Giridih

ओपेन कास्ट माइंस में 64 विस्थापित परिवारों को पहले नौकरी देने की मांग पर जेसीएमयू की बैठक में बनी रणनीति

#गिरिडीह #मजदूर_अधिकार : हक के लिए एकजुट हुआ झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन।

गिरिडीह के पपरवाटांड स्थित झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन कार्यालय में सोमवार को संगठन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कोलियरी क्षेत्र के विस्थापित परिवारों और स्थानीय मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर गहन विचार–विमर्श हुआ। झामुमो जिला अध्यक्ष संजय सिंह सहित कई यूनियन नेताओं ने ओपेन कास्ट माइंस परियोजना के शुरू होने से पहले विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर नौकरी देने की मांग उठाई। इस बैठक को मजदूर हितों के लिए निर्णायक पहल बताया जा रहा है।

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  • झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन की बैठक गिरिडीह के पपरवाटांड कार्यालय में सम्पन्न।
  • ओपेन कास्ट माइंस शुरू होने से पहले 64 विस्थापित परिवारों को नौकरी देने की मांग।
  • जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा—विस्थापितों के हक के लिए आर पार की लड़ाई।
  • जोनल उपाध्यक्ष दिलीप मंडल ने विस्थापितों के लंबे संघर्ष का मुद्दा उठाया।
  • जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा ने स्थानीय मजदूरों की उपेक्षा न करने की चेतावनी।
  • परियोजना से जुड़े रोजगार अधिकारों पर आगे की रणनीति बनाने का निर्णय।

गिरिडीह जिले के कोलियरी क्षेत्र में प्रस्तावित ओपेन कास्ट माइंस परियोजना के शुरू होने से पहले मजदूर संगठनों ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है। इसी कड़ी में सोमवार को पपरवाटांड स्थित झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन कार्यालय में एक अहम बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में मुख्य रूप से विस्थापित परिवारों को नौकरी में प्राथमिकता देने, मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करने और सीसीएल प्रबंधन की नीतियों पर चर्चा की गई।

विस्थापितों के अधिकार पर आर पार संघर्ष की चेतावनी

बैठक को संबोधित करते हुए झामुमो जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने बेहद कड़े तेवर अपनाए। उन्होंने कहा कि माइंस चालू होने से पहले ही विस्थापितों और मजदूरों के हितों की अनदेखी की जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रबंधन द्वारा न्यायोचित कदम नहीं उठाए गए तो यूनियन सशक्त आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

झामुमो जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा: “विस्थापित परिवारों और स्थानीय मजदूरों का हित हमारी पहली प्राथमिकता है। ओपेन कास्ट माइंस के शुरू होने से पहले ही रोजगार का हक सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आर पार की लड़ाई लड़ी जाएगी और जरूरत पड़ी तो कोलियरी ठप कर दी जाएगी।”

उन्होंने कहा कि सीसीएल प्रबंधन को संवेदनशीलता दिखाते हुए 64 परिवारों को सबसे पहले नौकरी देनी होगी, क्योंकि ये वे लोग हैं जिनकी जमीन और घर–बार इस परियोजना के कारण प्रभावित हुए हैं। उनका पुनर्वास और रोजगार अधिकार कानूनी और नैतिक दोनों दृष्टि से जरूरी है।

एतिहासिक संघर्ष को मिला नया स्वर

बैठक में यूनियन के जोनल उपाध्यक्ष दिलीप मंडल ने बताया कि विस्थापित परिवार वर्षों से अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन अब तक उन्हें न तो स्थायी नौकरी मिली और न ही उचित मुआवजा। उन्होंने कहा कि माइंस परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी है, पर विकास के नाम पर ग्रामीणों को बेरोजगार छोड़ देना सही नहीं है।

यूनियन के जोनल उपाध्यक्ष दिलीप मंडल ने कहा: “विस्थापित परिवारों का दर्द बहुत पुराना है। इन लोगों ने कोलियरी विस्तार के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया। इसलिए नौकरी में पहली प्राथमिकता इन्हीं परिवारों को मिलनी चाहिए, तभी परियोजना का वास्तविक लाभ समाज तक पहुंचेगा।”

उन्होंने आगे कहा कि ग्राम सभाओं और पंचायतों के माध्यम से भी कई बार अधिकारियों को ज्ञापन दिया गया है, पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब यूनियन निर्णायक आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहा है।

