
#बानो #शिक्षा_विकास : किराये के कमरे से शुरू हुआ विद्यालय आज नर्सरी से मैट्रिक तक शिक्षा दे रहा है।
बानो प्रखंड मुख्यालय स्थित संत थॉमस इंग्लिश मीडियम स्कूल ने शिक्षा के क्षेत्र में 24 वर्षों का सफल सफर तय किया है। जनवरी 2002 में तीन छात्रों के साथ शुरू हुआ यह विद्यालय आज प्रखंड के प्रमुख निजी शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। सीमित संसाधनों से शुरू होकर विद्यालय ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुशासन के बल पर अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2026 में यहां से 21 विद्यार्थी मैट्रिक परीक्षा में शामिल होंगे, जो इसकी निरंतर प्रगति का संकेत है।
- संत थॉमस इंग्लिश मीडियम स्कूल, बानो में वर्ष 2002 में स्थापना।
- प्रिंसिपल फ्रांसिस टेटे ने मात्र तीन छात्रों से विद्यालय की शुरुआत की।
- स्व सेबयान लुगुन ने फीता काटकर विद्यालय का उद्घाटन किया।
- नेल्सन इंदिवार और सुचिता इंदिवार के सहयोग से मिला शैक्षणिक विस्तार।
- विलकन बग रैला द्वारा भूमि दान से मिला स्थायी भवन का आधार।
- वर्ष 2026 में 21 विद्यार्थी मैट्रिक परीक्षा में होंगे शामिल।
बानो प्रखंड मुख्यालय में स्थित संत थॉमस इंग्लिश मीडियम स्कूल आज शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। जिस विद्यालय की शुरुआत सीमित संसाधनों और किराये के कमरे से हुई थी, वह आज प्रखंड के अभिभावकों की पहली पसंद बन चुका है। निरंतर परिश्रम, समर्पित शिक्षकों और समाज के सहयोग से विद्यालय ने शिक्षा के स्तर को नई दिशा दी है।
विद्यालय की स्थापना और प्रारंभिक संघर्ष
संत थॉमस इंग्लिश मीडियम स्कूल की नींव जनवरी 2002 में रखी गई थी। उस समय विद्यालय एक किराये के मकान में संचालित हुआ करता था। विद्यालय का उद्घाटन स्व सेबयान लुगुन द्वारा फीता काटकर किया गया, जो उस दौर में शिक्षा के प्रति समाज की सकारात्मक सोच को दर्शाता है।
प्रारंभिक वर्षों में संसाधनों की कमी के बावजूद विद्यालय ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। बच्चों को अनुशासन, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई और नैतिक मूल्यों से जोड़ना प्राथमिक उद्देश्य रहा।
तीन छात्रों से पहचान तक का सफर
विद्यालय के प्रिंसिपल फ्रांसिस टेटे ने मात्र तीन छात्रों के साथ विद्यालय की शुरुआत की थी। सीमित छात्र संख्या के बावजूद उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया। उनके मार्गदर्शन में विद्यालय ने धीरे-धीरे क्षेत्र में अपनी साख बनानी शुरू की।
इस दौरान शिक्षक नेल्सन इंदिवार और सुचिता इंदिवार के सहयोग से पठन-पाठन व्यवस्था को मजबूत किया गया। शिक्षकों की मेहनत और समर्पण का ही परिणाम रहा कि अभिभावकों का भरोसा विद्यालय पर बढ़ता गया।
स्थायी भवन की ओर कदम
लगभग 12 वर्षों तक विद्यालय किराये के भवन में संचालित हुआ। इसके बाद स्थानीय समाजसेवी विलकन बग रैला द्वारा भूमि दान दिए जाने से विद्यालय के लिए स्थायी भवन की नींव रखी गई।
शुरुआत में कुछ कमरों से विद्यालय का संचालन हुआ, लेकिन समय के साथ भवन का विस्तार होता गया। स्थायी संरचना मिलने से शैक्षणिक वातावरण और अधिक अनुशासित व व्यवस्थित हुआ।
शिक्षा की गुणवत्ता से बनी पहचान
धीरे-धीरे संत थॉमस इंग्लिश मीडियम स्कूल की पठन-पाठन व्यवस्था की चर्चा पूरे प्रखंड में होने लगी। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का शैक्षणिक प्रदर्शन, अनुशासन और व्यवहार इसकी पहचान बन गया।
आज विद्यालय में नर्सरी से लेकर मैट्रिक तक की शिक्षा उपलब्ध है। अंग्रेजी माध्यम के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
मैट्रिक परीक्षा में सफलता का इतिहास
वर्ष 2013 विद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जब पहली बार यहां के विद्यार्थी एसएस स्कूल बानो से मैट्रिक परीक्षा में शामिल हुए। इस परीक्षा में सभी छात्र-छात्राएं अच्छे अंकों से सफल रहे।
इस सफलता ने विद्यालय की विश्वसनीयता को और मजबूत किया तथा अभिभावकों का विश्वास और गहरा हुआ। इसके बाद से हर वर्ष विद्यालय के विद्यार्थी मैट्रिक परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करते आ रहे हैं।
पढ़ाई के साथ खेल और सांस्कृतिक गतिविधियां
संत थॉमस इंग्लिश मीडियम स्कूल में शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कंप्यूटर शिक्षा की भी बेहतर सुविधा उपलब्ध है। विद्यालय का मानना है कि बच्चों का सर्वांगीण विकास केवल किताबों तक सीमित नहीं होना चाहिए।
नियमित खेल गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और रचनात्मकता का विकास होता है।
वर्ष 2026 की तैयारी
वर्तमान में विद्यालय भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को लगातार तैयार कर रहा है। वर्ष 2026 में विद्यालय से कुल 21 विद्यार्थी मैट्रिक परीक्षा में शामिल होंगे। शिक्षकों द्वारा नियमित अभ्यास, मूल्यांकन और मार्गदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए तैयार किया जा रहा है।
न्यूज़ देखो: शिक्षा में निरंतरता और सामुदायिक सहयोग का उदाहरण
संत थॉमस इंग्लिश मीडियम स्कूल की यात्रा यह दर्शाती है कि सीमित संसाधनों में भी मजबूत इच्छाशक्ति से बड़ा बदलाव संभव है। समाजसेवियों, शिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग से विद्यालय ने शिक्षा की मजबूत नींव रखी है। यह कहानी ग्रामीण और प्रखंड स्तर पर गुणवत्तापूर्ण निजी शिक्षा के महत्व को उजागर करती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा से सशक्त भविष्य की ओर बानो
शिक्षा किसी भी समाज की सबसे बड़ी पूंजी होती है और संत थॉमस इंग्लिश मीडियम स्कूल इसका जीवंत उदाहरण है।
ऐसे शिक्षण संस्थान आने वाली पीढ़ियों को आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।







