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पशुपालन से आत्मनिर्भरता की पहल, चैनपुर में 7 लाभुकों को सूकर इकाई का वितरण

#चैनपुर #पशुपालन_योजना : मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत 7 चयनित लाभुकों को सूकर इकाई प्रदान।

चैनपुर प्रखंड परिसर में मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना वर्ष 2024-25 के अंतर्गत सूकर विकास योजना के तहत 7 लाभुकों को सूकर इकाई का वितरण किया गया। प्रत्येक लाभुक को एक इकाई में चार मादा सूकरी और एक नर सूकर प्रदान किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना और आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने पशुपालन को आयवृद्धि का सशक्त माध्यम बताया।

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  • मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना 2024-25 के तहत वितरण कार्यक्रम।
  • 7 चयनित लाभुकों को एक-एक सूकर इकाई प्रदान।
  • प्रत्येक इकाई में 04 मादा सूकरी और 01 नर सूकर
  • प्रखंड विकास पदाधिकारी यादव बैठा सहित अधिकारी रहे मौजूद।
  • ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार व आर्थिक सशक्तिकरण की पहल।

चैनपुर प्रखंड में पशुपालन के माध्यम से ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना वर्ष 2024-25 के अंतर्गत सूकर विकास योजना के तहत बुधवार को प्रखंड परिसर में चयनित लाभुकों के बीच सूकर इकाइयों का वितरण किया गया। दोपहर 1 बजे से आयोजित इस कार्यक्रम में लाभुकों के बीच खासा उत्साह देखने को मिला।

योजना के तहत मिला स्वरोजगार का अवसर

इस योजना के अंतर्गत कुल 7 लाभुकों को सूकर पालन के लिए एक-एक इकाई दी गई। प्रत्येक इकाई में चार मादा सूकरी और एक नर सूकर शामिल है, जिससे लाभुक भविष्य में सूकर प्रजनन और बिक्री के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार, यह योजना ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका का मजबूत आधार तैयार करने में सहायक होगी।

कार्यक्रम में अधिकारियों ने दिया मार्गदर्शन

वितरण कार्यक्रम के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी यादव बैठा, जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा और प्रथम पशुचिकित्सक पदाधिकारी डॉक्टर धर्मरक्षित उपस्थित रहीं। अधिकारियों ने लाभुकों को सूकर पालन की वैज्ञानिक विधियों, देखभाल, टीकाकरण और स्वच्छता के महत्व के बारे में जानकारी दी।

प्रखंड विकास पदाधिकारी यादव बैठा ने कहा:

“पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस योजना से लाभुक आत्मनिर्भर बनेंगे और उनकी आय में निरंतर वृद्धि होगी।”

पशुपालन से बढ़ेगी ग्रामीण आय

पशुचिकित्सक पदाधिकारी डॉक्टर धर्मरक्षित ने लाभुकों को बताया कि सही देखभाल और संतुलित आहार से सूकर पालन एक लाभकारी व्यवसाय बन सकता है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच से पशुओं की उत्पादकता बढ़ती है, जिससे आर्थिक लाभ सुनिश्चित होता है।

चयनित लाभुकों में दिखा उत्साह

इस योजना के तहत चयनित लाभुकों में सरिता टोप्पो, गांगी देवी, फरीदा लकड़ा, तिलिना मिंस, बेसिस मिंस, जेम्स दीपक हुजूर सहित अन्य शामिल रहे। लाभुकों ने सरकार की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि सूकर पालन से उनके परिवार की आमदनी बढ़ेगी और जीवन स्तर में सुधार आएगा।

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ग्रामीणों ने सराहा सरकारी पहल

ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की योजनाएं गांवों में रोजगार के नए अवसर सृजित करती हैं। खासकर सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए पशुपालन एक सशक्त विकल्प बनकर उभर रहा है। योजना के माध्यम से न केवल आर्थिक मजबूती आएगी, बल्कि गांवों में पलायन की समस्या को भी कम करने में मदद मिलेगी।

न्यूज़ देखो: पशुपालन से आत्मनिर्भर गांव की ओर

चैनपुर में सूकर इकाई वितरण कार्यक्रम यह दर्शाता है कि सरकार पशुपालन को ग्रामीण विकास का अहम आधार मान रही है। यदि लाभुकों को निरंतर तकनीकी सहयोग और बाजार सुविधा मिले, तो यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। अब जरूरत है कि ऐसे कार्यक्रमों की नियमित निगरानी हो, ताकि इसका पूरा लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मेहनत और योजना से बदलेगा भविष्य

ग्रामीण समृद्धि की राह पशुपालन जैसे व्यावहारिक विकल्पों से होकर गुजरती है। सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग से छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसी योजनाएं लागू हो रही हैं, तो आगे आकर उनका लाभ उठाएं।
अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को साझा करें और आत्मनिर्भर गांव की इस पहल को मजबूत बनाएं।

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Aditya Kumar

डुमरी, गुमला

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