
#गढ़वा – डीजे पर बैन से ढोल-नगाड़ा व्यवसाय में लौटी रौनक:
- एसडीएम संजय कुमार ने “कॉफी विद एसडीएम” कार्यक्रम में ढोल, नगाड़ा, मांदर, बैंड, भांगड़ा वादकों से संवाद किया।
- डीजे बैन से परंपरागत वाद्य कलाकारों को राहत, व्यवसाय पुनर्जीवित होने की उम्मीद।
- वाद्य कलाकारों ने आर्थिक संकट और पलायन की समस्या पर चिंता जताई।
- लघु ऋण, सरकारी योजनाओं से जोड़ने का एसडीएम ने दिया आश्वासन।
- ढोल-नगाड़ा की महत्ता बढ़ाने और संरक्षण के लिए प्रशासन उठाएगा कदम।
गढ़वा में अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने बुधवार को अपने साप्ताहिक कार्यक्रम “कॉफी विद एसडीएम” के तहत अनुमंडल क्षेत्र के ढोल, नगाड़ा, मांदर, देशी बैंड, भांगड़ा व्यवसाय से जुड़े कलाकारों से संवाद किया। इस मुलाकात में वाद्य कलाकारों ने अपनी समस्याएं रखते हुए बताया कि डीजे के बढ़ते प्रभाव ने उनकी रोजी-रोटी छीन ली थी, जिससे वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
हालांकि, गढ़वा प्रशासन द्वारा डीजे पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इन कलाकारों को फिर से रोजगार मिलने की उम्मीद जगी है। इस दौरान एसडीएम संजय कुमार ने आश्वासन दिया कि प्रशासन लघु ऋण उपलब्ध कराने के साथ इन कलाकारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ेगा, ताकि वे अपना व्यवसाय आगे बढ़ा सकें।
ढोल बैंड वादकों की व्यथा
वाल्मीकि कुमार (भांगड़ा संचालक, सदर प्रखंड) ने कहा कि उनके भांगड़ा ग्रुप में 20 लोग कार्यरत थे, लेकिन डीजे के बढ़ते प्रचलन से उनका रोजगार छिन गया। उन्होंने प्रशासन से सामूहिक बीमा योजना का लाभ देने की मांग की।
नंदलाल (बिनाका बैंड संचालक, गढ़वा) ने बताया कि लघु ऋण की सहायता से वे अपने व्यवसाय को फिर से स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि डीजे का शोर न केवल बच्चों और बुजुर्गों के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे परंपरागत वाद्य कलाकारों का रोजगार भी समाप्त हो रहा है।
पलायन की मजबूरी
मनोज रवि (गढौता, डंडा प्रखंड) ने बताया कि परंपरागत वाद्य व्यवसाय में काम घटने के कारण वे रोजी-रोटी के लिए अन्य राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। वहीं, महेंद्र राम (गढ़वा) ने कहा कि डीजे कल्चर के चलते उन्होंने अपने दो बेटों को बाहर काम करने भेज दिया क्योंकि अब यह व्यवसाय पर्याप्त कमाई नहीं दे रहा।
डीजे बैन से जगी उम्मीद
सुनील कुमार (खजूरी लगमा) ने कहा कि उन्होंने 2 महीने पहले ही ढोल-नगाड़ा व्यवसाय को फिर से शुरू किया है। डीजे प्रतिबंध की खबर सुनकर उन्होंने आसपास के 20 लोगों को जोड़कर काम की शुरुआत की है।
अखिलेश (बाना, मेराल) ने बताया कि वे गुजरात में काम करने चले गए थे, लेकिन डीजे बैन की खबर सुनकर वापस लौट आए और अब ढोल-भांगड़ा व्यवसाय को नए सिरे से शुरू कर रहे हैं।
मेहनत अधिक, मजदूरी कम
अनिल राम (संगम म्यूजिकल ग्रुप, मेराल) ने कहा कि ढोल-नगाड़ा व्यवसाय मौसमी है, लेकिन डीजे संस्कृति के चलते उनकी मेहनत की सही कीमत नहीं मिल रही। लोग डीजे के लिए हजारों-लाखों रुपये खर्च कर सकते हैं, लेकिन ढोल वादकों को मामूली रकम भी मुश्किल से मिलती है।
बैंड कलाकारों से नशे से बचने की अपील
यमुना प्रसाद (सुपरस्टार पार्टी, जरही) ने अन्य कलाकारों से कार्यक्रम के दौरान नशे से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि डीजे वालों के साथ मिलकर काम करने में ध्वनि प्रदूषण की वजह से कई बार असहजता महसूस होती है।
निजी शिकायतें भी हुईं दर्ज
इस दौरान आवास योजना, राशन कार्ड, म्यूटेशन से जुड़ी शिकायतें भी रखी गईं। जरही-डंडई के बीच अधूरे पुल के निर्माण की भी मांग उठी।
सम्मान और प्रशासन की पहल
एसडीएम संजय कुमार ने सभी की शिकायतों को गंभीरता से सुना और समाधान का भरोसा दिलाया। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया।

‘न्यूज़ देखो’ – हर खबर पर रहेगी हमारी नज़र
गढ़वा में डीजे बैन से परंपरागत वाद्य कलाकारों की स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है। प्रशासन की यह पहल स्थानीय कलाकारों को फिर से रोजगार के अवसर दिलाने में सहायक होगी। इस तरह की योजनाओं और नीतियों पर हम लगातार नजर बनाए रखेंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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