पत्रकार की सतर्कता से बची अनाथ बच्चों की सेहत, महुआडांड़ के आश्रम में वायरल बीमारी पर प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

पत्रकार की सतर्कता से बची अनाथ बच्चों की सेहत, महुआडांड़ के आश्रम में वायरल बीमारी पर प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

author News देखो Team
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#महुआडांड़ #स्वास्थ्य_सुरक्षा : पत्रकार की सूचना पर प्रशासन ने भेजी मेडिकल टीम, अनाथ बच्चों को मिला इलाज।

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड स्थित रामपुर गांव के आरपीएस अनाथ आश्रम में अनाथ बच्चों के बीच वायरल बीमारी फैलने की सूचना के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। स्थानीय पत्रकार द्वारा मामले की गंभीर जानकारी अनुमंडल पदाधिकारी को दिए जाने के एक घंटे के भीतर मेडिकल टीम को आश्रम भेजा गया। टीम ने मौके पर पहुंचकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच की और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराईं। यह कार्रवाई बच्चों के स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुई।

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  • रामपुर गांव के आरपीएस अनाथ आश्रम में वायरल बीमारी का मामला।
  • अनाथ बच्चों की तबीयत लगातार बिगड़ने की सूचना।
  • पत्रकार सूरज कुमार ने एसडीएम को दी जानकारी।
  • एसडीएम बिपिन कुमार दुबे के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई।
  • एक घंटे के भीतर मेडिकल टीम आश्रम पहुंची।
  • बच्चों को दवाएं और चिकित्सकीय सलाह दी गई।

महुआडांड़ प्रखंड के रामपुर गांव स्थित आरपीएस अनाथ आश्रम में रह रहे अनाथ बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सामने आई यह खबर प्रशासनिक संवेदनशीलता और पत्रकारिता की सामाजिक जिम्मेदारी का स्पष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है। वायरल बीमारी के फैलने से बच्चों की हालत धीरे-धीरे बिगड़ रही थी, जिससे आश्रम प्रबंधन और ग्रामीणों में चिंता बढ़ती जा रही थी।

वायरल बीमारी से बिगड़ रही थी बच्चों की स्थिति

जानकारी के अनुसार, आरपीएस अनाथ आश्रम में रह रहे कई बच्चों में बुखार, कमजोरी और अन्य वायरल लक्षण दिखाई देने लगे थे। समय पर स्वास्थ्य जांच और इलाज नहीं होने से स्थिति गंभीर होती जा रही थी। आश्रम में सीमित संसाधनों के कारण कर्मचारियों के लिए बच्चों को तुरंत बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पा रहा था।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की हालत देखकर वे काफी चिंतित थे और किसी बड़े संकट की आशंका जताई जा रही थी।

पत्रकार की सूचना से हरकत में आया प्रशासन

मामले की गंभीरता को समझते हुए झारखंड उजाला एवं झार टाइम्स के जिला ब्यूरो सूरज कुमार ने सूचना मिलने के महज एक घंटे के भीतर पूरे घटनाक्रम से अनुमंडल पदाधिकारी बिपिन कुमार दुबे को अवगत कराया। पत्रकार द्वारा दी गई सटीक और समय पर सूचना के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की।

एक घंटे में पहुंची मेडिकल टीम

एसडीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की एक टीम को तुरंत आरपीएस अनाथ आश्रम, रामपुर भेजा गया। मेडिकल टीम में संजीव गुप्ता, चौबे सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मी शामिल थे। टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी बच्चों की स्वास्थ्य जांच की और वायरल बीमारी से पीड़ित बच्चों को आवश्यक दवाएं दीं।

इसके साथ ही बच्चों की देखभाल को लेकर आश्रम कर्मचारियों को जरूरी चिकित्सकीय सलाह भी दी गई, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

मेडिकल टीम के एक सदस्य ने कहा: “समय पर जांच और दवाओं से बच्चों की स्थिति में सुधार की उम्मीद है।”

आश्रम और ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

मेडिकल टीम के पहुंचने के बाद आश्रम में रह रहे बच्चों, कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। उत्थान समिति एवं आरपीएस अनाथ आश्रम के कर्मचारियों ने प्रशासन की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई के लिए आभार व्यक्त किया।

समिति के सदस्यों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अनाथ बच्चों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नियमित स्वास्थ्य जांच की मांग

उत्थान समिति ने प्रशासन से मांग की कि आश्रम में नियमित स्वास्थ्य जांच, समय-समय पर मेडिकल कैंप और स्थायी चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। समिति का कहना है कि इससे भविष्य में किसी भी तरह की वायरल बीमारी या स्वास्थ्य संकट को पहले ही रोका जा सकेगा।

स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से आग्रह किया कि अनाथ बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर निरंतर निगरानी रखी जाए, ताकि वे सुरक्षित वातावरण में रह सकें।

न्यूज़ देखो: संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की मिसाल

यह मामला दर्शाता है कि सजग पत्रकारिता और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई से बड़ी स्वास्थ्य आपदा को टाला जा सकता है। अनाथ बच्चों जैसे संवेदनशील वर्ग के लिए समय पर हस्तक्षेप अत्यंत जरूरी है। अब सवाल यह है कि क्या भविष्य में नियमित स्वास्थ्य निगरानी की स्थायी व्यवस्था बनाई जाएगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बच्चों की सेहत, समाज की जिम्मेदारी

अनाथ बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य केवल प्रशासन नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है। समय पर सूचना, संवेदनशीलता और सक्रियता से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
आप भी ऐसे मुद्दों पर सजग रहें, अपनी राय कमेंट में साझा करें और इस खबर को आगे बढ़ाकर जागरूकता फैलाएं।

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