गुमला के जरमना पल्ली में करमा महोत्सव: रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक नृत्यों से गूंजा पूरा गांव

गुमला के जरमना पल्ली में करमा महोत्सव: रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक नृत्यों से गूंजा पूरा गांव

author Shahjeb Ansari
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#गुमला #करमा_महोत्सव : जरमना पल्ली में ग्रामीणों ने करम देव की पूजा और पारंपरिक उत्सव के साथ मनाया करमा महोत्सव
  • करमा महोत्सव 2025 में जरमना पल्ली मैदान में बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ।
  • मुख्य अतिथि गुमला विधायक भूषण तिर्की ने कार्यक्रम में भाग लिया और ग्रामीणों के साथ करमा नृत्य में सम्मिलित हुए।
  • आसपास के 18 गांवों के पुरुष और महिलाएं कार्यक्रम में शामिल होकर अपने पारंपरिक नृत्य और गीत प्रस्तुत किए।
  • महिलाओं और युवतियों ने सुबह जंगल से करमा डाल लाकर उत्सव स्थल पर स्थापित किया।
  • कार्यक्रम में आरिफ अंसारी, शकील खान, लडन खान, रंजित सरदार, राजेश टोप्पो सहित कई झामुमो कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
  • ग्रामीणों ने पारंपरिक व्यंजन और गीत-संगीत का आनंद लेते हुए देर रात तक उत्सव मनाया।

इस वर्ष का करमा महोत्सव जरमना पल्ली में ग्रामीणों के लिए अत्यंत उत्साहजनक रहा। सुबह से ही गांव के लोग रंग-बिरंगे परिधानों में सज-धज कर मैदान में एकत्र हुए। पारंपरिक विधि-विधान से करम देव की पूजा-अर्चना कर सभी ने अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और गांव की खुशहाली की कामना की। महिलाएं और युवतियां जंगल से करमा डाल लाकर गीत-संगीत के बीच मैदान में स्थापित किया।

ग्रामीणों का पारंपरिक उत्सव और नृत्य

शाम होते ही ढोल-मांदर और नगाड़े की थाप पर ग्रामीणों ने करमा नृत्य प्रस्तुत किया। युवक-युवतियों की ऊर्जा और उत्साह ने पूरे क्षेत्र का वातावरण उल्लासमय बना दिया। आसपास के 18 गांवों के लोग अपने पारंपरिक गीत और नृत्य प्रस्तुत करते हुए इस महोत्सव में भाग लिया।

विधायक और अतिथियों की उपस्थिति

इस अवसर पर मुख्य अतिथि गुमला विधायक भूषण तिर्की विशेष रूप से उपस्थित रहे। ग्रामीण महिलाओं ने उनका स्वागत पारंपरिक गीत से किया। विधायक ने स्वयं नगाड़ा बजाया और थिरकते हुए करमा नृत्य में भाग लिया। कार्यक्रम में आरिफ अंसारी, शकील खान, लडन खान, रंजित सरदार, राजेश टोप्पो, नोवेल लकड़ा, फादर निरंजन एक्का, पुष्पा टोप्पो सहित कई झामुमो कार्यकर्ता उपस्थित थे, जिन्होंने महोत्सव की सफलता में सक्रिय योगदान दिया।

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

स्थानीय बुजुर्गों ने बताया कि करमा महोत्सव प्रकृति संरक्षण, भाई-बहन के अटूट प्रेम और सामाजिक एकता का प्रतीक है। ग्रामीण इस अवसर पर अपने पारंपरिक व्यंजन का आनंद लेते हैं और गीत-संगीत तथा नृत्य के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हैं।

न्यूज़ देखो: ग्रामीण संस्कृति और पारंपरिक उत्सव की सजीव झलक

न्यूज़ देखो ने इस वर्ष भी करमा महोत्सव की व्यापक कवरेज के साथ ग्रामीणों की सांस्कृतिक गतिविधियों और उत्साह को उजागर किया। इससे समाज में परंपरा और सामाजिक एकता के महत्व को रेखांकित किया गया। स्थानीय प्रशासन और विधायक की भागीदारी से यह महोत्सव और भी प्रभावशाली बना।

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Written by

जारी, गुमला

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