
#कोलेबिरा #राष्ट्रीयस्कूलीफुटबॉल : इंफाल में मणिपुर को हराकर झारखंड अंडर-19 टीम की ऐतिहासिक हैट्रिक।
69वीं राष्ट्रीय स्कूली फुटबॉल प्रतियोगिता में झारखंड की अंडर-19 बालिका टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। मणिपुर की राजधानी इंफाल में आयोजित फाइनल मुकाबले में झारखंड ने मेजबान मणिपुर को 1–0 से पराजित किया। इस जीत के साथ झारखंड की बेटियों ने लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि में सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड की छात्रा मंजू आईंद की भागीदारी क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बनी।
- 69वीं राष्ट्रीय स्कूली फुटबॉल प्रतियोगिता में झारखंड अंडर-19 बालिका टीम चैंपियन।
- इंफाल के खुमान लंपक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुआ फाइनल मुकाबला।
- फाइनल में मणिपुर को 1–0 से हराया, काजल कुमारी ने किया निर्णायक गोल।
- कोलेबिरा की छात्रा मंजू आईंद रही विजेता टीम का हिस्सा।
- टीम कोच के रूप में शारीरिक शिक्षिका बिंदु कुजूर का अहम योगदान।
- झारखंड की बेटियों ने लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर हैट्रिक लगाई।
कोलेबिरा/इंफाल से झारखंड के लिए गर्व की खबर सामने आई है। 69वीं राष्ट्रीय स्कूली फुटबॉल प्रतियोगिता में झारखंड की अंडर-19 बालिका टीम ने अपने उत्कृष्ट खेल से देशभर में राज्य का नाम रोशन किया। मणिपुर की राजधानी इंफाल स्थित खुमान लंपक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का समापन बुधवार को हुआ, जहां झारखंड की टीम ने मेजबान मणिपुर को रोमांचक मुकाबले में 1–0 से पराजित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
फाइनल मुकाबले में दिखा दमखम
प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला बेहद कड़ा और रोमांचक रहा। दोनों टीमों के बीच पूरे समय संघर्षपूर्ण खेल देखने को मिला। निर्णायक क्षण में झारखंड की खिलाड़ी काजल कुमारी ने शानदार गोल दागकर टीम को बढ़त दिलाई। यही गोल अंत तक निर्णायक साबित हुआ और झारखंड की बेटियों ने जीत दर्ज कर ली। मैच के दौरान खिलाड़ियों का आत्मविश्वास, अनुशासन और टीमवर्क स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
कोलेबिरा की बेटी बनी गर्व की पहचान
इस ऐतिहासिक जीत में सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड के लिए भी यह विशेष गर्व का क्षण रहा। एस.एस.+2 उच्च विद्यालय, कोलेबिरा की छात्रा मंजू आईंद झारखंड की विजेता टीम का हिस्सा रहीं। राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर उन्होंने न केवल अपने माता-पिता और विद्यालय, बल्कि पूरे कोलेबिरा क्षेत्र का मान बढ़ाया।
मंजू आईंद की इस उपलब्धि से क्षेत्र के युवाओं और खासकर बेटियों में खेल के प्रति नई ऊर्जा और प्रेरणा देखने को मिल रही है। यह सफलता बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां भी उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकती हैं।
प्रशिक्षण और तैयारी का असर
प्रतियोगिता से पूर्व झारखंड की टीम ने रांची स्थित खेलगांव में 21 दिनों का विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाया था। इस प्रशिक्षण के दौरान खिलाड़ियों की फिटनेस, तकनीक और रणनीति पर विशेष ध्यान दिया गया। इसी तैयारी का परिणाम फाइनल मुकाबले में टीम के सधे हुए खेल के रूप में सामने आया।
कोच बिंदु कुजूर का नेतृत्व रहा अहम
टीम के साथ कोच के रूप में विद्यालय की शारीरिक शिक्षिका बिंदु कुजूर का मार्गदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा। उनके नेतृत्व में खिलाड़ियों ने अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। बिंदु कुजूर के मार्गदर्शन में एस.एस.+2 उच्च विद्यालय, कोलेबिरा के कई छात्र-छात्राएं पहले भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि विद्यालय के एक अन्य विद्यार्थी किशन कुमार ने दिसंबर 2023 में अंडमान में आयोजित राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में भाग लिया था, जो विद्यालय की खेल परंपरा को दर्शाता है।
लगातार तीसरी जीत पर कोच की प्रतिक्रिया
जीत के बाद कोच बिंदु कुजूर ने कहा:
“झारखंड की बेटियों ने इस वर्ष राष्ट्रीय स्कूली फुटबॉल प्रतियोगिता में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर हैट्रिक लगाई है। यह पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात है। कोलेबिरा प्रखंड की बेटी का इस टीम में होना हमारे क्षेत्र के लिए विशेष खुशी का विषय है। मुझे अपनी बेटियों पर गर्व है और उम्मीद है कि वे आगे भी बेहतर प्रदर्शन करेंगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि मंजू आईंद जैसी खिलाड़ी अन्य छात्राओं के लिए प्रेरणा बनेंगी और भविष्य में और अधिक बेटियां खेल के क्षेत्र में आगे आएंगी।
क्षेत्र में खुशी और उत्साह
झारखंड की इस ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे राज्य के साथ-साथ कोलेबिरा क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोग, विद्यालय परिवार और खेल प्रेमी इस उपलब्धि पर खिलाड़ियों और कोच को बधाइयां दे रहे हैं। यह जीत झारखंड में महिला फुटबॉल के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करती है।
न्यूज़ देखो: खेलों में बेटियों की बढ़ती ताकत
झारखंड की बेटियों की यह जीत साबित करती है कि निरंतर मेहनत, सही प्रशिक्षण और मजबूत नेतृत्व से इतिहास रचा जा सकता है। लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना राज्य की खेल नीति और जमीनी स्तर पर हो रहे प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। कोलेबिरा जैसी जगहों से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचना प्रेरणादायक है। अब जरूरत है कि ऐसी प्रतिभाओं को निरंतर समर्थन और संसाधन मिलते रहें।
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बेटियों की जीत से बदली खेल की तस्वीर
यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि झारखंड की बेटियों के आत्मविश्वास और संघर्ष की कहानी है। आज जब बेटियां खेल के मैदान में इतिहास रच रही हैं, तो समाज की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।















