#लावालौंग #पत्रकार_विरोध : जेई पर वरिष्ठ पत्रकार से कथित दुर्व्यवहार के आरोप के बाद प्रखंड क्षेत्र में पत्रकारों में आक्रोश, प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज
चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड में पदस्थापित 15वीं वित्त आयोग के जेई सिकंदर कुमार के खिलाफ पत्रकारों का विरोध तेज हो गया है। एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ कथित अभद्र व्यवहार और धमकी के आरोप के बाद पत्रकारों ने बैठक कर निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
- लावालौंग प्रखंड में पदस्थापित जेई सिकंदर कुमार के खिलाफ पत्रकारों में आक्रोश।
- रिपोर्टिंग करने पहुंचे वरिष्ठ पत्रकार से कथित गला दबाने और कैमरा छीनने का प्रयास।
- घटना के बाद स्थानीय पत्रकारों ने की बैठक, मामले की कड़ी निंदा।
- पत्रकारों ने कहा – खबर संकलन के दौरान धमकी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला।
- संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग।
- शीघ्र कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई।
चतरा। लावालौंग प्रखंड क्षेत्र में पदस्थापित 15वीं वित्त आयोग के जेई सिकंदर कुमार के खिलाफ स्थानीय पत्रकारों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बुधवार को एक कथित घटना को लेकर मामला तब तूल पकड़ गया जब रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने का आरोप सामने आया। घटना की चर्चा पूरे प्रखंड क्षेत्र में तेजी से फैलने के बाद पत्रकार समुदाय ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
संदिग्ध स्थिति की सूचना के बाद पहुंचे थे पत्रकार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार को जेई सिकंदर कुमार के किराए के आवास में एक नाबालिग के साथ संदिग्ध स्थिति में पाए जाने की चर्चा क्षेत्र में फैल गई थी। मामले की सच्चाई जानने और तथ्य जुटाने के उद्देश्य से एक वरिष्ठ पत्रकार मौके पर रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे थे।
बताया जा रहा है कि पत्रकार द्वारा स्थिति की पड़ताल किए जाने के दौरान माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।
वरिष्ठ पत्रकार से कथित अभद्र व्यवहार का आरोप
आरोप है कि इस दौरान जेई सिकंदर कुमार ने पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार किया। पत्रकारों का कहना है कि जेई द्वारा कथित रूप से गला दबाने और कैमरा छीनने का प्रयास किया गया।
स्थिति बिगड़ती देख संबंधित पत्रकार किसी तरह वहां से सुरक्षित निकलने में सफल रहे और उन्होंने घटना की जानकारी अपने अन्य पत्रकार साथियों को दी।
इस घटना की सूचना मिलते ही प्रखंड क्षेत्र के पत्रकारों में आक्रोश फैल गया और मामले को गंभीरता से लेते हुए सामूहिक बैठक बुलाई गई।
पत्रकारों ने बैठक कर जताया कड़ा विरोध
घटना के बाद लावालौंग क्षेत्र के पत्रकार गोलबंद हो गए और एक बैठक आयोजित कर पूरे मामले की कड़ी निंदा की। पत्रकारों ने एक स्वर में कहा कि खबर संकलन के दौरान किसी भी प्रकार की मारपीट, धमकी या अभद्र व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य है।
पत्रकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता पर भी सीधा आघात करती हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
पत्रकारों ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो दोषी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि भविष्य में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
पत्रकारों ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि पूरे प्रकरण की वस्तुनिष्ठ जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
आंदोलन की चेतावनी, कार्रवाई का इंतजार
पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि पत्रकारिता की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
वहीं इस पूरे मामले में अब तक प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है। स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक जांच की संभावना जताई जा रही है, जिससे पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों की भूमिका पर उठा सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा और कार्य स्वतंत्रता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि वे समाज के विभिन्न मुद्दों को सामने लाने का कार्य करते हैं।
ऐसे में यदि रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार या धमकी की घटनाएं सामने आती हैं, तो यह चिंता का विषय बन जाता है। स्थानीय बुद्धिजीवियों का भी मानना है कि प्रशासन को ऐसे मामलों में त्वरित संज्ञान लेकर निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।
न्यूज़ देखो: पत्रकार सुरक्षा और जवाबदेही दोनों जरूरी
लावालौंग की यह घटना सिर्फ एक विवाद नहीं बल्कि संस्थागत जवाबदेही और पत्रकार सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आएगी और अफवाहों पर विराम लगेगा। प्रशासनिक पारदर्शिता और कानूनी कार्रवाई से ही विश्वास बहाल हो सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सच और जिम्मेदारी के साथ लोकतंत्र को रखें मजबूत
पत्रकारिता समाज का आईना है और इसकी सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है।
अफवाहों से बचें और तथ्यों पर आधारित जानकारी पर ही भरोसा करें।
निष्पक्ष जांच और कानून का सम्मान लोकतंत्र की असली ताकत है।
शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है।
इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है?
कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दें और खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।