि अवैध शिकार और वन्यजीव अवशेषों के व्यापार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। ऐसे अपराधों में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
न्यूज़ देखो: वन्यजीव तस्करी पर करारा प्रहार
महुआडांड़ में हुई यह कार्रवाई दर्शाती है कि वन विभाग अब वन्यजीव तस्करी के खिलाफ पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है। पैंगोलिन जैसे दुर्लभ प्राणी के संरक्षण के लिए ऐसी कार्रवाइयां बेहद जरूरी हैं। अब सवाल यह है कि क्या इस गिरफ्तारी से पूरे तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश हो पाएगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जंगल और वन्यजीव बचेंगे तो भविष्य बचेगा
वन्यजीव संरक्षण केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अगर आपको भी कहीं अवैध शिकार या वन्यजीव व्यापार की सूचना मिले, तो तुरंत संबंधित विभाग को जानकारी दें।
इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में लिखें और प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।




