
#बसिया #गुमला #मनरेगा_अनियमितता : मशीनों से कार्य और फर्जी हाजिरी का आरोप लगा।
गुमला जिले के बसिया प्रखंड अंतर्गत कलिंगा पंचायत में मनरेगा योजना के कार्यों में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि सड़क निर्माण में मशीनों का उपयोग कर मजदूरों के नाम पर फर्जी मस्टर रोल तैयार किए जा रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने इसे गरीबों के रोजगार पर सीधा प्रहार बताया है। डीडीसी ने मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
- कलिंगा पंचायत, बसिया में मनरेगा कार्यों में मशीनों के उपयोग का आरोप।
- सड़क निर्माण में जेसीबी से खुदाई, मजदूरों के नाम पर कागजी हाजिरी।
- फर्जी मस्टर रोल बनाकर भुगतान निकासी की शिकायत।
- मुखिया मरियम बेक, रोजगार सेवक सतीश साहू सहित अन्य पर मिलीभगत के आरोप।
- डीडीसी दिलेश्वर महतो ने जांच और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
गुमला जिले के बसिया प्रखंड की कलिंगा पंचायत में मनरेगा योजना के तहत चल रहे कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कलिंगा से सरूडा जाने वाली सड़क का निर्माण मनरेगा मद से कराया जा रहा है। नियमानुसार मनरेगा का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर अकुशल श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराना है तथा कार्यों में मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है। बावजूद इसके, ग्रामीणों का आरोप है कि यहां जेसीबी मशीनों से खुदाई और सड़क निर्माण कराया जा रहा है, जबकि कागजों में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है।
नियमों की अनदेखी और मशीनों से काम
मनरेगा योजना को ग्रामीण गरीबों के लिए जीवन रेखा माना जाता है। इस योजना का मूल सिद्धांत है कि अधिकतम कार्य मानव श्रम के माध्यम से हो, ताकि गांव के बेरोजगारों को रोजगार मिल सके। लेकिन कलिंगा पंचायत में चल रहे कार्यों में मशीनों के उपयोग का आरोप इस मूल भावना के विपरीत है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण कार्य में जेसीबी मशीनें दिनभर सक्रिय रहती हैं। खुदाई और मिट्टी समतलीकरण जैसे कार्य मशीनों से किए जा रहे हैं। इससे न केवल मजदूरों को रोजगार से वंचित किया जा रहा है, बल्कि योजना के दिशा-निर्देशों की भी अनदेखी हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विशेष अभियान चलाती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर मशीनों के जरिए काम निपटाया जा रहा है। इससे क्षेत्र के कई मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा और वे पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं।
फर्जी मस्टर रोल का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप फर्जी मस्टर रोल तैयार करने को लेकर सामने आया है। ग्रामीणों का दावा है कि जिन मजदूरों ने कार्यस्थल पर काम नहीं किया, उनके नाम पर हाजिरी बनाई जा रही है। शाम को कागजों में उपस्थिति दर्ज कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
बताया जा रहा है कि कई मजदूरों के अंगूठे लगवाकर उनके नाम पर राशि निकाली जा रही है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग और मजदूरों के अधिकारों के हनन का मामला बनता है।
कथित मिलीभगत पर उठे सवाल
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह पूरा खेल पंचायत स्तर पर संचालित हो रहा है। आरोप है कि कलिंगा पंचायत की मुखिया मरियम बेक की मौजूदगी में यह कार्य हो रहा है। साथ ही रोजगार सेवक सतीश साहू, मनरेगा बीपीओ और जेसीबी संचालकों की कथित मिलीभगत की चर्चा भी सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में कुछ वीडियो साक्ष्य भी सामने आए हैं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।
यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि सरकारी ऑडिट और लोकपाल जांच की प्रक्रिया के बावजूद योजनाओं को जल्दबाजी में पूरा दिखाने के लिए मशीनों का सहारा लिया जा रहा है। यदि ऐसा है, तो यह निगरानी तंत्र पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
प्रशासन ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए गुमला के उप विकास आयुक्त दिलेश्वर महतो ने जांच का आश्वासन दिया है।
डीडीसी दिलेश्वर महतो ने कहा: “मामले की पूरी जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच कितनी निष्पक्ष और त्वरित होती है तथा दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
न्यूज़ देखो: मनरेगा की साख पर बड़ा सवाल
बसिया की यह घटना मनरेगा जैसी संवेदनशील योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। यदि मशीनों से कार्य और फर्जी मस्टर रोल की पुष्टि होती है, तो यह गरीबों के हक पर सीधा प्रहार है। प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन जरूरी है कि कार्रवाई भी उतनी ही तेज और पारदर्शी हो। क्या निगरानी तंत्र इस बार सख्त संदेश दे पाएगा?
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मजदूरों का हक सुरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी
मनरेगा केवल योजना नहीं, ग्रामीण परिवारों की आजीविका का आधार है।
यदि कहीं अनियमितता दिखे, तो चुप रहना समस्या को बढ़ाता है।
जागरूक नागरिक ही पारदर्शिता की असली ताकत होते हैं।
अपने गांव की योजनाओं पर नजर रखें, सवाल पूछें और सही जानकारी साझा करें। इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें और इसे आगे बढ़ाएं, ताकि मजदूरों का हक सुरक्षित रह सके।







