
#गढ़वा #नगरपरिषदचुनाव : झामुमो समर्थित प्रत्याशी की हार के बाद संगठनात्मक कमजोरी पर उठे सवाल
गढ़वा नगर परिषद चुनाव में झामुमो समर्थित प्रत्याशी संतोष केशरी की हार के बाद पार्टी के अंदर ही सवाल उठने लगे हैं। झारखंड आंदोलनकारी विजय ठाकुर ने संगठन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जिले से लेकर पंचायत स्तर तक नेताओं की मौजूदगी के बावजूद लगातार चुनावी हार चिंताजनक है। उन्होंने संगठन में सुधार की मांग की है।
- 27 फरवरी 2026 को हुए गढ़वा नगर परिषद चुनाव में झामुमो समर्थित प्रत्याशी संतोष केशरी को हार का सामना।
- झारखंड आंदोलनकारी विजय ठाकुर ने संगठन की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल।
- जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर पर नेताओं की मौजूदगी के बावजूद चुनावी हार पर चिंता।
- पार्टी में भीतरघात और चापलूसी की राजनीति को बताया हार का प्रमुख कारण।
- संगठन में निष्ठावान और जनाधार वाले कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की मांग।
गढ़वा नगर परिषद चुनाव में झामुमो समर्थित प्रत्याशी संतोष केशरी को मिली हार के बाद पार्टी के अंदर ही असंतोष के स्वर सुनाई देने लगे हैं। झारखंड आंदोलनकारी विजय ठाकुर ने इस हार को संगठनात्मक कमजोरी का परिणाम बताते हुए पार्टी की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिले में बड़ी संख्या में नेताओं और पदाधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद लगातार चुनाव में हार होना चिंताजनक है और इस पर गंभीरता से मंथन करने की जरूरत है।
विजय ठाकुर ने कहा कि 27 फरवरी 2026 को हुए गढ़वा नगर परिषद चुनाव में झामुमो समर्थित उम्मीदवार को करारी हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड और पंचायत स्तर तक पार्टी के नेताओं की भरमार है, तो फिर चुनाव में सफलता क्यों नहीं मिल पा रही है।
संगठन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
विजय ठाकुर ने अपने बयान में कहा कि गढ़वा और रंका विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने वाले पूर्व मंत्री को बार-बार धोखा दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के कई जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर के पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभा रहे हैं।
उनका कहना है कि संगठन में कई ऐसे पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद हैं, जो अपने ही बूथ पर पार्टी को जीत नहीं दिला पाते हैं। इसके बावजूद वे संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर बने हुए हैं। इससे पार्टी की जमीनी ताकत कमजोर होती जा रही है।
भीतरघात का भी लगाया आरोप
विजय ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ पदाधिकारी और नेता चुनाव के दौरान ही पार्टी के खिलाफ काम करते हैं। उन्होंने कहा कि नगर परिषद चुनाव में पार्टी से जुड़े कुछ लोगों ने ही विरोध में खड़े होकर भीतरघात किया, जिससे पार्टी को नुकसान हुआ।
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में कई ऐसे लोग सक्रिय हो गए हैं जो सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के लिए राजनीति कर रहे हैं। ऐसे लोग संगठन की मजबूती के बजाय सिर्फ खुद के विकास पर ध्यान देते हैं।
पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
विजय ठाकुर ने आरोप लगाया कि पार्टी में लंबे समय से काम कर रहे पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। उनकी जगह दूसरे दलों से आए लोगों पर अधिक भरोसा किया जा रहा है।
उनका कहना है कि यही कारण है कि पार्टी का संगठन अंदर से कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में पार्टी को और भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
विजय ठाकुर ने संगठन में पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले झारखंड आंदोलन के समय और उसके बाद भी पार्टी में जिला और प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों का चयन वोटिंग के माध्यम से किया जाता था।
लेकिन अब यह परंपरा लगभग समाप्त हो गई है और अधिकतर पदाधिकारी मनोनयन के आधार पर नियुक्त किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली संगठन को कमजोर करने का काम कर रही है।
उनका कहना है कि कई बार लोगों की वास्तविक क्षमता और जनाधार को नजरअंदाज कर केवल दिखावे और व्यक्तिगत समीकरणों के आधार पर पद दे दिए जाते हैं, जिससे संगठन की जमीनी पकड़ कमजोर हो जाती है।
संगठन में सुधार की मांग
विजय ठाकुर ने कहा कि पार्टी नेतृत्व को इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी में जिम्मेदार, निष्ठावान और जनाधार वाले कार्यकर्ताओं को ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के नए और पुराने नेताओं की संयुक्त बैठक कर संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए। इससे संगठन में पारदर्शिता और एकजुटता दोनों बढ़ेगी।
उनका मानना है कि यदि संगठनात्मक ढांचे को मजबूत किया जाए और जमीनी कार्यकर्ताओं को सम्मान दिया जाए, तो भविष्य में चुनावी परिणाम बेहतर हो सकते हैं।
न्यूज़ देखो: संगठन की मजबूती से ही चुनावी सफलता
किसी भी राजनीतिक दल की सफलता केवल बड़े नेताओं से नहीं बल्कि मजबूत संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं से तय होती है। यदि संगठन में समन्वय और पारदर्शिता बनी रहे तो चुनावी चुनौतियों का सामना करना आसान हो जाता है। गढ़वा में उठे ये सवाल पार्टी के लिए आत्ममंथन का अवसर भी हो सकते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
लोकतंत्र में मजबूत संगठन ही जीत की कुंजी
लोकतंत्र में हर कार्यकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
जब संगठन मजबूत होता है, तभी जनता का विश्वास भी मजबूत होता है।
राजनीति में पारदर्शिता, जिम्मेदारी और समर्पण सबसे बड़ी ताकत होती है।
अगर आप भी अपने क्षेत्र की राजनीति और विकास से जुड़े मुद्दों पर जागरूक हैं, तो अपनी राय जरूर रखें।
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