
#लातेहार #अवैध_खनन : डूमारो पंचायत में खुलेआम बालू निकासी, पुलिस संरक्षण के आरोप, ग्रामीणों में बढ़ी नाराजगी
- डूमारो पंचायत में दामोदर नदी से दिनदहाड़े बालू निकासी।
- पंचायत सचिवालय से 50–75 मीटर की दूरी पर बड़े पैमाने पर अवैध स्टॉक।
- रात में भारी वाहनों से मैक्लुस्कीगंज, खलारी, बिजूपाड़ा और रांची तक सप्लाई।
- ग्रामीण दहशत में, विरोध करने पर अपराधियों और पुलिस से खतरे की आशंका।
- डूमारो मुखिया ने पुलिस की मिलीभगत और कार्रवाई न होने की शिकायत की।
- डीएमओ लातेहार ने अवैध खनन की पुष्टि, कार्रवाई का आश्वासन दिया।
लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र के डूमारो पंचायत में दामोदर नदी अवैध बालू कारोबार का केंद्र बन चुकी है। यहां बालू माफिया खुलेआम नदी से बालू निकालकर थाना और सचिवालय के बिल्कुल पास बड़े पैमाने पर जमा कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, देर रात इन्हीं स्टॉक से ट्रक और बड़े वाहनों में बालू लोड कर अलग-अलग इलाकों में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। इस गतिविधि की बढ़ती रफ्तार से ग्रामीण परेशान हैं, लेकिन विरोध करने से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इस धंधे को पुलिस और आपराधिक समूहों का संरक्षण प्राप्त है।
कैसे चल रहा है अवैध कारोबार
स्थानीय लोग बताते हैं कि बालू निकासी सुबह से रात तक बिना रुके जारी रहती है। कोई चालान नहीं लिया जाता और न ही पंचायत के नियमों का पालन। पंचायत कार्यालय के ठीक पास ही अवैध स्टॉक देखने को मिलते हैं। रात 11 बजे से सुबह तक बड़े वाहनों में बालू लोड किया जाता है ताकि प्रशासन को भनक न लगे।
ग्रामीणों ने बताया कि:
“पूरे गांव में दिनभर धूल उड़ती रहती है। सड़कें खराब हो चुकी हैं और बच्चों व बुजुर्गों में सांस संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।”
मुखिया के गंभीर आरोप
डूमारो पंचायत की मुखिया ने इस मुद्दे पर खुलकर आरोप लगाया। उनका कहना है कि अवैध कारोबारी पंचायत की किसी भी बात को नहीं मान रहे हैं और खुलेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं।
मुखिया ने कहा: “धंधेबाज पंचायत चालान नहीं लेते और पुलिस व बाहरी लोगों की मिलीभगत से कारोबार चला रहे हैं। मैंने यह शिकायत ‘सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम में अंचलाधिकारी को दी थी और पूर्व सीओ को लिखित में भी भेजा था, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई।”
प्रशासन की प्रतिक्रिया
डीएमओ लातेहार ने इस पूरे मामले की पुष्टि की है और अवैध उठाव रोकने का वादा किया है।
डीएमओ ने कहा: “मुझे जानकारी है। एक-दो दिनों में उचित कार्रवाई की जाएगी।”
पुलिस पर सवाल और विवाद
जब संवाददाता ने मैक्लुस्कीगंज थाना प्रभारी से इस पर प्रतिक्रिया ली तो उनकी प्रतिक्रिया ने ग्रामीणों के शक को और मजबूत कर दिया।
थाना प्रभारी ने कहा: “यह चंदवा थाना क्षेत्र का मामला है। कोई कुछ बोल दे और आप खबर बना देंगे? जाइए, मुड़ी काट दीजिए, हमसे क्यों पक्ष ले रहे हैं?”
पुलिस अधिकारी की यह प्रतिक्रिया न केवल आक्रामक थी, बल्कि इस मामले में उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
ग्रामीणों की चिंता और चुप्पी
ग्रामीणों का कहना है कि वे विरोध नहीं कर सकते क्योंकि माफिया उन्हें धमकाते हैं। किसी को डर है रोजगार चला जाएगा, तो किसी को जान का खतरा।
डूमारो पंचायत के एक वृद्ध ने कहा:
“बालू ही नहीं, हमारी शांति और जीवन भी छीना जा रहा है। अब प्रशासन ही कुछ कर सकता है।”
न्यूज़ देखो: जिम्मेदारी और पारदर्शिता की मांग
यह मामला सिर्फ अवैध खनन का नहीं, बल्कि ग्रामीणों के अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और कानूनी व्यवस्था की जवाबदेही का है। यदि स्थानीय प्रशासन और पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभाते, तो दामोदर नदी आज ऐसी स्थिति में नहीं होती। अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासनिक वादे कार्रवाई में बदलते हैं या नहीं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
समय है आवाज उठाने का, चुप्पी से बदलाव नहीं आता
प्राकृतिक संसाधन आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं, मुनाफे का साधन नहीं। जब नियम तोड़ने वालों को संरक्षण मिलता है, तो कानून कमजोर पड़ता है और जनता असहाय। यदि आप चाहते हैं कि ऐसी गतिविधियों पर रोक लगे, तो अपनी आवाज दर्ज कराएं—क्योंकि सवाल सिर्फ नदी का नहीं, सिस्टम का भी है।
अपनी राय कमेंट में लिखें, खबर को साझा करें और प्रशासन को संदेश दें—
नदी बचेगी तो गांव बचेगा, गांव बचेगा तो भविष्य सुरक्षित रहेगा।







