
#दुमका #ग्रामीण_शिविर : विश्वविद्यालयी छात्रों ने ग्रामीण जीवन से जुड़कर सामाजिक सरोकारों को समझा।
सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी, कोलकाता के विद्यार्थियों ने झारखंड के दुमका जिले में दस दिवसीय ग्रामीण शिविर का आयोजन किया। इस शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रामीण जीवन, सामाजिक संरचना और जमीनी चुनौतियों से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना रहा। ग्रामीणों के साथ संवाद और सहभागिता के माध्यम से छात्रों ने समाज को नजदीक से समझने का प्रयास किया, जो शैक्षणिक अनुभव से आगे एक सामाजिक सीख भी है।
- सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी, कोलकाता के विद्यार्थियों द्वारा दस दिवसीय शिविर का आयोजन।
- दुमका जिला के ग्रामीण क्षेत्र में रहकर छात्रों ने किया प्रत्यक्ष अध्ययन।
- ग्रामीण समाज, जीवनशैली और जमीनी समस्याओं को समझने पर रहा फोकस।
- शैक्षणिक ज्ञान के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का अनुभव।
सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी, कोलकाता के विद्यार्थियों द्वारा आयोजित यह दस दिवसीय ग्रामीण शिविर शिक्षा और समाज के बीच सेतु बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबों और कक्षा की सीमाओं से बाहर निकालकर वास्तविक सामाजिक परिस्थितियों से जोड़ना रहा।
दुमका जिले के ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित इस शिविर के दौरान छात्र-छात्राओं ने गांव के परिवेश में रहकर ग्रामीणों के दैनिक जीवन, उनकी समस्याओं, जरूरतों और सामाजिक ढांचे को नजदीक से समझने का प्रयास किया। विद्यार्थियों ने महसूस किया कि ग्रामीण भारत आज भी विकास की मुख्यधारा से जूझ रहा है और कई बुनियादी मुद्दे अब भी चुनौती बने हुए हैं।
ग्रामीण जीवन से सीधा संवाद
ग्रामीण शिविर के दौरान छात्रों का सीधा संपर्क स्थानीय ग्रामीणों से हुआ। इस संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोगों की क्या अपेक्षाएं हैं। ग्रामीणों ने भी खुलकर अपनी बात रखी, जिससे छात्रों को जमीनी हकीकत का अनुभव हुआ।
यह शिविर केवल अवलोकन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सहभागिता और आपसी समझ पर भी जोर दिया गया। विद्यार्थियों ने गांव के सामाजिक माहौल में खुद को ढालते हुए ग्रामीण संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक जीवनशैली को करीब से देखा।
शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का बोध
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस तरह के ग्रामीण शिविर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे छात्रों में सामाजिक संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और सेवा भाव विकसित होता है। ग्रामीण परिवेश में रहकर छात्र यह समझ पाते हैं कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य समाज के लिए उपयोगी बनना है।
दुमका जैसे आदिवासी बहुल जिले में इस प्रकार का शिविर छात्रों को विविध सांस्कृतिक और सामाजिक अनुभव प्रदान करता है। इससे न केवल उनकी सोच व्यापक होती है, बल्कि वे समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों की वास्तविक स्थिति को भी समझ पाते हैं।
अनुभव जो जीवन भर साथ रहता है
शिविर में शामिल विद्यार्थियों के लिए यह अनुभव केवल दस दिनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके भविष्य की सोच और दृष्टिकोण को प्रभावित करने वाला है। ग्रामीण जीवन की सादगी, सामूहिकता और संघर्ष छात्रों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है।
ऐसे कार्यक्रम यह भी दर्शाते हैं कि उच्च शिक्षण संस्थान अब केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
न्यूज़ देखो: शिक्षा का सामाजिक चेहरा
सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों द्वारा आयोजित यह ग्रामीण शिविर यह बताता है कि शिक्षा जब समाज से जुड़ती है, तभी उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है। दुमका जैसे जिलों में इस तरह की पहल न केवल छात्रों के लिए सीख का माध्यम है, बल्कि ग्रामीण समाज के साथ संवाद का भी एक सशक्त जरिया बनती है। सवाल यह है कि क्या ऐसी पहलें अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बनेंगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
समाज से जुड़कर ही बनता है जिम्मेदार नागरिक
ग्रामीण भारत को समझना, उसकी चुनौतियों को महसूस करना और समाधान की दिशा में सोच विकसित करना आज के युवाओं के लिए बेहद जरूरी है।
ऐसे शिविर न केवल छात्रों को संवेदनशील बनाते हैं, बल्कि समाज और शिक्षा के बीच की दूरी भी कम करते हैं।
यदि आप भी मानते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य समाज निर्माण है, तो इस खबर को साझा करें।
अपनी राय कमेंट में लिखें और ऐसी सकारात्मक पहलों को आगे बढ़ाने में भागीदार बनें।



