
#बानो #ठंडसेराहत : रात में स्टेशन पर रुकने वाले जरूरतमंद यात्रियों को कंबल देकर प्रशासन ने दी मदद।
बानो रेलवे स्टेशन पर बढ़ती ठंड को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने जरूरतमंद यात्रियों के लिए राहत पहल की। देर रात ट्रेनों के आगमन के कारण कई यात्री स्टेशन परिसर में ही रात्रि विश्राम करने को मजबूर रहते हैं। ठंड के साथ-साथ हाथी प्रभावित क्षेत्र होने से यात्री घर जाने के बजाय स्टेशन पर रुकना अधिक सुरक्षित मानते हैं। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए कंबल वितरण कर यात्रियों को ठंड से राहत देने का प्रयास किया गया।
- बानो बीडीओ नैमुदिन अंसारी ने स्टेशन पर जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण किया।
- जीआरपी सब इंस्पेक्टर रमेश सिंह को यात्रियों के लिए अतिरिक्त कंबल सौंपे गए।
- जिला परिषद सदस्य बिरजो कंडुलना ने भी राहत कार्य में सहभागिता निभाई।
- देर रात ट्रेनों के कारण यात्री स्टेशन पर ही रात्रि विश्राम करने को मजबूर।
- अमृत भारत बानो स्टेशन पर रात्रि विश्राम की स्थायी व्यवस्था का अभाव।
बानो रेलवे स्टेशन पर ठंड का प्रकोप बढ़ने के साथ ही मानवीय संवेदनाओं के तहत प्रशासन और जनप्रतिनिधि सहायता के लिए आगे आए हैं। जानकारी के अनुसार, देर रात ट्रेनों के पहुंचने के कारण कई यात्री अपने गंतव्य तक जाने के बजाय स्टेशन परिसर में ही रुक जाते हैं। क्षेत्र के हाथी प्रभावित होने के कारण भी यात्री रात में बाहर निकलने से परहेज करते हैं और स्टेशन पर सोना अधिक सुरक्षित मानते हैं। ऐसे में ठंड के मौसम में खुले परिसर में सोना यात्रियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
बढ़ती ठंड और यात्रियों की मजबूरी
बानो क्षेत्र में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। देर रात और तड़के के समय तापमान काफी नीचे चला जाता है, जिससे खुले में सो रहे यात्रियों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है। बानो स्टेशन पर आने वाले कई यात्री मजदूर, छात्र, बुजुर्ग और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्र के निवासी होते हैं, जिनके पास रात्रि विश्राम का कोई वैकल्पिक साधन नहीं होता। हाथी प्रभावित क्षेत्र होने के कारण जंगल और सुनसान रास्तों से होकर घर जाना जोखिम भरा होता है, इसलिए यात्री स्टेशन परिसर में ही रुकना सुरक्षित समझते हैं।
बीडीओ नैमुदिन अंसारी की पहल
इन परिस्थितियों को देखते हुए बानो बीडीओ नैमुदिन अंसारी ने मानवीय पहल करते हुए रेलवे स्टेशन पहुंचकर जरूरतमंद यात्रियों के बीच कंबल का वितरण किया। उन्होंने स्वयं स्टेशन परिसर का जायजा लिया और उन यात्रियों को कंबल उपलब्ध कराया, जो ठंड में खुले स्थान पर सोने को मजबूर थे। इस पहल से यात्रियों को काफी राहत मिली और प्रशासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ।
जीआरपी की भूमिका और यात्रियों की व्यवस्था
कंबल वितरण के दौरान बानो जीआरपी के सब इंस्पेक्टर रमेश सिंह की भी अहम भूमिका रही। बीडीओ द्वारा कुछ कंबल यात्रियों के उपयोग के लिए उन्हें सौंपे गए। रमेश सिंह यात्रियों के लिए कूट की व्यवस्था कर देते थे, जिसे यात्री बिछाकर सोते थे, ताकि ठंड और नमी से बचाव हो सके।
इस संबंध में रमेश सिंह ने कहा:
रमेश सिंह ने कहा: “यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा हमारी प्राथमिकता है। ठंड के मौसम में उन्हें यथासंभव राहत देना जरूरी है।”
जिला परिषद सदस्य का सहयोग
इधर, यात्रियों की स्थिति की जानकारी मिलने पर जिला परिषद सदस्य बिरजो कंडुलना भी राहत कार्य में शामिल हुए। उन्होंने जीआरपी सब इंस्पेक्टर रमेश सिंह के साथ मिलकर यात्रियों के बीच कंबल का वितरण किया। इस संयुक्त प्रयास से यह स्पष्ट हुआ कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर जमीनी स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए तत्पर हैं। यात्रियों ने भी इस पहल के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।
अमृत भारत बानो स्टेशन पर सुविधाओं की कमी
हालांकि राहत कार्य सराहनीय है, लेकिन बानो स्टेशन की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल भी खड़े होते हैं। अमृत भारत योजना के अंतर्गत शामिल बानो स्टेशन पर अभी तक रात्रि विश्राम के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। स्टेशन पर छत तो है, लेकिन दरवाजे और बंद प्रतीक्षालय का अभाव है, जिसके कारण यात्रियों को खुले में ही सोना पड़ता है। ठंड, हवा और जंगली जानवरों के खतरे के बीच यह स्थिति यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है।
यात्रियों की मांग और जमीनी हकीकत
यात्रियों का कहना है कि यदि स्टेशन पर बंद प्रतीक्षालय, रात्रि विश्राम कक्ष या अस्थायी शेल्टर की व्यवस्था हो जाए, तो ठंड और असुरक्षा की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि अमृत भारत योजना के तहत स्टेशन का विकास तभी सार्थक होगा, जब यात्रियों की मूलभूत जरूरतों पर ध्यान दिया जाए।
न्यूज़ देखो: राहत पहल के साथ स्थायी समाधान की जरूरत
बानो स्टेशन पर कंबल वितरण जैसी पहल प्रशासनिक संवेदनशीलता को दर्शाती है, लेकिन यह अस्थायी राहत मात्र है। अमृत भारत योजना में शामिल स्टेशन पर रात्रि विश्राम की स्थायी व्यवस्था न होना गंभीर सवाल खड़े करता है। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना रेलवे और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि क्या इस ओर ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
ठंड में इंसानियत ही सबसे बड़ी ताकत
जब प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर जरूरतमंदों के लिए आगे आते हैं, तो समाज में भरोसा पैदा होता है। लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि अस्थायी राहत के साथ स्थायी समाधान पर काम हो। बानो स्टेशन पर यात्रियों के लिए सुरक्षित रात्रि विश्राम की व्यवस्था समय की मांग है।





