शहीदों की स्मृति में सेवा का संकल्प, गुमला में मोमिन अंसारी ने जरूरतमंदों को बांटे 150 कंबल

शहीदों की स्मृति में सेवा का संकल्प, गुमला में मोमिन अंसारी ने जरूरतमंदों को बांटे 150 कंबल

author MD. Waris
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#गुमला #शहादत_दिवस : शेख भिखारी और टिकैत उमरांव सिंह की याद में कंबल वितरण कार्यक्रम।

गुमला जिले में स्वतंत्रता सेनानी शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमरांव सिंह के शहादत दिवस पर मोमिन पंचायत की ओर से कंबल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मोमिन अंसारी ने जरूरतमंदों के बीच 150 कंबल वितरित किए। कार्यक्रम की शुरुआत शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश कर की गई। आयोजन के माध्यम से शहादत की स्मृति के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।

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  • शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमरांव सिंह के शहादत दिवस पर आयोजन।
  • मोमिन पंचायत की ओर से 150 कंबल का वितरण।
  • समाजसेवी मोमिन अंसारी ने निभाई प्रमुख भूमिका।
  • संरक्षक आशिक अंसारी और सुल्तान अंसारी ने रखे विचार।
  • पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव सहित कई लोग रहे मौजूद।
  • सेवा कार्य को शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया गया।

गुमला जिले में रविवार को शहादत और सेवा का भाव एक साथ देखने को मिला, जब मोमिन पंचायत की ओर से जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमरांव सिंह के बलिदान की स्मृति में किया गया। हर साल की तरह इस वर्ष भी पंचायत ने शहादत दिवस को सेवा कार्य से जोड़ते हुए समाज के कमजोर वर्गों तक मदद पहुंचाई।

शहीदों को श्रद्धांजलि से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कंबल वितरण कार्यक्रम की शुरुआत शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमरांव सिंह को खिराज-ए-अकीदत पेश कर की गई। उपस्थित लोगों ने दोनों वीर सपूतों के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया।
इस मौके पर पंचायत के संरक्षक आशिक अंसारी ने कहा:

आशिक अंसारी ने कहा: “1857 की आज़ादी की लड़ाई के महानायक टिकैत उमरांव सिंह और शेख भिखारी ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका। चुटूपालू घाटी में सीमित साधनों के बावजूद अंग्रेजी सेना को रोकना साहस, रणनीति और बलिदान की वह मिसाल है, जिसे इतिहास कभी भुला नहीं सकता।”

1857 की क्रांति और शहादत का इतिहास किया गया याद

कार्यक्रम के दौरान संरक्षक सुल्तान अंसारी ने शहादत दिवस के ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रकाश डाला।

सुल्तान अंसारी ने कहा: “आज शहादत दिवस है। 1857 की क्रांति का बिगुल फूंकने वाले दोनों वीरों को अंग्रेजों ने चुटूपालू घाटी के निकट पेड़ पर बिना मुकदमा चलाए आठ जनवरी 1858 को फांसी दे दी थी। आज हम उन्हीं शहीदों की याद में कंबल वितरण कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपने इतिहास और बलिदान की याद दिलाने का कार्य करते हैं।

150 कंबल बांटकर निभाई गई सामाजिक जिम्मेदारी

इस अवसर पर समाजसेवी मोमिन अंसारी ने जरूरतमंदों के बीच 150 पीस कंबल वितरित किए। ठंड के मौसम में यह सहायता गरीब और असहाय लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हुई।
मोमिन अंसारी ने कहा कि मोमिन पंचायत हमेशा समाज के लोगों की मदद के लिए आगे रहती है और आने वाले दिनों में भी सामाजिक कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

पंचायत पदाधिकारियों की रही सक्रिय मौजूदगी

कार्यक्रम में मोमिन पंचायत के अध्यक्ष शाहजहां अंसारी, उपाध्यक्ष एखलाक अंसारी, सचिव कलीम अंसार के साथ शकील अंसारी, असफाक अंसारी, फिरोज अंसारी, तजमुल अंसारी, फैजी अंसारी, तबरेज अंसारी, सादाब अंसारी सहित अन्य लोग मौजूद थे।
सभी ने मिलकर कंबल वितरण में सहयोग किया और कार्यक्रम को सफल बनाया।

समाज की मजबूती पर विशेष ध्यान देने का संकल्प

पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि मोमिन पंचायत केवल जरूरतमंदों की सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की एकता और मजबूती पर भी विशेष ध्यान देती है।
उन्होंने कहा कि शहीदों की याद में किए गए सेवा कार्य समाज में आपसी सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं।

न्यूज़ देखो: शहादत की स्मृति से जुड़ी सामाजिक जिम्मेदारी

गुमला में आयोजित यह कंबल वितरण कार्यक्रम बताता है कि शहादत दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि समाज सेवा का भी संदेश देता है। मोमिन पंचायत और मोमिन अंसारी की यह पहल स्थानीय स्तर पर सामाजिक संवेदनशीलता को दर्शाती है। ऐसे कार्यक्रम इतिहास को जीवित रखने के साथ जरूरतमंदों को राहत पहुंचाते हैं। शहादत और सेवा का यह मेल समाज के लिए प्रेरणादायक है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सेवा के रास्ते ही शहीदों को सच्चा सम्मान

जब शहीदों की याद सेवा के रूप में सामने आती है, तब समाज मजबूत बनता है। जरूरतमंदों की मदद करना भी देशभक्ति का ही एक रूप है। मोमिन पंचायत की यह पहल इसी भावना को दर्शाती है।
आप भी अपने आसपास जरूरतमंदों का सहयोग करें। अपनी राय साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और समाज में सेवा व संवेदना का संदेश फैलाएं।

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Written by

रायडीह, गुमला

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