#गढ़वा #बजट_प्रतिक्रिया : 1,58,560 करोड़ के बजट पर छात्र, युवा और किसान हितों की अनदेखी का आरोप
झारखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत 1,58,560 करोड़ रुपये के बजट पर विभिन्न संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में अभाविप गढ़वा जिला संयोजक शुभम तिवारी ने बजट को जन-आकांक्षाओं से दूर बताते हुए शिक्षा, रोजगार, छात्रवृत्ति और किसान हितों की उपेक्षा का आरोप लगाया है, जिससे युवाओं और छात्रों में असंतोष की स्थिति बनती दिख रही है।
- 1,58,560 करोड़ रुपये के बजट को बताया दिशाहीन और विजनहीन।
- अभाविप जिला संयोजक शुभम तिवारी ने शिक्षा और रोजगार पर उठाए सवाल।
- छात्रों, युवाओं और किसानों की मूल अपेक्षाओं की अनदेखी का आरोप।
- छात्रवृत्ति, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर ठोस योजना नहीं होने की आलोचना।
- विश्वविद्यालय निर्माण की घोषणा पर नियुक्तियों की स्पष्ट नीति नहीं होने पर चिंता।
झारखंड सरकार द्वारा रजत जयंती वर्ष के नाम पर प्रस्तुत 1,58,560 करोड़ रुपये के बजट को लेकर राजनीतिक एवं छात्र संगठनों की प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के गढ़वा जिला संयोजक शुभम तिवारी ने बजट को निराशाजनक, दिशाहीन और जन-आकांक्षाओं से दूर करार देते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है।
शिक्षा और छात्रों को लेकर स्पष्ट दृष्टि का अभाव: शुभम तिवारी
शुभम तिवारी ने कहा कि राज्य के लाखों छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी, डिजिटल संसाधनों और बेहतर शैक्षणिक ढांचे के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन बजट में शिक्षा क्षेत्र को लेकर कोई ठोस और स्पष्ट दृष्टिकोण सामने नहीं आया है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में नवाचार, उच्च शिक्षा के विस्तार, छात्रवृत्ति और रोजगारोन्मुख शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपेक्षित प्रावधानों की स्पष्ट झलक नहीं दिखती।
उनका कहना है कि सरकार विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के निर्माण की बात तो कर रही है, लेकिन शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर बजट में कोई ठोस चर्चा नहीं की गई है।
“जब नियुक्ति की स्पष्ट योजना ही नहीं है तो विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य कैसे संचालित होगा,” शुभम तिवारी ने सवाल उठाया।
रोजगार और युवाओं के भविष्य को लेकर उठाए गंभीर प्रश्न
अभाविप जिला संयोजक ने बजट में रोजगार सृजन को लेकर ठोस पहल की कमी पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि युवाओं को इस बजट से बड़े स्तर पर रोजगार, कौशल विकास और स्टार्टअप प्रोत्साहन की उम्मीद थी, लेकिन परिणाममुखी और दीर्घकालिक रोडमैप स्पष्ट रूप से नजर नहीं आता।
उन्होंने यह भी कहा कि 10 लाख नौकरियों के वादे करने वाली सरकार ने अनुबंधकर्मियों के भविष्य और युवाओं के सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई है।
तिवारी के अनुसार, यदि राज्य में बेरोजगारी एक प्रमुख समस्या बनी हुई है तो बजट में युवाओं के लिए स्पष्ट और ठोस नीति का होना अत्यंत आवश्यक था।
छात्रवृत्ति और कौशल विकास पर ठोस पहल का अभाव
शुभम तिवारी ने छात्र समुदाय से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि छात्रवृत्ति विस्तार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, कौशल विकास और डिजिटल शिक्षा जैसे विषयों पर विशेष प्रावधान की अपेक्षा थी, जो बजट भाषण में स्पष्ट रूप से सामने नहीं आए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र आज भी संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं और उन्हें बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं, डिजिटल माध्यमों और करियर मार्गदर्शन की सख्त जरूरत है।
किसानों और आम जनता की जरूरतों से दूर बताया बजट
उन्होंने बजट को अन्नदाता किसानों की अपेक्षाओं से भी दूर बताया। शुभम तिवारी ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए कोई ठोस और लक्षित राहत या दीर्घकालिक योजना स्पष्ट रूप से नजर नहीं आती।
उनके अनुसार, किसान, युवा, छात्र और आम नागरिक राज्य की विकास प्रक्रिया के केंद्र में होने चाहिए, लेकिन बजट का स्वरूप इन वर्गों की वास्तविक जरूरतों से दूर प्रतीत होता है।
घोषणात्मक अधिक, समाधानात्मक कम: अभाविप
तिवारी ने कहा कि बजट का स्वरूप घोषणात्मक अधिक और समाधानात्मक कम दिखाई देता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यदि सरकार के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं, तो शिक्षा, रोजगार, छात्र कल्याण और कौशल विकास जैसे मूलभूत क्षेत्रों में ठोस निवेश की स्पष्ट रूपरेखा सामने आनी चाहिए थी।
उनका मानना है कि केवल बड़े बजट आकार की घोषणा पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उसके माध्यम से जमीनी स्तर पर प्रभावी योजनाओं का क्रियान्वयन ही वास्तविक विकास को सुनिश्चित करता है।
न्यूज़ देखो: बजट पर बढ़ती राजनीतिक और छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया
झारखंड बजट 2026 को लेकर विभिन्न संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आना शुरू हो गई हैं, जो लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा है। शिक्षा, रोजगार और किसान हित जैसे मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक नागरिक ही तय करते हैं विकास की दिशा
बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों का प्रतिबिंब होता है।
छात्र, युवा और किसान राज्य की प्रगति की रीढ़ हैं।
जरूरत है नीतियों पर सजग चर्चा और सकारात्मक भागीदारी की।
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