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डंडीला खुर्द में रोड नहीं तो वोट नहीं के पोस्टर से मतदाताओं का विरोध, जर्जर सड़क को लेकर बढ़ा आक्रोश

#विश्रामपुर #वोट_बहिष्कार : डंडीला खुर्द के ग्रामीणों ने सड़क निर्माण नहीं होने पर जताई नाराजगी।

पलामू जिले के विश्रामपुर नगर परिषद अंतर्गत डंडीला खुर्द गांव में ग्रामीणों ने जर्जर सड़क के विरोध में दीवारों पर ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ के पोस्टर चिपकाए। लोगों का आरोप है कि आजादी के बाद से अब तक बेहतर सड़क का निर्माण नहीं हुआ। इससे मतदाताओं में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो मतदान का बहिष्कार किया जा सकता है।

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  • डंडीला खुर्द गांव में ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ पोस्टर से विरोध।
  • आजादी के बाद से बेहतर सड़क निर्माण नहीं होने का आरोप।
  • पूर्व नगर अध्यक्ष नइमुदिन के कार्यकाल पर भी उठे सवाल।
  • वार्ड पार्षद और कार्यपालक पदाधिकारी पर संज्ञान नहीं लेने की शिकायत।
  • ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार की चेतावनी दी।

विश्रामपुर नगर परिषद क्षेत्र के डंडीला खुर्द गांव में सड़क की जर्जर स्थिति को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। गांव की दीवारों पर ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ लिखे पोस्टर चिपकाकर मतदाताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक ठोस पहल नहीं की गई।

गांव के लोगों के अनुसार, आजादी के बाद से लेकर अब तक यहां बेहतर सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जिससे आवागमन में भारी परेशानी होती है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

ग्रामीणों का आरोप और बहिष्कार की चेतावनी

नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ मतदाताओं ने बताया कि सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वे इस बार मतदान का बहिष्कार करने का निर्णय ले सकते हैं। उनका कहना है कि जब मूलभूत सुविधा ही उपलब्ध नहीं है तो चुनाव के समय वादों का क्या अर्थ रह जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। दीवारों पर लगाए गए पोस्टरों के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि सड़क निर्माण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाया गया तो उनका विरोध और तेज हो सकता है।

जनप्रतिनिधियों पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने पूर्व नगर अध्यक्ष नइमुदिन के कार्यकाल का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि उनके कार्यकाल में भी डंडीला खुर्द में सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई।

साथ ही वर्तमान वार्ड पार्षद के प्रति भी नाराजगी जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि समस्या की जानकारी होने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा भी मामले में संज्ञान नहीं लिया गया, जिसके कारण सड़क की स्थिति लगातार खराब होती गई।

जर्जर सड़क से दैनिक जीवन प्रभावित

डंडीला खुर्द गांव की सड़क की स्थिति इतनी खराब बताई जा रही है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। बरसात में कीचड़ और गड्ढों से हालात और बिगड़ जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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स्थानीय लोगों का मानना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव विकास के दावों पर सवाल खड़ा करता है। उनका कहना है कि जब तक गांव में बेहतर सड़क नहीं बनेगी, तब तक वास्तविक विकास अधूरा रहेगा।

प्रशासन और निर्वाचन प्रक्रिया पर असर

ग्रामीणों द्वारा लगाए गए पोस्टरों के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि यदि नाराजगी दूर नहीं हुई तो मतदान प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे में निर्वाचन पदाधिकारी से भी संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की जा रही है, ताकि ग्रामीणों की शिकायतों का समाधान हो और मतदान सुचारु रूप से संपन्न हो सके।

अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में नगर परिषद के स्तर पर क्या पहल की जाती है और क्या डंडीला खुर्द की सड़क समस्या का समाधान हो पाता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास चाहते हैं और उनकी मांग केवल बुनियादी सुविधा की है।

न्यूज़ देखो: सड़क जैसी बुनियादी सुविधा पर सवाल

डंडीला खुर्द की घटना यह दर्शाती है कि बुनियादी ढांचा विकास की पहली शर्त है। जब सड़क जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं होती, तो लोगों का लोकतांत्रिक प्रक्रिया से मोहभंग होना स्वाभाविक है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को समय रहते संवाद स्थापित कर समाधान निकालना चाहिए। क्या संबंधित विभाग अब सक्रिय पहल करेगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

विकास की राह पर बढ़े गांव

सड़क केवल रास्ता नहीं, विकास की धड़कन है।
यदि बुनियादी सुविधाएं मजबूत होंगी तो शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार भी बेहतर होंगे।
ग्रामीणों की आवाज सुनी जाए और समाधान समय पर हो।
लोकतंत्र में संवाद ही सबसे बड़ा माध्यम है।

आप क्या सोचते हैं — क्या सड़क निर्माण को प्राथमिकता मिलनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में लिखें, खबर को साझा करें और अपने क्षेत्र की समस्याओं को सामने लाने में भागीदार बनें।

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Ram Niwas Tiwary

बिश्रामपुर, पलामू

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