स्थानीय मजदूरों की उपेक्षा अस्वीकार्य

झामुमो के जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा ने बैठक में मजदूरों का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि प्रबंधन बाहरी श्रमिकों को लाकर स्थानीय युवाओं को रोजगार से वंचित करने की योजना बना रहा है। जबकि कोलियरी क्षेत्र की पहचान ही यहां के मेहनतकश मजदूरों से है।

झामुमो जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा ने कहा: “हमेशा से कोलियरी की नींव स्थानीय मजदूरों ने रखी है। उनकी उपेक्षा कदापि स्वीकार नहीं की जाएगी। सीसीएल प्रबंधन को रोजगार नीति बनाते समय सबसे पहले आसपास के गांवों के लोगों को ध्यान में रखना होगा।”

उन्होंने बताया कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो क्षेत्र में व्यापक जन आंदोलन खड़ा होगा। यह केवल कुछ परिवारों का नहीं, बल्कि पूरे कोलियरी प्रभावित इलाके का सवाल है।

माइंस चालू होने से पहले नौकरी प्रक्रिया शुरू करने की मांग

इस बैठक में उपस्थित कई मजदूर नेताओं ने कहा कि ओपेन कास्ट माइंस के चालू होने से पहले ही नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ कर देनी चाहिए। ताकि विस्थापित परिवारों के बच्चों और युवाओं को समय पर रोजगार मिल सके। ग्रामीणों को अभी भी सुरक्षित संपर्क मार्ग, स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों से जूझना पड़ता है। ऐसे में नौकरी का आश्वासन ही उनकी सबसे बड़ी उम्मीद है।

यूनियन नेताओं ने सौंपी जिम्मेदारी

बैठक को यूनियन के अध्यक्ष हरगौरी साव, तेजलाल मंडल, जगत पासवान, राकेश महतो, भैरव वर्मा सहित कई प्रमुख नेताओं ने संबोधित किया। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह वर्ष मजदूर अधिकारों के लिए संघर्ष का वर्ष होगा। परियोजना क्षेत्र में काम करने वाले प्रत्येक मजदूर को उसका जायज हक मिले, इसके लिए संगठन गांव–गांव जाकर जनजागरण अभियान भी चलाएगा।

कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने कहा कि पारंपरिक रूप से जिस तरह समाजसेवा कार्यक्रमों में मिलन और सद्भाव से काम होता है, उसी प्रकार कोलियरी क्षेत्र के विकास में भी एकता और समानता की भावना अपनाई जानी चाहिए। यदि जरूरत पड़ी तो मजदूर अधिनियमों का सहारा लेकर कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी।

दर्जनों मजदूर नेताओं की उपस्थिति

बैठक में अनिल हेम्ब्रम, मिसिल टुडू, अमीन मुर्मू, आनंद टुडू, मोडल सोरेन, बोड़ो बेसरा, प्रजा हेम्ब्रम जैसे कई मजदूर नेता और ग्रामीण प्रतिनिधि मौजूद थे। सभी ने इस मांग को जायज बताते हुए कहा कि विभागीय अव्यवस्था का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है। इसलिए प्रबंधन को पारदर्शी और जनहितकारी कदम उठाने चाहिए।

नेताओं ने कहा कि झारखंड सरकार ने हाल के वर्षों में ग्राम सभाओं को सशक्त करने के लिए कई सकारात्मक पहल की है। इसी भावना के अनुरूप सीसीएल प्रबंधन को भी स्थानीय हितों की रक्षा करनी चाहिए।

न्यूज़ देखो: मजदूर हितों की अनदेखी नहीं चलेगी

पपरवाटांड में आयोजित यह बैठक स्पष्ट संदेश देती है कि कोलियरी क्षेत्र में विस्थापितों और मजदूरों के अधिकार अब दबाए नहीं जा सकते। ओपेन कास्ट माइंस जैसी बड़ी परियोजनाओं से विकास जरूर होगा, पर इसका पहला लाभ उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए जिनकी जमीन इस कार्य में गई है। प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन को इस चेतावनी को गंभीरता से लेकर तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकारों की रक्षा के लिए सजग भागीदारी जरूरी

ग्रामीणों और मजदूर साथियों, यह समय एकजुटता दिखाने का है।
अपने संवैधानिक और रोजगार अधिकारों को समझें और जागरूक बनें।
बैठकों और संवाद कार्यक्रमों में बढ़–चढ़कर हिस्सा लें।
विस्थापित परिवारों के हित में आवाज उठाना हम सबकी जिम्मेदारी।
समाज की उन्नति और न्याय का मार्ग एकता से ही प्रशस्त होगा।
अपनी राय कमेंट के माध्यम से जरूर व्यक्त करें।
इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें और मजदूर अधिकार अभियान को मजबूती प्रदान करें।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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