
#रांची #वर्टीपोर्ट : मैकलुस्कीगंज में आधुनिक इलेक्ट्रिक विमान संचालन के लिए वर्टीपोर्ट निर्माण पर विचार जारी है।
झारखंड के रांची जिला के खलारी प्रखंड में मैकलुस्कीगंज को वर्टीपोर्ट के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। यह पहल इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (ई-वीटीओएल) विमान सेवाओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। पूर्व नागर विमानन उप महानिदेशक डॉ. रमाकांत सिंह ने स्थानीय अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ इस परियोजना पर बातचीत की। प्रस्तावित वर्टीपोर्ट से क्षेत्र में पर्यटन, आपातकालीन सेवाओं और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।
- मैकलुस्कीगंज, खलारी प्रखंड, रांची में वर्टीपोर्ट निर्माण की संभावनाओं पर विचार।
- परियोजना में पूर्व नागर विमानन उप महानिदेशक डॉ. रमाकांत सिंह और विशेषज्ञों की भागीदारी।
- वर्टीपोर्ट से ई-वीटीओएल विमान और एयर टैक्सी सेवाओं का संचालन संभव होगा।
- इस परियोजना में स्थानीय तकनीकी सहयोग कैप्टन अशोक गिरि द्वारा दिया जाएगा।
- इलेक्ट्रिक विमान तकनीक के लिए आईआईटी चेन्नई के प्रोफेसर सत्यनारायण चक्रवर्ती के निर्देशन में विकास कार्य।
- परियोजना से पर्यटन, रोजगार, तेज़ आवागमन और आपातकालीन सेवाओं में सुधार की उम्मीद।
झारखंड में इलेक्ट्रिक विमान और ई-वीटीओएल तकनीक की संभावनाओं को लेकर प्रदेश सरकार और केंद्रीय विमानन विभाग गंभीरता से विचार कर रहे हैं। रांची जिला के खलारी प्रखंड स्थित मैकलुस्कीगंज क्षेत्र को वर्टीपोर्ट के लिए उपयुक्त स्थान माना जा रहा है, क्योंकि यह भौगोलिक दृष्टि से सुलभ, पर्यटन और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। पूर्व नागर विमानन उप महानिदेशक डॉ. रमाकांत सिंह ने कहा कि मैकलुस्कीगंज में वर्टीपोर्ट बनने से न केवल राज्य को आधुनिक हवाई सेवा सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय युवाओं के लिए तकनीकी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
इलेक्ट्रिक विमान और वर्टीपोर्ट की तकनीकी जानकारी
वर्टीपोर्ट, पारंपरिक हवाई अड्डों से अलग होते हैं क्योंकि इनके लिए लंबे रनवे की आवश्यकता नहीं होती। यहां से ई-वीटीओएल विमान और एयर टैक्सी हेलीकाप्टर की तरह सीधे ऊँचाई में उड़ान भर सकते हैं और उसी स्थान पर उतर सकते हैं। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हवाई परिवहन की सुविधा बढ़ा सकती है। डॉ. रमाकांत सिंह ने बताया:
“वर्टीपोर्ट की मदद से इलेक्ट्रिक विमान सेवाओं का परिचालन तेज़, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल होगा। इससे शहरी क्षेत्रों में भी हवाई परिवहन का विस्तार आसान होगा।”
इलेक्ट्रिक विमान न केवल ईंधन की बचत करते हैं बल्कि ध्वनि प्रदूषण को भी कम करते हैं। देश में इलेक्ट्रिक विमान निर्माण के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है। इस दिशा में आईआईटी चेन्नई के प्रोफेसर सत्यनारायण चक्रवर्ती के मार्गदर्शन में नई तकनीक विकसित की जा रही है। अनुमान है कि आने वाले दो से तीन वर्षों में इलेक्ट्रिक विमान का परीक्षण और सीमित व्यावसायिक परिचालन शुरू हो सकता है।
परियोजना में स्थानीय सहयोग और रणनीति
मैकलुस्कीगंज निवासी कैप्टन अशोक गिरि इस परियोजना में तकनीकी सलाह और स्थानीय स्तर पर समन्वय का महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उनके अनुभव से परियोजना को मजबूती मिलने की संभावना है। डॉ. रमाकांत सिंह ने कहा:
“कैप्टन अशोक गिरि का सहयोग स्थानीय स्तर पर परियोजना को सशक्त करेगा और राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा।”
वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार वर्टीपोर्ट के लिए आवश्यक नीतियां और बुनियादी ढांचा तैयार कर रही हैं। इससे क्षेत्र में पर्यटन, तेज़ आवागमन और आपातकालीन सेवाओं के विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी।
भविष्य में आर्थिक और सामाजिक लाभ
यदि मैकलुस्कीगंज में वर्टीपोर्ट का निर्माण होता है, तो यह क्षेत्र झारखंड के लिए नई पहचान बन सकता है। पर्यटन के क्षेत्र में इसका योगदान महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि पर्यटक आसानी से ई-वीटीओएल विमान सेवाओं के माध्यम से यहां पहुंच सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय युवाओं को रोजगार और तकनीकी प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे।
“इस पहल से स्थानीय युवाओं को तकनीकी कौशल सीखने और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।”
वर्टीपोर्ट से आपातकालीन सेवाओं, जैसे मेडिकल इमरजेंसी और प्राकृतिक आपदा में तेजी से मदद पहुँचाने में भी सुविधा होगी। यह परियोजना न केवल राज्य की हवाई परिवहन क्षमता बढ़ाएगी, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल तकनीक का उपयोग भी सुनिश्चित करेगी।
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वर्टीपोर्ट परियोजना से झारखंड में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। यह पहल राज्य को तकनीकी दृष्टि से और पर्यटन के क्षेत्र में प्रगतिशील बनाएगी। स्थानीय युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार और प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे। क्या राज्य सरकार समय पर सभी आवश्यक अनुमतियाँ और बुनियादी ढांचा तैयार कर पाएगी? इस दिशा में आगे की गतिविधियों पर नजर रखना आवश्यक होगा।
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युवाओं और स्थानीय समुदाय के लिए अवसरों का संदेश
मैकलुस्कीगंज में वर्टीपोर्ट परियोजना सिर्फ तकनीकी पहल नहीं है, बल्कि यह स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास का अवसर भी है। इस क्षेत्र के लोग अब अपनी क्षमता और तकनीकी कौशल का विकास कर देश की उन्नति में योगदान दे सकते हैं।
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