#बानो #शिवालयप्राणप्रतिष्ठा : शंकराचार्य ने डुमरिया में धर्मसभा को संबोधित किया।
पश्चिमी सिंहभूम के आनंदपुर से सटे बानो प्रखंड अंतर्गत डुमरिया और टोनियाँ गांव में शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हुआ। द्वारका शारदा पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए अच्छे कर्मों और धर्म पालन का संदेश दिया। ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया।
- डुमरिया और टोनियाँ में शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित।
- जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने की पूजा-अर्चना।
- मोटरसाइकिल रैली निकालकर युवकों ने किया भव्य स्वागत।
- धर्मसभा में अच्छे कर्म, गुरु सेवा और धर्म पालन पर दिया जोर।
- सोमवार को नोमिल और जलडेगा में भी करेंगे धर्मसभा को संबोधित।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के आनंदपुर से सटे बानो प्रखंड के सुदूरवर्ती गांव डुमरिया और टोनियाँ में शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर द्वारका शारदा पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज विश्व कल्याण आश्रम प्रवास के दौरान पहुंचे। ग्रामीणों ने जयघोष के साथ उनका भव्य स्वागत किया। युवाओं ने मोटरसाइकिल रैली निकालकर स्वामी जी की अगवानी की।
भव्य स्वागत और मंदिर नामकरण
शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर शिवालय का नामकरण किया। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे। पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।
ग्रामीणों ने बताया कि यह मंदिर निर्माण उनके लिए आस्था और एकता का प्रतीक है। प्राण प्रतिष्ठा के साथ गांव में धार्मिक ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ।
अच्छे कर्मों से मिलती है मानव देह
धर्मसभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और यह हमें हमारे अच्छे कर्मों के कारण प्राप्त होता है।
शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा: “हमें अच्छे कर्मों के कारण मानव शरीर प्राप्त हुआ है। धर्म के मार्ग पर चलने, माता-पिता और गुरु की सेवा करने तथा दीन-दुखियों की सहायता करने से ही सच्चे पुण्य की प्राप्ति होती है।”
उन्होंने कहा कि बिना किसी प्रलोभन के अपनी कुल परंपरा और संस्कृति का ध्यान रखते हुए बच्चों को धर्म के प्रति जागरूक करना चाहिए। समाज को धर्म से भटकाने के प्रयासों को सामूहिक रूप से विफल करना आवश्यक है।
मंदिर निर्माण को बताया पुण्य का कार्य
स्वामी जी ने कहा कि मंदिर का निर्माण करना स्वयं में एक महान धार्मिक कार्य है। मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और संस्कार देने का केंद्र होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि नियमित रूप से पूजा-अर्चना कर धर्म के मार्ग को अपनाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए धर्मसभा और सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। सामूहिक एकजुटता से ही समाज मजबूत बनता है।
विभिन्न गांवों से पहुंचे श्रद्धालु
कार्यक्रम में ब्रह्मचारी सचित स्वरूप, शिव प्रताप सिंहदेव, इंद्रजीत मल्लिक, उमेश रवानी सहित विभिन्न गांवों से आए महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया और शिवालय की प्राण प्रतिष्ठा को ऐतिहासिक बताया।
आयोजन के दौरान निशुल्क चिकित्सा शिविर का भी आयोजन किया गया, जिससे ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला। होली के अवसर पर इस धार्मिक कार्यक्रम ने क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण को और सशक्त किया।
आगामी कार्यक्रम की जानकारी
जानकारी दी गई कि जगतगुरु शंकराचार्य सोमवार को बानो के नोमिल और जलडेगा में भी धर्मसभा को संबोधित करेंगे। वहां भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।
न्यूज़ देखो: आस्था के साथ सामाजिक चेतना का संदेश
डुमरिया और टोनियाँ में आयोजित शिवालय प्राण प्रतिष्ठा समारोह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी संदेश देता है। जब धर्मसभा में नैतिक मूल्यों, सेवा और संस्कारों की बात होती है, तो समाज को दिशा मिलती है। ऐसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
धर्म और संस्कार से मजबूत बनेगा समाज
मानव जीवन को सार्थक बनाने के लिए अच्छे कर्म और सेवा भावना जरूरी है। आइए हम भी अपने गांव और समाज में सकारात्मक पहल को बढ़ावा दें। मंदिर और धार्मिक स्थल केवल आस्था नहीं, बल्कि संस्कार और एकता के केंद्र हैं।
इस आयोजन पर अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें। खबर को शेयर करें और अपने क्षेत्र की धार्मिक व सामाजिक गतिविधियों की जानकारी हमें भेजें, ताकि हर सकारात्मक प्रयास को मंच मिल सके।