#सिमडेगा #जेलअदालतशिविर : जिला विधिक सेवा प्राधिकार की पहल पर बंदियों को कानूनी अधिकारों की जानकारी और स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
सिमडेगा मंडलकारा में जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा जेल अदालत सह स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई और स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं। कार्यक्रम में न्यायिक एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय रही।
- जिला विधिक सेवा प्राधिकार सिमडेगा द्वारा मंडलकारा में शिविर का आयोजन।
- चीफ एलएडीसीएस प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने बंदियों को कानूनी अधिकारों की जानकारी दी।
- प्रत्येक बंदी को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई।
- सदर अस्पताल की मेडिकल टीम ने स्वास्थ्य जांच कर दवाइयों का वितरण किया।
- सचिव मरियम हेमरोम ने ऐसे शिविरों को जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण बताया।
सिमडेगा में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की पहल पर मंडलकारा में जेल अदालत सह स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस विशेष शिविर का मुख्य उद्देश्य बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें सुलभ न्याय की दिशा में मार्गदर्शन देना था। साथ ही बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण के माध्यम से आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
बंदियों को दी गई विधिक अधिकारों की विस्तृत जानकारी
शिविर के दौरान चीफ एलएडीसीएस प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने उपस्थित बंदियों को न्यायिक प्रक्रिया, उनके संवैधानिक अधिकारों तथा उपलब्ध विधिक सहायता योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली का मूल उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई और न्याय उपलब्ध कराना है, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में क्यों न हो।
“प्रत्येक बंदी को न्याय पाने का अधिकार है। यदि किसी बंदी के पास निजी वकील की व्यवस्था नहीं है, तो उसे निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार जरूरतमंद बंदियों को मुफ्त कानूनी सलाह, वकील की सुविधा और न्यायिक प्रक्रिया से संबंधित मार्गदर्शन उपलब्ध कराता है। इस दौरान बंदियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों का समाधान भी किया गया, जिससे उनमें आत्मविश्वास और जागरूकता का संचार हुआ।
स्वास्थ्य जांच शिविर में किया गया परीक्षण
कार्यक्रम के दूसरे चरण में स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया, जिसमें सदर अस्पताल की मेडिकल टीम ने भाग लिया। मेडिकल टीम ने मंडलकारा में निरुद्ध बंदियों का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच के दौरान रक्तचाप, शुगर, त्वचा संबंधी समस्याएं और अन्य सामान्य रोगों की पहचान की गई।
चिकित्सकों ने आवश्यक परामर्श देते हुए स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। जिन बंदियों को दवाओं की आवश्यकता थी, उन्हें मौके पर ही निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। गंभीर रोगों से पीड़ित बंदियों के लिए आगे की चिकित्सा जांच की सिफारिश भी की गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने साफ-सफाई, संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व पर भी बल दिया।
जागरूकता और मानवाधिकार संरक्षण की दिशा में पहल
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव मरियम हेमरोम ने बताया कि इस प्रकार के संयुक्त शिविर बंदियों के स्वास्थ्य और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में बंदी अपने अधिकारों का लाभ नहीं उठा पाते, इसलिए ऐसे कार्यक्रम आवश्यक हैं।
“हमारा प्रयास है कि नियमित अंतराल पर ऐसे शिविर आयोजित कर बंदियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा और विधिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए।”
उन्होंने यह भी बताया कि विधिक सेवा प्राधिकार का उद्देश्य समाज के हर वर्ग, विशेषकर कमजोर और जरूरतमंद लोगों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है।
न्याय और स्वास्थ्य दोनों पर समान फोकस
इस संयुक्त पहल से यह स्पष्ट संदेश गया कि न्यायिक व्यवस्था केवल अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास करती है। मंडलकारा में आयोजित यह शिविर न्याय और स्वास्थ्य—दोनों मूलभूत आवश्यकताओं को एक साथ संबोधित करने का प्रयास था।
कार्यक्रम के दौरान जेलकर्मी एवं न्यायालयकर्मी भी मौजूद रहे और उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया। बंदियों ने भी शिविर के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
न्यूज़ देखो: संवेदनशील व्यवस्था की झलक
जेलों में इस प्रकार के विधिक और स्वास्थ्य शिविर यह दर्शाते हैं कि प्रशासन मानवाधिकारों और संवेदनशील न्याय प्रणाली के प्रति प्रतिबद्ध है। बंदियों को भी समाज का हिस्सा मानते हुए उनके अधिकारों और स्वास्थ्य की देखभाल करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का संकेत है। ऐसी पहलें न्याय को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में सहायक होती हैं।
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न्याय और स्वास्थ्य दोनों ही प्रत्येक नागरिक का अधिकार हैं।
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