झारखंड कोचिंग एक्ट पर विवाद छोटे कोचिंग संचालकों ने बताया अस्तित्व के लिए खतरा

झारखंड कोचिंग एक्ट पर विवाद छोटे कोचिंग संचालकों ने बताया अस्तित्व के लिए खतरा

author Surendra Verma
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#गिरिडीह #कोचिंग_एक्ट : प्रस्तावित कानून के विरोध में कोचिंग संचालकों ने संशोधन की मांग उठाई।

झारखंड में प्रस्तावित कोचिंग एक्ट को लेकर गिरिडीह सहित विभिन्न जिलों में कोचिंग संचालकों का विरोध तेज हो गया है। प्राइवेट कोचिंग संचालकों का कहना है कि यह कानून छोटे संस्थानों के लिए घातक साबित होगा। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां रखी हैं। अब इस मुद्दे पर राज्यभर में बैठकें और चर्चा की तैयारी हो रही है।

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  • झारखंड कोचिंग एक्ट 2025 पर कोचिंग संचालकों का विरोध।
  • राजेश सिन्हा ने छोटे कोचिंग पर संकट बताया।
  • सुदिव्य कुमार सोनू से मुलाकात कर रखी आपत्तियां।
  • 5 लाख तक बैंक गारंटी पर उठे सवाल।
  • राज्यभर में बैठक और आंदोलन की तैयारी।
  • छोटे कोचिंग बंद होने की जताई आशंका।

झारखंड में प्रस्तावित कोचिंग एक्ट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गिरिडीह और आसपास के जिलों में प्राइवेट कोचिंग संचालकों ने इस कानून के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि यह एक्ट छोटे कोचिंग संस्थानों के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है।

मंत्री से मुलाकात, संशोधन की मांग

प्राइवेट कोचिंग सेंटर के संरक्षक राजेश सिन्हा के नेतृत्व में गिरिडीह और धनबाद के कोचिंग संचालकों ने मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान मनोज सिंह, आलोक मिश्रा, सूरज नयन, सी के मिश्रा, विकास तिवारी, निशांत भास्कर सहित कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।

राजेश सिन्हा ने कहा: “झारखंड में लाया गया यह कोचिंग एक्ट 95% छोटे कोचिंग सेंटरों के खिलाफ है, पूरे भारत में ऐसा कानून कहीं नहीं है।”

उन्होंने बताया कि मंत्री ने पहले अंतिम रूप देने से पहले चर्चा का आश्वासन दिया था, लेकिन अचानक एक्ट जिला प्रशासन के पास पहुंच गया, जिससे संचालकों में असंतोष है।

छोटे कोचिंग सेंटरों के सामने संकट

कोचिंग संचालकों का कहना है कि प्रस्तावित कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं, जो छोटे संस्थानों के लिए लागू करना कठिन है। उनका दावा है कि यदि इसमें संशोधन नहीं हुआ, तो लगभग 90% छोटे कोचिंग सेंटर बंद हो सकते हैं।

संचालकों ने यह भी आशंका जताई कि बड़े कोचिंग संस्थानों को फायदा पहुंचाने के लिए छोटे संस्थानों को बाहर करने की कोशिश हो सकती है।

एक्ट की प्रमुख आपत्तियां और खामियां

भारी बैंक गारंटी और जुर्माना

प्रस्तावित एक्ट के तहत नगर निगम क्षेत्र में 5 लाख रुपये, नगर परिषद में 1 लाख रुपये और अन्य क्षेत्रों में 50 हजार रुपये की बैंक गारंटी देनी होगी।

संचालकों का कहना है कि यह राशि छोटे कोचिंग संस्थानों के लिए बहुत ज्यादा है।

50 छात्रों की सीमा पर सवाल

यह कानून केवल 50 से अधिक छात्रों वाले कोचिंग सेंटरों पर लागू होगा। इससे छोटे संस्थान बाहर रह जाएंगे, जिससे दोहरा मापदंड बन सकता है।

काउंसलर नियुक्ति का नियम

हर 1000 छात्रों पर एक काउंसलर रखना अनिवार्य होगा।

संचालकों के अनुसार छोटे शहरों में योग्य काउंसलर मिलना मुश्किल है और यह नियम व्यवहारिक नहीं है।

समय सीमा की बाध्यता

कोचिंग सेंटर केवल सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक ही संचालित किए जा सकेंगे।

इससे कामकाजी और कॉलेज के छात्रों को परेशानी हो सकती है।

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया जटिल

हर कैंपस का अलग रजिस्ट्रेशन और छात्रों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में लागू करना चुनौतीपूर्ण बताया गया है।

स्थान और संसाधन का दबाव

हर छात्र को 1 वर्ग मीटर स्थान देना अनिवार्य होगा, जिससे किराए और फीस में बढ़ोतरी हो सकती है।

राज्यभर में आंदोलन की तैयारी

कोचिंग संचालकों ने निर्णय लिया है कि इस मुद्दे पर गिरिडीह समेत पूरे झारखंड में बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसके बाद एक बार फिर मंत्री से मुलाकात कर संशोधन की मांग रखी जाएगी।

निगरानी और भ्रष्टाचार को लेकर चिंता

एक्ट के तहत जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाई जाएगी, लेकिन संचालकों को आशंका है कि इससे जमीनी स्तर पर सुधार कम और कागजी कार्रवाई ज्यादा होगी।

बढ़ती चिंता और असंतोष

कोचिंग संचालकों और शिक्षकों में इस एक्ट को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार जरूरी है, लेकिन नियम ऐसे होने चाहिए जो सभी के लिए व्यावहारिक और न्यायसंगत हों।

न्यूज़ देखो: सुधार या दबाव कानून को लेकर उठ रहे बड़े सवाल

झारखंड कोचिंग एक्ट का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना हो सकता है, लेकिन यदि नियम जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते, तो इसका असर उल्टा पड़ सकता है। छोटे कोचिंग सेंटरों की चिंता और विरोध यह संकेत देता है कि इस कानून पर व्यापक चर्चा और संशोधन की जरूरत है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शिक्षा व्यवस्था में संतुलन बनाना जरूरी

शिक्षा हर वर्ग के लिए सुलभ होनी चाहिए और इसके लिए नीतियां संतुलित होना जरूरी है। छोटे और बड़े संस्थानों के बीच समान अवसर सुनिश्चित करना समय की मांग है।

यदि आप इस मुद्दे से जुड़े हैं या आपकी राय महत्वपूर्ण है, तो अपनी आवाज जरूर उठाएं।

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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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