
#कोलेबिरा #पीटीएम_बैठक : कोम्बाकेरा विद्यालय में नवाचारों से अभिभावकों की सहभागिता में दिखी उल्लेखनीय बढ़ोतरी।
कोलेबिरा प्रखंड के राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय कोम्बाकेरा में चौथी अभिभावक शिक्षक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें 65 से अधिक अभिभावकों ने भाग लिया। बैठक में शिक्षा, उपस्थिति और विद्यालय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में मुखिया अंकिता केरकेट्टा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। यह पहल विद्यालय और अभिभावकों के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।
- राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, कोम्बाकेरा में चौथी पीटीएम बैठक का आयोजन।
- 65 से अधिक अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी दर्ज।
- मुख्य अतिथि के रूप में मुखिया अंकिता केरकेट्टा रहीं उपस्थित।
- प्रधानाध्यापक विजयंत कुमार गुप्ता ने शैक्षणिक प्रगति और FLN पर दी जानकारी।
- बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को नोटबुक और चॉकलेट देकर सम्मानित किया गया।
- पिरामल फाउंडेशन की गांधी फेलो रविना मालविया ने आयोजन में निभाई अहम भूमिका।
कोलेबिरा प्रखंड क्षेत्र स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, कोम्बाकेरा में आयोजित चौथी अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) ने शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया। इस बैठक में बड़ी संख्या में अभिभावकों की भागीदारी देखने को मिली, जिससे विद्यालय और समुदाय के बीच मजबूत संवाद स्थापित हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों की प्रगति, उपस्थिति और विद्यालय की व्यवस्थाओं पर अभिभावकों को जागरूक करना था।
पारंपरिक स्वागत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से अभिभावकों के स्वागत के साथ की गई। तिलक, मांदर की धुन और स्वागत गीत के माध्यम से सभी अभिभावकों का सम्मान किया गया। इस पहल ने अभिभावकों को विद्यालय से जोड़ने और अपनत्व का भाव विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिक्षा और प्रगति पर विस्तृत चर्चा
विद्यालय के प्रधानाध्यापक विजयंत कुमार गुप्ता के नेतृत्व में शिक्षकों ने छात्रों की उपस्थिति, नामांकन और शैक्षणिक प्रगति पर विस्तार से चर्चा की। विशेष रूप से FLN (आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान) पर जोर दिया गया, जिससे बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत किया जा सके।
बैठक में मध्याह्न भोजन, स्वच्छता, पेयजल, शौचालय व्यवस्था और स्कूल ग्रांट के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इन विषयों पर अभिभावकों की राय और सुझावों को गंभीरता से सुना गया।
खुला संवाद और सुझावों का आदान-प्रदान
पीटीएम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ओपन प्रश्न-उत्तर सत्र रहा, जिसमें अभिभावकों ने खुलकर अपनी जिज्ञासाएं रखीं। शिक्षकों और अभिभावकों के बीच यह संवाद शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुआ।
छात्रों का सम्मान और बाल संसद की भूमिका
कार्यक्रम के दौरान बेहतर उपस्थिति और उच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को नोटबुक और चॉकलेट देकर सम्मानित किया गया। इससे बच्चों का मनोबल बढ़ा और उन्हें आगे बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिली।
इसके अलावा, बाल संसद के सदस्यों ने अभिभावकों को विद्यालय का भ्रमण कराया और विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी दी, जिससे पारदर्शिता और विश्वास को बढ़ावा मिला।
मुख्य अतिथि और अन्य वक्ताओं के विचार
बैठक को संबोधित करते हुए शाहपुर पंचायत की मुखिया अंकिता केरकेट्टा ने कहा:
“सभी बच्चे मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने माता-पिता तथा गांव का नाम रोशन करें। अभिभावक भी अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें और उनकी पढ़ाई में सहयोग करें।”
वहीं पिरामल फाउंडेशन की गांधी फेलो रविना मालविया ने अभिभावकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा:
“पीटीएम बैठकों का नियमित आयोजन बहुत जरूरी है। इससे अभिभावकों के सुझाव मिलते हैं और विद्यालय के विकास को नई दिशा मिलती है।”
उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की।
नवाचारों से बढ़ी अभिभावकों की भागीदारी
विद्यालय द्वारा इस बार कई नवाचार किए गए, जिनमें घर-घर जाकर ग्रीटिंग कार्ड के माध्यम से निमंत्रण देना, रैली निकालना और नुक्कड़ नाटक आयोजित करना शामिल रहा। इन प्रयासों से अभिभावकों की उपस्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली।
यह पहल दर्शाती है कि यदि विद्यालय और समुदाय मिलकर प्रयास करें, तो शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव संभव है।
सामूहिक संकल्प के साथ बैठक का समापन
बैठक के अंत में विद्यालय के विकास के लिए अभिभावकों से सुझाव आमंत्रित किए गए। सभी ने मिलकर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का संकल्प लिया। यह पीटीएम न केवल संवाद का मंच बनी, बल्कि विद्यालय और अभिभावकों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।
न्यूज़ देखो: शिक्षा में जनभागीदारी का मजबूत उदाहरण
कोम्बाकेरा विद्यालय की यह पहल बताती है कि शिक्षा केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी भूमिका है। नवाचारों के माध्यम से अभिभावकों को जोड़ना एक सराहनीय कदम है, जो अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। सवाल यह है कि क्या ऐसे प्रयासों को सभी स्कूलों में नियमित रूप से लागू किया जाएगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मिलकर बदलें शिक्षा का भविष्य, जिम्मेदारी हम सबकी
शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, यह समाज के विकास की नींव है। जब अभिभावक और शिक्षक साथ आते हैं, तभी बच्चों का भविष्य मजबूत बनता है। ऐसे आयोजनों में भाग लेकर हर अभिभावक अपनी जिम्मेदारी निभा सकता है।अपने बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भागीदारी निभाएं और विद्यालय से जुड़े रहें।






