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डुमरी में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रतियों ने मनाया आस्था का महापर्व

#डुमरी #छठपर्व : घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ – महिलाओं ने पारंपरिक रीति से अर्पित किया पहला अर्घ्य, प्रशासन रहा पूरी तरह मुस्तैद
  • डुमरी प्रखंड, गुमला में सोमवार की शाम व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य अर्पित किया।
  • घाटों पर छठ मइया के गीतों और भक्ति की गूंज से माहौल पवित्र हो उठा।
  • प्रशासन की ओर से सुरक्षा, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की पुख्ता तैयारी रही।
  • श्रद्धालुओं ने खरना के पश्चात पूरे विधि-विधान से जल, फल और प्रसाद अर्पित किया।
  • मंगलवार सुबह उदीयमान सूर्य को दूसरा अर्घ्य अर्पित कर पर्व का समापन होगा।

डुमरी प्रखंड में सोमवार की शाम छठ महापर्व की पावनता और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सैकड़ों व्रती महिलाओं और श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य अर्पित कर भगवान सूर्य और छठ मइया से परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्यता की कामना की। घाटों पर भक्तिमय माहौल था, हर तरफ छठ गीतों की गूंज, दीपों की रौशनी और आस्था का प्रकाश बिखरा हुआ था।

छठ की पवित्र परंपरा और व्रतियों की तैयारी

व्रतियों ने नहाय-खाय और खरना की विधि पूरी करने के बाद, संकल्प और संयम के साथ अर्घ्य की तैयारी की। महिलाओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर कलश, सुपली और दउरा में ठेकुआ, नारियल, मौसमी फल और प्रसाद सजाया। संध्या के समय जब सूर्य अस्त होने लगे, तो सामूहिक रूप से सूर्य देव और छठ मइया की आराधना की गई।

एक व्रती महिला ने कहा: “हम हर वर्ष पूरे मनोयोग और पवित्रता के साथ छठ मइया की पूजा करते हैं। यह पर्व हमारे परिवार के सुख और समृद्धि की रक्षा करता है।”

छठ घाटों पर श्रद्धा और सांस्कृतिक एकता का सुंदर मिश्रण देखने को मिला। महिलाएं गीत गा रही थीं, बच्चे प्रसाद तैयार करने में मदद कर रहे थे, और पुरुष घाटों की व्यवस्था में जुटे हुए थे।

प्रशासनिक तैयारियां रहीं बेहतर

डुमरी प्रखंड प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी संभाली। थाना प्रभारी, पुलिस बल, स्वास्थ्य टीम और स्वयंसेवी संगठन लगातार घाटों पर सक्रिय रहे। प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग, साफ-सफाई और पेयजल की व्यवस्था उत्कृष्ट रही। इस बार किसी भी श्रद्धालु को कोई असुविधा नहीं हुई।

थाना प्रभारी ने कहा: “हमारी टीम पूरी रात घाटों पर मुस्तैद रहेगी ताकि श्रद्धालु निर्भय होकर पूजा-अर्चना कर सकें।”

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं ने भी प्रशासन को सहयोग किया, जिससे पूरे क्षेत्र में एक अनुशासित और शांतिपूर्ण माहौल बना रहा।

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गीतों और भक्ति से गूंजे घाट

डुमरी के विभिन्न छठ घाटों पर पारंपरिक भक्ति गीतों की स्वर लहरियों से वातावरण गूंज उठा। “कांचहि बांस के बहंगिया” और “उठू सूरज देव” जैसे गीतों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। महिलाओं ने सामूहिक रूप से आरती उतारी और सूर्य देव से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की।

बच्चों और युवाओं ने भी व्रतियों की सहायता में सहयोग किया और छठ पर्व को सामूहिक उत्सव का रूप दिया।

कल प्रातः उदीयमान सूर्य को दूसरा अर्घ्य

छठ पर्व की परंपरा के अनुसार मंगलवार की सुबह व्रतियां उदीयमान सूर्य को दूसरा अर्घ्य देंगी, जिसके साथ यह महापर्व संपन्न होगा। अर्घ्य अर्पण के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर परन करेंगी, जो संयम और आस्था के इस पर्व का समापन होता है।

न्यूज़ देखो: डुमरी में छठ पर्व बना अनुशासन और आस्था की मिसाल

डुमरी प्रखंड में छठ पर्व एक बार फिर सामाजिक एकता, स्वच्छता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन गया। प्रशासनिक सतर्कता और श्रद्धालुओं की अनुशासित भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि जब आस्था और व्यवस्था साथ हों, तो पर्व और भी भव्य बन जाता है।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था, अनुशासन और स्वच्छता की मिसाल बना डुमरी

छठ पर्व केवल पूजा नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन, संयम और स्वच्छता का संदेश है। डुमरी की व्रतियों ने यह साबित किया कि श्रद्धा और व्यवस्था जब मिलती हैं, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
आइए, हम सब इस पवित्र पर्व की भावना को बनाए रखें — अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को शेयर करें और छठ मइया की कृपा सब पर बनी रहे, यही मंगलकामना करें।

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Aditya Kumar

डुमरी, गुमला

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