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झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने बाबा बासुकीनाथ धाम में की विधिवत पूजा-अर्चना, राज्य की सुख-समृद्धि की कामना

#दुमका #बासुकीनाथ_धाम : पौष शुक्ल चतुर्थी को राज्यपाल ने फौजदारी दरबार में की विशेष पूजा-अर्चना।

झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने शुक्रवार देर शाम पौष शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विश्व प्रसिद्ध बाबा बासुकीनाथ धाम पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने रुद्राभिषेक और विशेष आरती के माध्यम से बाबा का जलाभिषेक किया। पूजा के अवसर पर जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से कड़ी सुरक्षा और व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित की गई। राज्यपाल ने राज्य और देश की सुख-समृद्धि तथा जनकल्याण की कामना की।

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  • राज्यपाल संतोष गंगवार ने शुक्रवार देर शाम बाबा बासुकीनाथ धाम में पूजा-अर्चना की।
  • पौष शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को षोडशोपचार विधि से संपन्न हुई पूजा।
  • उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर किया स्वागत।
  • तीर्थ पुरोहितों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ रुद्राभिषेक और विशेष आरती कराई गई।
  • सुरक्षा कारणों से पूजा के दौरान आम श्रद्धालुओं का प्रवेश अस्थायी रूप से प्रतिबंधित रहा।

झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार शुक्रवार देर शाम दुमका जिले के विश्व प्रसिद्ध फौजदारी दरबार बाबा बासुकीनाथ धाम पहुंचे। धार्मिक आस्था और श्रद्धा के इस महत्वपूर्ण केंद्र पर उन्होंने पौष शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विधिविधान के साथ पूजा-अर्चना की। राज्यपाल के आगमन को लेकर मंदिर परिसर में विशेष तैयारियां की गई थीं और प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया।

जिला प्रशासन ने किया आत्मीय स्वागत

राज्यपाल के बाबा बासुकीनाथ धाम पहुंचते ही दुमका उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका औपचारिक और आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर जिला प्रशासन के वरीय अधिकारी, पुलिस पदाधिकारी तथा मंदिर प्रबंधन समिति के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। राज्यपाल के स्वागत के दौरान प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया गया।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई पूजा

मंदिर परिसर में तीर्थ पुरोहितों एवं विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राज्यपाल से संकल्प कराया गया। इसके पश्चात षोडशोपचार विधि से पूजा संपन्न कराई गई। इस दौरान बाबा बासुकीनाथ का विधिवत रुद्राभिषेक किया गया तथा विशेष आरती उतारी गई।

पूजा-अर्चना के दौरान राज्यपाल ने पूरे विधि-विधान के साथ बाबा बासुकीनाथ का जलाभिषेक किया और राज्य, देश की सुख-शांति, समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार और घंटा-घड़ियाल की ध्वनि से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी प्रतिबंध

राज्यपाल की सुरक्षा को देखते हुए पूजा-अर्चना के दौरान मंदिर परिसर में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर अस्थायी रूप से रोक लगाई गई थी। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

प्रशासन की ओर से यह भी सुनिश्चित किया गया कि पूजा के दौरान स्वच्छता और अनुशासन बना रहे तथा सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित हों।

स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया सम्मान

पूजा-अर्चना के उपरांत उपायुक्त अभिजीत सिन्हा द्वारा राज्यपाल संतोष गंगवार को बाबा बासुकीनाथ का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही पंडा धर्मरक्षिणी सभा की ओर से भी राज्यपाल को बाबा बासुकीनाथ की तस्वीर एवं रुद्राक्ष माला स्मृति चिन्ह के रूप में प्रदान की गई।

राज्यपाल ने मंदिर प्रबंधन, पंडा समाज एवं जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना की और धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर सकारात्मक संदेश दिया।

पूजा के बाद लोकभवन पहुंचे राज्यपाल

पूजा-अर्चना कार्यक्रम के बाद राज्यपाल संतोष गंगवार अपने परिवार के साथ सड़क मार्ग से दुमका लोकभवन के लिए रवाना हुए। उनके आगमन और प्रस्थान के दौरान प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान शांति और अनुशासन बना रहा।

बाबा बासुकीनाथ धाम का धार्मिक महत्व

बाबा बासुकीनाथ धाम झारखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है और इसे फौजदारी दरबार के नाम से भी जाना जाता है। सावन मास सहित वर्षभर यहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई पूजा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

राज्यपाल का यह दौरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा रहा, बल्कि इससे राज्य के प्रमुख तीर्थ स्थलों के महत्व को भी एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित किया गया।

न्यूज़ देखो: धार्मिक आस्था और प्रशासनिक संतुलन की मिसाल

राज्यपाल संतोष गंगवार का बाबा बासुकीनाथ धाम में पूजा-अर्चना करना राज्य की धार्मिक विरासत के प्रति सम्मान को दर्शाता है। साथ ही, प्रशासन द्वारा की गई सुव्यवस्थित सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था यह बताती है कि बड़े संवैधानिक पदों के कार्यक्रमों में संतुलन और अनुशासन कितना आवश्यक है। आने वाले समय में ऐसे आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधाओं को और बेहतर बनाने की जरूरत भी इस तरह के दौरों से सामने आती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

श्रद्धा के साथ व्यवस्था भी जरूरी

धार्मिक स्थलों पर आस्था के साथ-साथ अनुशासन और सहयोग भी उतना ही जरूरी है। प्रशासनिक प्रयासों को सहयोग देकर हम सभी इन पवित्र स्थलों की गरिमा बनाए रख सकते हैं। इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में रखें और जागरूक नागरिक बनकर सकारात्मक संवाद को आगे बढ़ाएं।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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