
#चंदवा #झामुमो_कार्यक्रम : दिशोम गुरु स्व शिबू सोरेन की 82वीं जयंती पर श्रद्धा, सम्मान और संकल्प के साथ आयोजित हुआ स्मृति कार्यक्रम
- आई.बी. परिसर चंदवा में आयोजित हुआ श्रद्धांजलि एवं स्मृति कार्यक्रम।
- दिशोम गुरु स्व शिबू सोरेन के चित्र पर माल्यार्पण कर दी गई श्रद्धांजलि।
- आदिवासी–मूलवासी अधिकारों और झारखण्ड राज्य निर्माण में योगदान को किया गया याद।
- बड़ी संख्या में झामुमो पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता रहे मौजूद।
- संगठन को मजबूत करने और दिशोम गुरु के विचारों पर चलने का संकल्प।
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक, झारखण्ड राज्य के शिल्पकार और आदिवासी–मूलवासी समाज की बुलंद आवाज रहे दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की 82वीं जन्म जयंती एवं उनके स्वर्गवास के बाद प्रथम जन्म जयंती के अवसर पर रविवार, 11 जनवरी 2026 को चंदवा प्रखंड में श्रद्धा, सम्मान और संकल्प के साथ भव्य स्मृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम चंदवा स्थित आई.बी. परिसर में शांतिपूर्ण, अनुशासित एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं समर्थक बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरे आयोजन स्थल पर दिशोम गुरु के संघर्ष, विचार और आदर्शों की झलक साफ दिखाई दी।
पुष्पांजलि और मौन के साथ हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत दिशोम गुरु स्व शिबू सोरेन के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान पूरे परिसर में शांति और सम्मान का वातावरण बना रहा।
वक्ताओं ने कहा कि यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस विचारधारा को याद करने का अवसर है, जिसने झारखण्ड के शोषित, वंचित और उपेक्षित समाज को अपनी पहचान दिलाई।
संघर्षमय जीवन और झारखण्ड निर्माण की भूमिका पर चर्चा
स्मृति सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने दिशोम गुरु के संघर्षमय जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्व शिबू सोरेन केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे एक आंदोलन, एक विचार और एक संकल्प थे। उन्होंने आदिवासी–मूलवासी समाज के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
वक्ताओं ने कहा कि झारखण्ड राज्य का निर्माण दिशोम गुरु के निरंतर संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। उनके नेतृत्व में आदिवासी समाज को न केवल राजनीतिक पहचान मिली, बल्कि आत्मसम्मान और स्वाभिमान की भावना भी मजबूत हुई।
आज भी प्रासंगिक हैं दिशोम गुरु के विचार
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि दिशोम गुरु के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने अपने समय में थे। सामाजिक न्याय, समानता, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और संगठन की मजबूती उनके संघर्ष का मूल आधार रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को दिशोम गुरु के विचारों को आत्मसात कर उनके बताए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है, ताकि झारखण्ड की मूल आत्मा और पहचान को सुरक्षित रखा जा सके।
झामुमो नेताओं और कार्यकर्ताओं की सशक्त उपस्थिति
इस कार्यक्रम में चंदवा प्रखंड अध्यक्ष मनोज चौधरी, केंद्रीय समिति सदस्य जुनैद अनवर एवं मोहन गंझु, जिला उपाध्यक्ष शितमोहन मुंडा, युवा मोर्चा जिला उपाध्यक्ष अंकित कुमार तिवारी, अल्पसंख्यक मोर्चा उपाध्यक्ष नौशाद आलम, छात्रसंघ जिला अध्यक्ष राजेंद्र भगत, प्रखंड सचिव रॉबिन उरांव सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सभी नेताओं ने अपने संबोधन में दिशोम गुरु के संघर्षों को याद करते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने की बात कही।
संगठन को मजबूत करने का सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे दिशोम गुरु के सपनों को साकार करने के लिए निरंतर संघर्ष करेंगे। संगठन को पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर तक मजबूत करने तथा आम जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया गया।
साथ ही सामाजिक न्याय, आदिवासी–मूलवासी अधिकारों और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
न्यूज़ देखो: विचारधारा की विरासत
दिशोम गुरु स्व शिबू सोरेन की स्मृति में आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाने का संकल्प भी है। झारखण्ड की राजनीति और समाज में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संघर्ष, सम्मान और संकल्प का संदेश
चंदवा में हुआ यह आयोजन दिशोम गुरु के प्रति गहरी श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक बना। क्या आप भी मानते हैं कि उनके विचार आज की राजनीति में मार्गदर्शक हैं? अपनी राय साझा करें और ऐसी खबरों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएं।





