
#खलारी #श्रमिक_मुद्दे : जेएमएस और चूरी परियोजना प्रबंधन के बीच लंबित मांगों पर विस्तृत चर्चा हुई।
खलारी स्थित चूरी परियोजना में शुक्रवार को जनता मजदूर संघ और परियोजना प्रबंधन के बीच 13 सूत्री मांगों को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में मजदूरों के प्रमोशन, आवास मरम्मत, पेयजल, ट्रांसफर, स्ट्रीट लाइट और एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा हुई। यूनियन ने लंबित समस्याओं से हो रही परेशानियों को उठाया, जिस पर प्रबंधन ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
- जनता मजदूर संघ (जेएमएस) और चूरी परियोजना प्रबंधन के बीच शुक्रवार को अहम बैठक आयोजित।
- कामगारों के प्रमोशन, आवास मरम्मत, पेयजल आपूर्ति सहित 13 सूत्री मांगों पर चर्चा।
- कॉलोनी में स्ट्रीट लाइट, एंबुलेंस सुविधा और नियमित साफ-सफाई जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
- यूनियन ने लंबित मांगों से मजदूरों की बढ़ती कठिनाइयों का मुद्दा उठाया।
- प्रबंधन ने कई मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए शीघ्र समाधान का भरोसा दिया।
खलारी क्षेत्र के चूरी परियोजना में मजदूरों की समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जनता मजदूर संघ (जेएमएस) और चूरी परियोजना प्रबंधन आमने-सामने बैठे और लंबे समय से लंबित 13 सूत्री मांगों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य कामगारों की समस्याओं का समाधान निकालना और कार्यस्थल व कॉलोनी में बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना था।
13 सूत्री मांगों में बुनियादी सुविधाएं रहीं केंद्र में
बैठक के दौरान यूनियन प्रतिनिधियों ने कामगारों की दैनिक जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। इनमें कर्मचारियों के प्रमोशन में हो रही देरी, आवासों की जर्जर स्थिति की मरम्मत, कॉलोनी में पेयजल आपूर्ति की अनियमितता तथा नियमित साफ-सफाई की कमी जैसे मुद्दे शामिल रहे।
इसके साथ ही वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों के टेबल ट्रांसफर की मांग भी प्रमुख रूप से रखी गई। यूनियन का कहना था कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापना से कार्यप्रणाली पर प्रभाव पड़ता है और कर्मचारियों के मनोबल पर भी असर पड़ता है।
कॉलोनी की समस्याओं पर यूनियन की सख्त चिंता
यूनियन प्रतिनिधियों ने कॉलोनी क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट की अपर्याप्त व्यवस्था, पेयजल की समस्या और नियमित साफ-सफाई की निगरानी में कमी को गंभीर मुद्दा बताया। उनका कहना था कि इन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कामगारों और उनके परिवारों को रोजमर्रा की जिंदगी में कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
यूनियन ने परियोजना क्षेत्र में एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी रखी, ताकि आपातकालीन स्थिति में कामगारों को त्वरित चिकित्सा सुविधा मिल सके। यह मांग विशेष रूप से श्रमिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताई गई।
यूनियन ने लंबित मांगों से हो रही परेशानियों को किया उजागर
बैठक के दौरान यूनियन प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि लंबे समय से लंबित मांगों के कारण कामगारों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि बुनियादी सुविधाओं की कमी से न केवल कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है, बल्कि श्रमिकों के जीवन स्तर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
यूनियन के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि प्रबंधन मजदूरों की वास्तविक समस्याओं को गंभीरता से समझेगा और ठोस कदम उठाएगा, जिससे कार्यस्थल का वातावरण अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बन सके।
प्रबंधन का सकारात्मक रुख, समाधान का आश्वासन
चर्चा के दौरान चूरी परियोजना प्रबंधन ने यूनियन द्वारा उठाए गए कई मुद्दों पर सकारात्मक रुख अपनाया। प्रबंधन की ओर से आश्वासन दिया गया कि जिन मांगों पर तत्काल कार्रवाई संभव है, उन पर प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाएगा।
परियोजना प्रबंधन ने यह भी संकेत दिया कि श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जाएंगी। इससे यह उम्मीद जगी है कि लंबे समय से लंबित समस्याओं का चरणबद्ध समाधान संभव हो सकेगा।
बैठक में उपस्थित पदाधिकारी और प्रतिनिधि
इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रबंधन की ओर से परियोजना पदाधिकारी अनुज कुमार, सिविल विभाग के अभय वर्मा एवं मनोज कुमार उपस्थित रहे। वहीं यूनियन की ओर से एनके एरिया सचिव गोल्डन प्रसाद यादव, चूरी परियोजना सचिव तपेश्वर कुमार यादव, दीपक कुमार, सुनील कुमार, अजय चौहान, भुवन भुईया, दिनेश नोनिया और राजन यादव सहित अन्य प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
सभी प्रतिनिधियों ने बैठक के दौरान श्रमिकों की समस्याओं को क्रमवार रखते हुए समाधान की दिशा में संवाद को आगे बढ़ाया, जिससे बैठक सार्थक और परिणामोन्मुखी बन सकी।
मजदूर हितों के समाधान की दिशा में अहम पहल
यह बैठक श्रमिक-प्रबंधन समन्वय की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नियमित संवाद और सामूहिक चर्चा के माध्यम से ही श्रमिक समस्याओं का स्थायी समाधान संभव होता है। यूनियन और प्रबंधन के बीच हुई यह बैठक इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखी जा रही है।
यूनियन ने विश्वास जताया कि प्रबंधन द्वारा दिए गए आश्वासनों पर शीघ्र अमल किया जाएगा, जिससे कामगारों की समस्याओं का प्रभावी और स्थायी समाधान निकल सकेगा तथा कार्यस्थल का माहौल बेहतर होगा।
न्यूज़ देखो: संवाद से समाधान की दिशा में बढ़ता कदम
जेएमएस और चूरी परियोजना प्रबंधन के बीच हुई यह बैठक दर्शाती है कि श्रमिक समस्याओं के समाधान के लिए संवाद ही सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि प्रबंधन आश्वासनों को समयबद्ध तरीके से लागू करता है, तो इससे मजदूरों का विश्वास और कार्यक्षमता दोनों मजबूत होंगे। अब देखना यह होगा कि 13 सूत्री मांगों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और जमीनी स्तर पर सुधार कब तक दिखता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
श्रमिक अधिकारों के प्रति जागरूकता ही विकास की असली नींव
मजदूर किसी भी परियोजना की रीढ़ होते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित कार्य वातावरण से ही उत्पादन और प्रगति संभव है।
समय पर संवाद और समाधान से ही श्रमिकों का मनोबल मजबूत होता है।
संगठित आवाज ही सकारात्मक बदलाव की दिशा तय करती है।
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