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निकाय चुनाव के दौरान नगर परिषद कार्यालय भी है मुद्दा? तालाब भरकर नगर परिषद कार्यालय निर्माण का आरोप, विधायक ने डीसी से मांगा हस्तक्षेप

#गढ़वा #जलाशय_संरक्षण : सोनपुरवा क्षेत्र के तालाब भराई मामले में विधायक ने प्रशासन से तत्काल रोक लगाने की मांग की।

गढ़वा जिले के शहरी क्षेत्र सोनपुरवा में स्थित तालाबों को मिट्टी भरकर समाप्त किए जाने के आरोप सामने आए हैं। इस मामले को लेकर विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने उपायुक्त दिनेश यादव से मुलाकात कर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। विधायक का कहना है कि नगर परिषद कार्यालय निर्माण के लिए जलाशयों को नष्ट किया जा रहा है, जो पर्यावरण और भविष्य के जलसंकट के लिए खतरा है। प्रशासन से इस पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।

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  • सोनपुरवा शहरी क्षेत्र में तीन छोटे तालाबों में मिट्टी भराई का आरोप।
  • विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने उपायुक्त को सौंपा लिखित ज्ञापन।
  • नगर परिषद कार्यालय निर्माण के लिए जलाशय समाप्त किए जाने की शिकायत।
  • तालाब पूर्व में मत्स्य विभाग के अधीन और आजीविका से जुड़ा।
  • स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद कार्य जारी रहने का आरोप।
  • निर्माण कार्य पर तत्काल रोक और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग।

गढ़वा जिले के शहरी क्षेत्र सोनपुरवा में स्थित तालाबों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। क्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक जलस्रोतों पर खतरे को देखते हुए स्थानीय विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने शुक्रवार को समाहरणालय पहुंचकर उपायुक्त दिनेश यादव से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को सामने रखते हुए जलाशयों के संरक्षण को लेकर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया।

विधायक ने उपायुक्त को एक लिखित ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि सोनपुरवा क्षेत्र में स्थित तीन छोटे तालाबों में जानबूझकर मिट्टी भराई कर जलाशयों को समाप्त किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह कार्य नगर परिषद कार्यालय के निर्माण के उद्देश्य से किया जा रहा है, जो न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि पर्यावरणीय नियमों का भी उल्लंघन है।

शहरी क्षेत्र में जलस्रोतों की पहले से कमी

विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने बताया कि गढ़वा जैसे शहरी क्षेत्रों में पहले से ही जलस्रोतों की भारी कमी है। ऐसे में तालाबों को पाटना भविष्य में गंभीर जलसंकट को जन्म दे सकता है। उन्होंने कहा कि जलाशय केवल पानी का स्रोत नहीं होते, बल्कि भू-जल स्तर बनाए रखने, पर्यावरण संतुलन और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी अत्यंत आवश्यक होते हैं।

उनके अनुसार, यदि समय रहते इस तरह की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले वर्षों में आम लोगों को पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

नगर परिषद पर मिलीभगत का आरोप

विधायक ने आरोप लगाया कि स्थानीय नागरिकों द्वारा लगातार विरोध किए जाने के बावजूद नगर परिषद की कथित मिलीभगत से तालाब में मिट्टी भराई कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही और जनभावनाओं की अनदेखी करार दिया।

उनका कहना है कि जनता की सहमति और वैकल्पिक स्थल के बिना इस तरह का निर्माण कार्य कराना लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का विनाश स्वीकार्य नहीं है।

मत्स्य विभाग के अधीन था तालाब

विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने यह भी जानकारी दी कि सोनपुरवा स्थित संबंधित तालाब पूर्व में मत्स्य विभाग के अधीन था। यह तालाब न केवल क्षेत्र का महत्वपूर्ण जलस्रोत रहा है, बल्कि इससे स्थानीय लोगों की आजीविका भी जुड़ी हुई थी।

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तालाब के माध्यम से मछली पालन जैसे कार्य होते थे, जिससे कई परिवारों को रोजगार मिलता था। ऐसे में तालाब को समाप्त करना सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी नुकसानदेह बताया गया।

निर्माण कार्य पर रोक और कार्रवाई की मांग

विधायक ने उपायुक्त दिनेश यादव से स्पष्ट मांग की कि तालाब में किए जा रहे नगर परिषद कार्यालय के निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही स्थल चयन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि सरकारी नियमों और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी कर जलाशयों को नुकसान पहुंचाना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाए।

राज्य स्तर तक पहुंचाया गया मामला

इस गंभीर मुद्दे को लेकर विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने जिला प्रशासन के साथ-साथ राज्य स्तर पर भी पहल की है। उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार और नगर विकास विभाग के सचिव को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया है।

विधायक ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन मिलकर इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करेंगे और तालाबों के संरक्षण की दिशा में ठोस निर्णय लिया जाएगा।

न्यूज़ देखो: विकास बनाम पर्यावरण की चुनौती

सोनपुरवा का यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का विनाश उचित है। शहरी क्षेत्रों में जलाशयों का संरक्षण भविष्य की बड़ी जरूरत है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी संवेदनशीलता दिखाता है और क्या तालाबों को बचाया जा सकेगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जल संरक्षण ही सुरक्षित भविष्य की कुंजी

तालाब, नदी और जलाशय हमारी आने वाली पीढ़ियों की अमानत हैं। यदि आज इन्हें बचाया नहीं गया, तो कल पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचेगा। इस मुद्दे पर अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।

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