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गिरिडीह में जल सहिया दीदियों का सात महीने से मानदेय लंबित, एप्वा नेत्रियों ने सरकार और प्रशासन से तत्काल भुगतान की मांग उठाई

#गिरिडीह #जल_सहिया : सात महीने से लंबित मानदेय भुगतान को लेकर एप्वा नेत्रियों ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की।

गिरिडीह में जल सहिया दीदियों को पिछले सात महीनों से मानदेय नहीं मिलने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। भाकपा माले की महिला विंग एप्वा की नेताओं ने सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द लंबित मानदेय जारी करने की मांग उठाई है। नेताओं का कहना है कि आवंटन आने के बावजूद कुछ अधिकारियों की वजह से भुगतान अटका हुआ है। इस मुद्दे को लेकर महिला दिवस के दिन समाहरणालय में हुए आंदोलन के दौरान प्रशासनिक व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

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  • गिरिडीह में जल सहिया दीदियों का सात महीने से मानदेय लंबित, एप्वा ने उठाई आवाज।
  • एप्वा नेत्री जयंती चौधरी ने कहा – जल्द से जल्द उपलब्ध कराया जाए मानदेय का आवंटन।
  • पूनम महतो ने सरकार से तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।
  • महिला दिवस के दिन समाहरणालय में धरना प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक व्यवहार पर उठे सवाल।
  • राजेश सिन्हा ने कहा – एक सप्ताह के अंदर मानदेय भुगतान की दिशा में कार्रवाई करें अधिकारी।
  • आंदोलन में पिंकी भारती, कौशल्या दास, मीना दास, सरिता साव, प्रीति भास्कर सहित कई महिलाएं शामिल।

गिरिडीह जिले में कार्यरत जल सहिया दीदियों का मानदेय पिछले सात महीनों से लंबित होने का मामला सामने आया है। इस मुद्दे को लेकर भाकपा माले की महिला संगठन एप्वा की नेताओं ने सरकार और प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि आवंटन आने के बावजूद कुछ अधिकारियों की वजह से भुगतान नहीं हो पा रहा है, जिससे जल सहिया दीदियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर महिला दिवस के अवसर पर गिरिडीह समाहरणालय में महिलाओं ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन भी किया।

सात महीने से लंबित है जल सहिया दीदियों का मानदेय

एप्वा नेत्रियों ने बताया कि गिरिडीह जिले में जल सहिया दीदियां लंबे समय से गांवों में पेयजल व्यवस्था और स्वच्छता से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला मानदेय समय पर नहीं दिया जा रहा है।

एप्वा नेत्री जयंती चौधरी ने कहा:

जयंती चौधरी ने कहा: “जल सहिया दीदियां कम मानदेय में भी पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करती हैं, लेकिन सात महीने से उनका भुगतान नहीं होना बेहद दुखद है। सरकार और प्रशासन को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि आवंटन आने के बावजूद यदि भुगतान नहीं हो रहा है तो यह प्रशासनिक लापरवाही का संकेत है।

सरकार से तत्काल मानदेय जारी करने की मांग

एप्वा नेत्री पूनम महतो ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि महिलाओं के साथ इस तरह की उपेक्षा उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द मानदेय जारी करने की मांग की।

पूनम महतो ने कहा: “जल सहिया दीदियां गांवों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाती हैं। यदि उन्हें समय पर मानदेय नहीं मिलेगा तो उनका मनोबल कमजोर होगा। सरकार को तुरंत भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए।”

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उन्होंने कहा कि महिलाओं के श्रम और योगदान का सम्मान होना चाहिए और इसके लिए प्रशासन को संवेदनशील होकर काम करना होगा।

आंदोलन के दौरान प्रशासनिक व्यवहार पर उठे सवाल

महिला दिवस के अवसर पर गिरिडीह समाहरणालय में जल सहिया दीदियों और महिला संगठनों द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की भी चर्चा सामने आई है, जिसमें प्रशासनिक व्यवहार को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

एप्वा नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक आंदोलन में शामिल महिलाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर महिलाएं प्रशासन से ही संवाद करने आई थीं और ऐसे आंदोलनों का समाधान संवेदनशील तरीके से होना चाहिए।

एक सप्ताह में मानदेय भुगतान की मांग

इस मुद्दे पर माले नेता राजेश सिन्हा ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एप्वा की नेताओं से बातचीत के बाद प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर जल सहिया दीदियों का लंबित मानदेय देने की दिशा में कार्रवाई करनी चाहिए।

राजेश सिन्हा ने कहा: “एप्वा नेत्रियों से बातचीत हुई है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि एक सप्ताह के अंदर सभी जल सहिया दीदियों का मानदेय देने का काम अधिकारी करें।”

उन्होंने कहा कि यदि समस्या का समाधान नहीं होता है तो आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।

कई महिलाओं ने उठाई अपनी आवाज

इस मुद्दे को लेकर कई महिलाओं ने भी अपनी बात रखी। आंदोलन और बैठक में पिंकी भारती, कौशल्या दास, मीना दास, सरिता साव, प्रीति भास्कर सहित कई महिलाएं मौजूद रहीं।

इन सभी ने कहा कि जल सहिया दीदियां गांवों में पेयजल और स्वच्छता से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में उनका मानदेय समय पर मिलना जरूरी है ताकि वे अपने कार्यों को बेहतर तरीके से जारी रख सकें।

महिलाओं ने यह भी कहा कि जब संबंधित जनप्रतिनिधियों द्वारा आवंटन के लिए सहमति दी जा चुकी है, तो भुगतान में देरी नहीं होनी चाहिए।

न्यूज़ देखो: जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं की अनदेखी क्यों

जल सहिया दीदियां गांवों में पेयजल व्यवस्था और स्वच्छता से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य करती हैं, लेकिन उनका मानदेय महीनों तक लंबित रहना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। यदि आवंटन आने के बावजूद भुगतान नहीं हो पा रहा है, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बन जाता है। लोकतांत्रिक आंदोलन के दौरान महिलाओं की आवाज को सम्मानपूर्वक सुनना और समस्याओं का समाधान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले में कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं और जल सहिया दीदियों को उनका अधिकार दिलाते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकार और सम्मान के लिए आवाज उठाना जरूरी

समाज की प्रगति तब संभव है जब मेहनत करने वाले हर व्यक्ति को उसका हक समय पर मिले। जल सहिया दीदियां गांवों में सेवा और जिम्मेदारी का बड़ा काम करती हैं, इसलिए उनके श्रम का सम्मान होना चाहिए।

जब महिलाएं अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठाती हैं, तो यह लोकतंत्र की ताकत को भी मजबूत करता है। जरूरी है कि समाज और प्रशासन दोनों इस आवाज को गंभीरता से सुनें।

आप भी ऐसे मुद्दों पर जागरूक रहें और अपनी राय जरूर रखें।
खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक साझा करें और अपने क्षेत्र से जुड़े जनहित के मुद्दों पर खुलकर चर्चा करें।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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