
#झारखंड #मंत्रिमंडल_फेरबदल : खरमास के बाद हेमंत सोरेन सरकार में संभावित विस्तार और विभागीय बदलाव की चर्चा तेज।
झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी में नजर आ रही है। खरमास के बाद संभावित इस बदलाव में स्वास्थ्य और कृषि विभाग सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, जहां मंत्रियों के प्रदर्शन को लेकर असंतोष बताया जा रहा है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि सरकार 2026 की शुरुआत में अपने मंत्रिमंडल को नए सिरे से मजबूत संदेश देने की रणनीति पर काम कर रही है।
- स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के विभागीय कामकाज पर असंतोष की चर्चा।
- कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की की जगह नए चेहरे की संभावना।
- कांग्रेस के भीतर महिला और अल्पसंख्यक नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति।
- झामुमो और राजद कोटे में भी बदलाव की अटकलें।
- 2026 की शुरुआत में नए कैबिनेट स्वरूप के संकेत।
हेमंत सोरेन पार्ट-2 सरकार अब पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। तमाम कथित आर्थिक संकट और विपक्ष के हमलों के बावजूद राज्य सरकार विकास योजनाओं को तेज गति देने का दावा कर रही है। इसी क्रम में सरकार अब अपने मंत्रिमंडल के उन विभागों की समीक्षा कर रही है, जिनके प्रदर्शन को लेकर जनता और संगठन के भीतर नाराजगी की बातें सामने आ रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग बना सबसे बड़ा सवाल
राजनीतिक जानकारों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग सरकार के लिए सबसे कमजोर कड़ी बनता जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक अव्यवस्थाओं की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। दवाओं की कमी, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और मरीजों की अनदेखी जैसे मुद्दे विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
इसी वजह से स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का नाम फेरबदल की सूची में सबसे ऊपर बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, उनकी बयानबाजी से कांग्रेस संगठन के भीतर भी असहजता बढ़ी है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी विभागीय प्रगति से संतुष्ट नहीं हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार: “स्वास्थ्य विभाग सरकार की छवि से सीधे जुड़ा है और यहां सुधार नहीं हुआ तो इसका सीधा असर जनविश्वास पर पड़ेगा।”
निशित आलम को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
स्वास्थ्य मंत्री के संभावित विकल्प के रूप में कांग्रेस के भीतर पाकुड़ विधानसभा सीट से निर्वाचित अल्पसंख्यक महिला विधायक निशित आलम का नाम तेजी से उभर रहा है। वे पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की पत्नी हैं और संगठन में एक संतुलित चेहरे के रूप में देखी जाती हैं।
कांग्रेस नेतृत्व यदि उन्हें मंत्री बनाता है तो इससे अल्पसंख्यक वर्ग और महिलाओं के बीच पार्टी की पकड़ को मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।
कृषि विभाग में भी बदलाव की अटकलें
स्वास्थ्य के साथ-साथ कृषि विभाग को लेकर भी सरकार के भीतर असंतोष की चर्चा है। मौजूदा कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के स्थान पर नए चेहरे को मौका दिए जाने की संभावना बताई जा रही है।
कांग्रेस खेमे में जिन नामों की चर्चा है, उनमें प्रमुख रूप से:
- रामचंद्र सिंह
- सोनाराम सिंकु
- नमन विक्सल कोगाड़ी
- राजेश कच्छप
इनमें से किसी एक को कृषि मंत्री बनाया जा सकता है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि कृषि जैसे अहम विभाग में संगठनात्मक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया जाएगा।
झामुमो और राजद कोटे में भी संभावित फेरबदल
मंत्रिमंडल विस्तार केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं रहने वाला है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कोटे में भी बदलाव की अटकलें तेज हैं।
झामुमो में पूर्व शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद घाटशिला सीट से निर्वाचित उनके पुत्र सोमेश सोरेन को मंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। इससे पार्टी को सहानुभूति और संगठनात्मक मजबूती दोनों मिल सकती हैं।
वहीं राजद कोटे से वर्तमान मंत्री संजय प्रसाद यादव की जगह राजद विधायक दल के नेता सुरेश पासवान को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है।
2026 की शुरुआत में नया कैबिनेट संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 की शुरुआत में यदि मंत्रिमंडल का नया स्वरूप सामने आता है, तो यह सरकार की जनता के बीच दोबारा भरोसा मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा होगा। कमजोर प्रदर्शन वाले विभागों में बदलाव कर सरकार यह संदेश देना चाहती है कि जवाबदेही तय होगी।
न्यूज़ देखो: सरकार की अग्निपरीक्षा
स्वास्थ्य और कृषि जैसे विभाग आम जनता से सीधे जुड़े होते हैं। यदि इन क्षेत्रों में सुधार के लिए मंत्रिमंडल फेरबदल होता है, तो यह सरकार की गंभीरता को दर्शाएगा। अब नजर इस बात पर है कि हेमंत सोरेन इन अटकलों को कब और किस रूप में हकीकत में बदलते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बदलाव की राजनीति, जनता की उम्मीदें
सरकार में बदलाव केवल चेहरे बदलने तक सीमित नहीं होना चाहिए।
असली परीक्षा नीतियों के ज़मीन पर उतरने की है।
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