
#केरसई #पारंपरिक_मेला : पूजा-अर्चना व फीता काटकर मेले का विधिवत शुभारंभ किया गया।
सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड में पारंपरिक केरसई मेला का 21 फरवरी 2026 को भव्य उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पूजा-अर्चना के साथ हुई और जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में फीता काटकर मेले का शुभारंभ किया गया। मेले में बड़ी संख्या में ग्रामीण और दूर-दराज से आए लोग शामिल हुए, जिससे क्षेत्र में उत्साह का माहौल रहा।
- 21 फरवरी 2026 को केरसई प्रखंड में पारंपरिक मेले का भव्य उद्घाटन।
- मुख्य अतिथि के रूप में जिला परिषद अध्यक्ष रोस प्रतिमा सोरेंग रहीं उपस्थित।
- विशिष्ट अतिथि में सोनी पैकरा, प्रेमा बड़ा, देवकांत सिंह सहित कई अधिकारी शामिल।
- पूजा-अर्चना व फीता काटकर विधिवत किया गया मेले का शुभारंभ।
- मेले में ग्रामीणों व दूर-दराज के दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी।
सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड में आयोजित पारंपरिक केरसई मेला 2026 का शुभारंभ अत्यंत भव्य और गरिमामयी माहौल में किया गया। शनिवार को आयोजित उद्घाटन समारोह में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाज और पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसके बाद मुख्य अतिथियों द्वारा फीता काटकर मेले का विधिवत उद्घाटन किया गया। उद्घाटन के साथ ही पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा वातावरण बन गया और मेले में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
पूजा-अर्चना के साथ हुआ शुभारंभ, परंपरा का दिखा उत्साह
केरसई मेला के उद्घाटन कार्यक्रम की शुरुआत धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना के साथ की गई, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है। इसके पश्चात मंचासीन अतिथियों ने संयुक्त रूप से फीता काटकर मेले का औपचारिक उद्घाटन किया। उद्घाटन के दौरान स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखा गया और मेले परिसर में पारंपरिक उल्लास का माहौल बना रहा।
मेले के आयोजन स्थल को आकर्षक तरीके से सजाया गया था, जिससे दूर-दराज से आए लोगों को एक सांस्कृतिक उत्सव का अनुभव मिला। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग के लोग मेले में उत्साहपूर्वक शामिल हुए।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला परिषद अध्यक्ष रोस प्रतिमा सोरेंग की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके साथ विशिष्ट अतिथियों के रूप में जिला परिषद उपाध्यक्ष सोनी पैकरा, जिला परिषद सदस्य प्रेमा बड़ा, अंचल अधिकारी देवकांत सिंह तथा थाना प्रभारी केरसई उपस्थित रहे।
इसके अलावा कार्यक्रम में कई अन्य प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय गणमान्य लोग भी मौजूद रहे, जिन्होंने मेले के सफल आयोजन की सराहना की और क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा को जीवित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उद्घाटन अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने मेले को क्षेत्र की पहचान बताते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करते हैं।
ग्रामीणों और दर्शकों की भारी भीड़, उत्सव का माहौल
केरसई मेला में इस वर्ष बड़ी संख्या में ग्रामीणों एवं दूर-दराज से आए दर्शकों की भीड़ देखने को मिली। मेले में लगे विभिन्न प्रकार के झूले, खिलौनों की दुकानें, खाद्य स्टॉल और पारंपरिक वस्तुओं की बिक्री लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
परिवार के साथ पहुंचे लोगों ने मेले का आनंद लिया और बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों के लिए भी यह मेला आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अवसर साबित हो रहा है।
संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है केरसई मेला
ज्ञात हो कि केरसई मेला हर वर्ष आयोजित किया जाता है और यह क्षेत्र की समृद्ध परंपरा, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। इस मेले के माध्यम से न केवल स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिलता है, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच आपसी भाईचारा और सामाजिक समरसता भी मजबूत होती है।
मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी विशेष व्यवस्था की गई है, जहां स्थानीय कलाकार अपनी कला और परंपरागत प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षण मिलता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलता है बढ़ावा
इस प्रकार के पारंपरिक मेलों से स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है। छोटे दुकानदार, हस्तशिल्प विक्रेता और स्थानीय उद्यमी मेले के माध्यम से अपनी वस्तुओं की बिक्री कर आर्थिक लाभ अर्जित करते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और क्षेत्रीय विकास में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
साथ ही, मेले में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर भी प्रशासन की ओर से आवश्यक इंतजाम किए गए हैं, ताकि आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
न्यूज़ देखो: परंपरा और एकता का जीवंत उदाहरण बना केरसई मेला
केरसई मेला केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि क्षेत्र की पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की सक्रिय भागीदारी इस आयोजन की महत्ता को और अधिक बढ़ाती है। ऐसे मेलों से न केवल संस्कृति संरक्षित होती है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामुदायिक जुड़ाव भी मजबूत होता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
परंपरा को जीवित रखने में आपकी भागीदारी है सबसे बड़ी ताकत
स्थानीय मेले हमारी संस्कृति और सामाजिक पहचान की धरोहर होते हैं।
इन आयोजनों में भाग लेकर हम अपनी परंपरा को मजबूत बना सकते हैं।
आइए ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सम्मान करें और स्थानीय कलाकारों व व्यापारियों का सहयोग करें।
अपनी संस्कृति पर गर्व करें और आने वाली पीढ़ियों को इससे जोड़ें।
मेले में अनुशासन और स्वच्छता बनाए रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।
आप भी अपनी राय कमेंट करें, खबर को शेयर करें और क्षेत्रीय परंपरा के इस उत्सव को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।






