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नीलाम्बर पीताम्बर फांसी स्थल की दुर्दशा पर भड़का खरवार भोगता समाज, अतिक्रमण हटाने और प्रतिमा स्थापना की मांग तेज

#पलामू #शहादत_सम्मान : लेस्लीगंज के नीलाम्बर पीताम्बर फांसी एवं समाधि स्थल के निरीक्षण के बाद समाज ने प्रशासन से घेराबंदी और सुंदरीकरण की मांग उठाई।

पलामू जिले के लेस्लीगंज स्थित वीर शहीद नीलाम्बर पीताम्बर के फांसी और समाधि स्थल की बदहाल स्थिति पर खरवार भोगता समाज विकास संघ ने गंभीर चिंता जताई है। केंद्रीय अध्यक्ष दर्शन गंझु के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने स्थल निरीक्षण कर अतिक्रमण हटाने और सुंदरीकरण की मांग की।

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  • खरवार भोगता समाज विकास संघ की केंद्रीय समिति ने किया स्थल निरीक्षण।
  • लेस्लीगंज, पलामू स्थित फांसी एवं समाधि स्थल की स्थिति पर जताई चिंता।
  • केंद्रीय अध्यक्ष दर्शन गंझु ने अतिक्रमण हटाने और घेराबंदी की मांग की।
  • पूर्व विधायक हरिकृष्ण सिंह ने कहा — शहीदों को नहीं मिला उचित सम्मान।
  • प्रशासन से प्रतिमा स्थापना और सुंदरीकरण की मांग, नहीं तो आंदोलन की चेतावनी।

पलामू जिले के लेस्लीगंज नीलाम्बर पीताम्बरपुर प्रखंड स्थित स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद वीर भाइयों के फांसी स्थल एवं शहादत स्थल की वर्तमान स्थिति को लेकर खरवार भोगता समाज विकास संघ ने गहरी चिंता व्यक्त की है। केंद्रीय अध्यक्ष दर्शन गंझु के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारियों ने दोनों ऐतिहासिक स्थलों का निरीक्षण किया और वहां की बदहाल व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर की।

शहादत स्थल की उपेक्षा पर समाज में आक्रोश

निरीक्षण के दौरान सदस्यों ने देखा कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों के फांसी स्थल की भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। स्थल की घेराबंदी नहीं है और समुचित संरक्षण के अभाव में ऐतिहासिक महत्व का यह स्थान उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।

केंद्रीय अध्यक्ष दर्शन गंझु ने कहा कि यह वही पवित्र स्थल है जहां अंग्रेजों ने दोनों वीर भाइयों को फांसी पर चढ़ाया था। इसके बाद उनके शवों को पास ही स्थित एक कुएं में डाल दिया गया था, ताकि उनका इतिहास दबा दिया जाए।

“देश की आजादी की लड़ाई में पलामू के इन दो महान वीरों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। लेकिन आज उनके शहादत स्थल की जो स्थिति है, वह अत्यंत चिंताजनक है। समाज अब जाग चुका है और महापुरुषों के सम्मान में किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं करेगा।”

उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की कि फांसी स्थल की जमीन का सीमांकन कर घेराबंदी की जाए और वहां वीर शहीदों की प्रतिमा स्थापित कर पूरे परिसर का सुंदरीकरण कराया जाए।

पूर्व विधायक ने भी उठाई आवाज

मनिका के पूर्व विधायक हरिकृष्ण सिंह ने भी निरीक्षण के दौरान अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नीलाम्बर पीताम्बर 1857 के महान योद्धा थे जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था। वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

“स्वतंत्रता सेनानियों को जो सम्मान मिलना चाहिए था, वह अब तक नहीं मिल पाया है। इनके इतिहास और योगदान को कहीं न कहीं दबाने का प्रयास हुआ है। हम इन विषयों को जिला प्रशासन और सरकार के समक्ष मजबूती से रखेंगे।”

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उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि फांसी स्थल को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए तथा फांसी स्थल एवं समाधि स्थल का समुचित विकास कराया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो समाज आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

ऐतिहासिक महत्व और संरक्षण की आवश्यकता

नीलाम्बर पीताम्बर पलामू क्षेत्र के गौरव हैं। 1857 के संग्राम में उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व किया था। उनका संघर्ष न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है।

ऐसे में यह अपेक्षा की जाती है कि उनके शहादत स्थल को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में विकसित किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन स्थलों का संरक्षण और प्रचार-प्रसार किया जाए तो यह क्षेत्र ऐतिहासिक पर्यटन का केंद्र भी बन सकता है।

बड़ी संख्या में मौजूद रहे समाज के पदाधिकारी

निरीक्षण कार्यक्रम में केंद्रीय उपाध्यक्ष रामनाथ गंझू, केंद्रीय सलाहकार झलकु गंझू, केंद्रीय प्रवक्ता देवनारायण गंझु, लातेहार जिला अध्यक्ष प्रेम गंझू, नरेश गंझू, रामगढ़ जिला अध्यक्ष अजय गंझु, रामधारी गंझु, सत्यनारायण गंझु, प्रयाग गंझू, मनमोहन गंझू, जगरनाथ सिंह, मनोज सिंह, कर्मजीत सिंह, मंगल किशोर महतो, सरजू राम, मंगल किशोर मेहता, बिनोद गंझु, रामदयाल गंझु सहित बड़ी संख्या में समाज के सदस्य उपस्थित रहे।

सभी ने एक स्वर में कहा कि शहीदों के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर व्यापक जनांदोलन किया जाएगा।

न्यूज़ देखो: इतिहास के सम्मान से ही मजबूत होगा भविष्य

पलामू की धरती ने अनेक वीर सपूतों को जन्म दिया है। यदि उनके शहादत स्थलों की उपेक्षा होगी तो यह केवल इतिहास के साथ अन्याय नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के साथ भी अन्याय होगा। प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर ऐसे स्थलों के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शहीदों का सम्मान हमारी जिम्मेदारी

आज जरूरत है कि हम अपने इतिहास को जानें और उसे सहेजें।
महापुरुषों की शहादत केवल किताबों में सीमित न रह जाए।
यदि आपके क्षेत्र में भी कोई ऐतिहासिक स्थल उपेक्षित है, तो आवाज उठाइए।
जागरूक नागरिक बनिए और अपने अधिकारों के लिए संगठित रहिए।
इस खबर को साझा करें और बताएं कि शहीदों के सम्मान के लिए और क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

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