कुर्मी समाज पर बयान के बाद JLKM ने की कड़ी कार्रवाई, निशा भगत 6 साल के लिए निष्कासित

कुर्मी समाज पर बयान के बाद JLKM ने की कड़ी कार्रवाई, निशा भगत 6 साल के लिए निष्कासित

author Surendra Verma
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#गुमला #राजनीति : विवादित बयान पर पार्टी अनुशासन समिति की बड़ी कार्रवाई
  • JLKM पार्टी ने पूर्व प्रत्याशी निशा भगत को पार्टी से बाहर किया।
  • कार्रवाई का आधार: कुर्मी समुदाय पर अनुचित और असत्यापित बयान
  • 6 वर्षों तक किसी भी पद और जिम्मेदारी से दूर रहेंगी निशा भगत।
  • पार्टी ने कहा- “हम सभी समुदायों के सम्मान और समानता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध”।
  • निशा भगत ने X (ट्विटर) पर पलटवार किया, कुर्मी समुदाय को लेकर दोहराया विवादित बयान।

गुमला। झारखंड की राजनीति में शनिवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) ने अपनी पूर्व प्रत्याशी निशा भगत को पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी ने यह सख्त कदम निशा भगत द्वारा कुर्मी समुदाय के खिलाफ दिए गए विवादित बयान के बाद उठाया।

JLKM का अनुशासनात्मक आदेश

पार्टी के केन्द्रीय अध्यक्ष जयराम कुमार महतो द्वारा जारी पत्र (संख्या JLKM/CP/16/25) में कहा गया कि निशा भगत का आचरण पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों के खिलाफ है। उनके बयान से न सिर्फ पार्टी की छवि को नुकसान हुआ है, बल्कि समाज में विभाजनकारी वातावरण भी पनपा है।

पार्टी ने साफ कहा कि:

“JLKM का मूल उद्देश्य सभी समाज, लिंग, संप्रदाय, धर्म एवं जातियों का सम्मान करना है। निशा भगत के बयान से यह मूल भावना आहत हुई है। अतः उन्हें 6 वर्षों के लिए पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाता है और उनकी किसी भी भूमिका पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है।”

सोशल मीडिया पर निशा भगत का पलटवार

निष्कासन के कुछ घंटों बाद ही निशा भगत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा:

“ईसाई समुदाय के बारे में बोली तो @JLKMJHARKHAND को मिर्ची नहीं लगी… कुर्मी समुदाय के लिए बोली तो बवाल कर रहे हैं। कुर्मी समुदाय किसी कीमत पर आदिवासी हितैषी नहीं हो सकते। पार्टी पहले छोड़ती तो कुर्मियों की मानसिकता का पता नहीं चलता।”

उनके इस बयान ने विवाद को और गहरा दिया है। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं ने इसे समाज को बांटने वाला वक्तव्य करार दिया है।

राजनीति और समाज पर असर

निशा भगत के बयान और JLKM की कार्रवाई ने गुमला और आसपास के जिलों में राजनीति को गरमा दिया है। जानकार मानते हैं कि यह विवाद आने वाले पंचायत और विधानसभा चुनावों में आदिवासी-कुर्मी रिश्तों और मतदाताओं की ध्रुवीकरण पर सीधा असर डाल सकता है।

न्यूज़ देखो: राजनीति में जिम्मेदारी जरूरी

नेताओं के शब्द समाज को जोड़ भी सकते हैं और तोड़ भी सकते हैं। JLKM ने त्वरित अनुशासनात्मक कदम उठाकर संदेश दिया है कि पार्टी किसी भी तरह की विभाजनकारी बयानबाजी को बर्दाश्त नहीं करेगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

समाज को जोड़ने वाली राजनीति की जरूरत

अब समय है कि हम सब ऐसी राजनीति को प्रोत्साहित करें जो समानता, सम्मान और सहअस्तित्व की बात करे। बयानबाजी से समाज का माहौल बिगड़ता है और आपसी विश्वास पर असर पड़ता है। आप क्या सोचते हैं, क्या इस तरह के विवाद पर कठोर दंड ही सही रास्ता है? अपनी राय कॉमेंट करें और खबर को शेयर करें।

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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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