दुमका को सिल्क सिटी बनाने की पहल तेज, तसर उत्पादकों की कार्यशाला में वैल्यू एडिशन पर जोर

दुमका को सिल्क सिटी बनाने की पहल तेज, तसर उत्पादकों की कार्यशाला में वैल्यू एडिशन पर जोर

author Saroj Verma
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#दुमका #रेशम_उद्योग : तसर उत्पादन को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए कार्यशाला में बनी रणनीति।

दुमका के इंडोर स्टेडियम में तसर उत्पादकों के लिए प्रमंडल स्तरीय एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें किसानों और अधिकारियों ने भाग लिया। उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने तसर उत्पादन में वैल्यू एडिशन और बाजार विस्तार पर जोर दिया। रामगढ़ में सिल्क क्लस्टर विकसित करने की योजना भी साझा की गई। इस पहल को दुमका को “सिल्क सिटी” बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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  • इंडोर स्टेडियम, दुमका में तसर उत्पादकों की कार्यशाला आयोजित।
  • उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने वैल्यू एडिशन और बाजार विस्तार पर दिया जोर।
  • रामगढ़ प्रखंड में सिल्क क्लस्टर विकसित करने की योजना।
  • “मयूराक्षी सिल्क” ब्रांड को मजबूत करने पर चर्चा।
  • उत्कृष्ट तसर उत्पादक किसानों को सम्मानित किया गया।
  • दुमका को “सिल्क सिटी” बनाने की दिशा में पहल तेज

दुमका में रेशम उद्योग को नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इंडोर स्टेडियम में आयोजित प्रमंडल स्तरीय एकदिवसीय कार्यशाला में तसर उत्पादकों, किसानों और अधिकारियों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। इस कार्यशाला का उद्देश्य तसर उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की रणनीति तैयार करना था।

तसर उत्पादन में दुमका की पहचान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने कहा कि दुमका पहले से ही तसर उत्पादन के क्षेत्र में देशभर में अपनी एक अलग पहचान रखता है।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इस पारंपरिक उद्योग को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़कर आगे बढ़ाया जाए।

उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने कहा: “तसर उत्पादन में वैल्यू एडिशन कर इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना जरूरी है, तभी किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि संभव है।”

वैल्यू एडिशन और बाजार विस्तार पर जोर

कार्यशाला में इस बात पर विशेष चर्चा की गई कि तसर उत्पादों में वैल्यू एडिशन कर उनकी गुणवत्ता और बाजार में मांग को बढ़ाया जाए।

विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि यदि कच्चे तसर के बजाय तैयार उत्पादों पर ध्यान दिया जाए, तो उन्हें अधिक लाभ मिल सकता है।

इसके साथ ही विपणन व्यवस्था को मजबूत करने और उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के उपायों पर भी विचार किया गया।

रामगढ़ में सिल्क क्लस्टर विकसित करने की योजना

कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी गई कि रामगढ़ प्रखंड में सिल्क क्लस्टर विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

इस क्लस्टर के माध्यम से तसर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को एक ही स्थान पर विकसित किया जाएगा, जिससे किसानों को सुविधा और बेहतर अवसर मिलेंगे।

यह पहल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।

“मयूराक्षी सिल्क” ब्रांड को मिलेगा बढ़ावा

कार्यशाला में “मयूराक्षी सिल्क” ब्रांड को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि इस ब्रांड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।

ब्रांडिंग और पैकेजिंग में सुधार के जरिए उत्पादों की गुणवत्ता और आकर्षण को बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।

उत्कृष्ट किसानों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तसर उत्पादक किसानों को सम्मानित किया गया। इससे किसानों का मनोबल बढ़ा और उन्हें बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरणा मिली।

अधिकारियों ने कहा कि किसानों की मेहनत और नवाचार ही इस उद्योग की असली ताकत है।

किसानों और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी

कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसानों और संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। सभी ने मिलकर तसर उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए अपने सुझाव साझा किए।

इस दौरान तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण और नई योजनाओं की भी जानकारी दी गई।

न्यूज़ देखो: परंपरा से उद्योग तक, दुमका के विकास की नई दिशा

दुमका में तसर उद्योग को “सिल्क सिटी” के रूप में विकसित करने की पहल यह दर्शाती है कि पारंपरिक संसाधनों को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़कर बड़ा आर्थिक बदलाव लाया जा सकता है। यदि वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग पर सही तरीके से काम किया गया, तो यह न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा। अब देखना यह होगा कि योजनाएं जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपने हुनर को पहचानें, स्थानीय उद्योग को दें नई उड़ान

हमारे आसपास मौजूद संसाधन और परंपराएं ही हमारी असली ताकत हैं।
जरूरत है उन्हें पहचानकर सही दिशा में आगे बढ़ाने की।

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किसानों और कारीगरों का समर्थन कर हम उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

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Written by

दुमका/देवघर

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