
#सिमडेगा #सामाजिक_सेवा : झामुमो जिला अध्यक्ष अनिल कंडुलना ने करुणा भवन पहुंचकर बुजुर्गों से मुलाकात की।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के सिमडेगा जिला अध्यक्ष अनिल कंडुलना ने शुक्रवार को कसडेगा स्थित एसडी धर्म समाज द्वारा संचालित करुणा भवन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने आश्रम में रह रहे बुजुर्गों से आत्मीय मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान का भरोसा दिया। अनिल कंडुलना ने बुजुर्गों को समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनकी सेवा को सामाजिक कर्तव्य करार दिया। करुणा भवन में चल रही सेवाओं को उन्होंने मानवता और करुणा का प्रेरक उदाहरण बताया।
- कसडेगा स्थित करुणा भवन में झामुमो जिला अध्यक्ष अनिल कंडुलना का दौरा।
- आश्रम में रह रहे बुजुर्गों से आत्मीय संवाद और समस्याओं पर चर्चा।
- बुजुर्गों को समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुए सम्मान का संदेश।
- एसडी धर्म समाज द्वारा संचालित सेवाओं की सराहना।
- झामुमो की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा।
शुक्रवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा के सिमडेगा जिला अध्यक्ष अनिल कंडुलना कसडेगा पहुंचे, जहां उन्होंने एसडी धर्म समाज द्वारा संचालित करुणा भवन का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आश्रम में निवासरत बुजुर्गों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और उनसे पारिवारिक आत्मीयता के साथ बातचीत की। बुजुर्गों की दैनिक जरूरतों, स्वास्थ्य, देखभाल और भावनात्मक पक्षों पर उन्होंने विस्तार से जानकारी ली। अनिल कंडुलना का यह दौरा केवल औपचारिक नहीं बल्कि संवेदनशील सामाजिक जुड़ाव का उदाहरण बना।
करुणा भवन में बुजुर्गों से आत्मीय संवाद
करुणा भवन पहुंचने पर अनिल कंडुलना ने बुजुर्गों से बेटे समान स्नेह के साथ बातचीत की। उन्होंने एक-एक कर बुजुर्ग का हालचाल जाना और उनकी छोटी-बड़ी समस्याओं को गंभीरता से सुना। कई बुजुर्गों ने अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों, भावनात्मक सहयोग और नियमित देखभाल से जुड़े विषयों को साझा किया। अनिल कंडुलना ने सभी बातों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
अनिल कंडुलना ने कहा:
“बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनका अनुभव ही हमारी असली पूंजी है। जिस तरह माता-पिता अपने बच्चों को जीवन का रास्ता दिखाते हैं, उसी तरह बुजुर्गों का आशीर्वाद समाज को सही दिशा देता है।”
बुजुर्गों की सेवा को बताया सामाजिक कर्तव्य
अपने संबोधन में अनिल कंडुलना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बुजुर्गों की सेवा केवल औपचारिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जिन बुजुर्गों ने जीवन भर परिवार और समाज के लिए योगदान दिया है, उनका सम्मान और देखभाल करना सभी का दायित्व है। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक समय में संयुक्त परिवारों के टूटने से बुजुर्गों की समस्याएं बढ़ी हैं, ऐसे में करुणा भवन जैसे आश्रम समाज के लिए संबल का कार्य कर रहे हैं।
अनिल कंडुलना ने कहा:
“बुजुर्गों की सेवा करना केवल जिम्मेदारी नहीं, हमारा कर्तव्य है। समाज को उनके अनुभव और मार्गदर्शन की आज भी उतनी ही आवश्यकता है।”
एसडी धर्म समाज के कार्यों की सराहना
अनिल कंडुलना ने एसडी धर्म समाज द्वारा संचालित करुणा भवन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि यहां निस्वार्थ भाव से बुजुर्गों की सेवा की जा रही है। उन्होंने कहा कि आश्रम में बुजुर्गों को सम्मान, सुरक्षा और अपनापन का जो वातावरण दिया जा रहा है, वह समाज के लिए प्रेरणादायी है।
अनिल कंडुलना ने कहा:
“एसडी धर्म समाज द्वारा संचालित करुणा भवन मानवता, करुणा और सेवा का जीवंत उदाहरण है। यहां रह रहे बुजुर्गों को जो सम्मान और अपनापन मिल रहा है, वह पूरे समाज के लिए मिसाल है।”
झामुमो की ओर से सहयोग का भरोसा
इस अवसर पर अनिल कंडुलना ने स्पष्ट किया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा हमेशा बुजुर्गों के हित में कार्य करता रहा है और आगे भी हरसंभव सहयोग करता रहेगा। उन्होंने आश्रम में रह रहे सभी बुजुर्गों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर भी प्रयास करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों को मिलकर बुजुर्गों के सम्मान और अधिकारों के लिए काम करना चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोग
इस अवसर पर करुणा भवन में सुप्रियर सिस्टर रॉस मेरिन एसडी, सिस्टर अंजना एसडी, सिस्टर रिया एसडी, सिस्टर नीतू कुजूर एसडी, झामुमो उपाध्यक्ष रितेश बड़ाईक, तारसियुस केरकेट्टा सहित अन्य लोग उपस्थित थे। सभी ने अनिल कंडुलना के इस पहल की सराहना की और बुजुर्गों के हित में ऐसे संवादों को आवश्यक बताया।
न्यूज़ देखो: समाज के लिए करुणा भवन का संदेश
करुणा भवन जैसे आश्रम यह दिखाते हैं कि बुजुर्गों की सेवा केवल संस्थागत जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता का विषय है। अनिल कंडुलना का दौरा यह संदेश देता है कि जनप्रतिनिधियों को केवल राजनीति तक सीमित न रहकर मानवीय सरोकारों से भी जुड़ना चाहिए। यह पहल समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करती है। आने वाले समय में ऐसे प्रयास कितने व्यापक रूप में आगे बढ़ते हैं, यह देखने योग्य होगा।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बुजुर्गों का सम्मान ही सभ्य समाज की पहचान
बुजुर्गों का अनुभव और आशीर्वाद किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होता है।
उनकी देखभाल और सम्मान से ही मानवीय मूल्यों की रक्षा संभव है।
करुणा भवन जैसे प्रयास हमें संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
समाज तभी आगे बढ़ेगा जब वह अपने बुजुर्गों को साथ लेकर चलेगा।





