बालूमाथ में खरवार एकता सम्मेलन आयोजित, समाज के संगठनों ने एकजुटता और सांस्कृतिक संरक्षण पर दिया जोर

बालूमाथ में खरवार एकता सम्मेलन आयोजित, समाज के संगठनों ने एकजुटता और सांस्कृतिक संरक्षण पर दिया जोर

author Jitendra Giri
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#बालूमाथ #लातेहार #खरवारएकता : विभिन्न संगठनों की बैठक में समाज की एकजुटता पर बल।

लातेहार जिले के बालूमाथ में खरवार समाज के विभिन्न संगठनों द्वारा एकदिवसीय खरवार एकता सम्मेलन सह विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रांची, चतरा और लातेहार सहित कई जिलों से समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन में समाज की एकता को मजबूत करने, भाषा-संस्कृति के संरक्षण और सामूहिक नेतृत्व को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। साथ ही 28 मार्च को रांची में होने वाले नीलाम्बर-पीताम्बर शहादत दिवस कार्यक्रम को सफल बनाने का संकल्प लिया गया।

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  • बालूमाथ के कजरिया होटल में आयोजित हुआ खरवार एकता सम्मेलन सह विचार गोष्ठी
  • कार्यक्रम की अध्यक्षता दर्शन गंझू और संचालन सीकेन्द्र खरवार ने किया।
  • रांची, लातेहार और चतरा सहित कई जिलों से खरवार समाज के प्रतिनिधि हुए शामिल।
  • सम्मेलन में नीलाम्बर-पीताम्बर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई।
  • समाज की एकता, भाषा-संस्कृति संरक्षण और संगठनात्मक मजबूती पर लिया गया निर्णय।
  • 28 मार्च को रांची में शहादत दिवस कार्यक्रम को सफल बनाने का आह्वान।

लातेहार जिले के बालूमाथ में खरवार समाज के विभिन्न संगठनों की ओर से एकदिवसीय खरवार एकता सम्मेलन सह विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में झारखंड के अलग-अलग जिलों से समाज के प्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल हुए। रांची जिले के खलारी प्रखंड से भी भोगता समाज के लोग बड़ी संख्या में सम्मेलन में पहुंचे और समाज की एकता तथा विकास को लेकर अपने विचार साझा किए।

सम्मेलन का उद्देश्य समाज के विभिन्न संगठनों को एक मंच पर लाकर आपसी समन्वय बढ़ाना और सामूहिक रूप से सामाजिक, सांस्कृतिक तथा शैक्षणिक विकास की दिशा में आगे बढ़ना था। कार्यक्रम के दौरान समाज की एकजुटता को मजबूत करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी परंपराओं को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया।

नीलाम्बर-पीताम्बर को श्रद्धांजलि के साथ कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत ऐतिहासिक वीर नायकों नीलाम्बर-पीताम्बर की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। उपस्थित सभी लोगों ने उनके संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए समाज को एकजुट रखने का संकल्प लिया।

सम्मेलन की अध्यक्षता खरवार भोगता समाज विकास संघ के केंद्रीय अध्यक्ष दर्शन गंझू ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन खरवार आदिवासी एकता संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष सीकेन्द्र खरवार ने किया।

समाज की एकता को मजबूत बनाने पर जोर

इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि समाज के विकास के लिए सबसे जरूरी है कि सभी संगठन और उपजातियां एक साथ मिलकर काम करें। यदि समाज के लोग एक मंच पर आकर अपने अधिकारों और पहचान के लिए प्रयास करें तो विकास की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया जा सकता है।

केंद्रीय उपाध्यक्ष रामलखन गंझू ने कहा: “खरवार समाज के विभिन्न संगठनों को एक मंच पर लाना समय की आवश्यकता है। जब सभी उपजातियां एकजुट होंगी तभी समाज का समग्र विकास संभव होगा।”

उन्होंने कहा कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक संरक्षण के माध्यम से समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है।

28 मार्च के शहादत दिवस कार्यक्रम को सफल बनाने का निर्णय

सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण निर्णय यह भी लिया गया कि 28 मार्च को रांची में आयोजित नीलाम्बर-पीताम्बर शहादत दिवस कार्यक्रम को सफल बनाया जाएगा। इसके लिए समाज के सभी संगठनों और कार्यकर्ताओं से सक्रिय भागीदारी की अपील की गई।

वक्ताओं ने कहा कि शहादत दिवस केवल एक स्मरण दिवस नहीं है, बल्कि यह समाज को अपनी ऐतिहासिक विरासत और संघर्षों की याद दिलाने का अवसर भी है। इसलिए अधिक से अधिक लोगों को इसमें भाग लेकर अपने इतिहास और परंपराओं के प्रति सम्मान प्रकट करना चाहिए।

भाषा, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण पर चर्चा

सम्मेलन के दौरान समाज की भाषा, संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित रखने पर भी विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना बेहद जरूरी है।

समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी भाषा, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक परंपराओं को सीखें और उन्हें आगे बढ़ाने में योगदान दें।

कई संगठनों के प्रतिनिधि हुए शामिल

इस सम्मेलन में अखिल झारखंड खरवार आदिवासी विकास परिषद, खरवार आदिवासी एकता संघ तथा खरवार भोगता समाज विकास संघ के केंद्रीय और जिला स्तर के पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से केदार सिंह खरवार, राजदेव सिंह खरवार, झलकु गंझू, रामनाथ गंझू, रामदेव सिंह भोगता, रामलखन गंझू, बिगन सिंह भोगता, अमृत भोगता, प्रेम गंझू, कामेश्वर गंझू, अमरनाथ सिंह खरवार उपस्थित रहे।

इसके अलावा सम्मेलन में रामधारी गंझू, योगेंद्र गंझू, नरेश गंझू, बहादुर गंझु, रितेश सिंह खरवार, ओमप्रकाश सिंह, उदेश्वर सिंह, प्रमोद सिंह भोगता, शिवनन्दन सिंह, हरिहर सिंह, राजेन्द्र सिंह, लालदीप सिंह, सुनेश्वर सिंह, मनोज खरवार, नारायण सिंह, प्रकाश गंझू, प्रदीप गंझू, महेश गंझू, राजेंद्र गंझू, संतोष भोगता, राजेश्वर गंझू, अर्जुन कुमार भोगता, रमेश कुमार भोगता, जीतन गंझू, रामवचन देव गंझू, विनोद गंझू, जगदीश गंझू, सुरेश गंझू, मुनेश गंझू, रवि भोगता, बालेश्वर गंझू, दिलीप कुमार गंझू, संजय गंझू, रामकिसुन गंझू, हरिराम गंझू, कुलदीप कुमार गंझू, सूरज गंझू, उमेश गंझू, संतोष कुमार गंझू, प्रभाकर गंझू, बैजू गंझू सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।

न्यूज़ देखो: सामाजिक एकता से ही मजबूत होगा समाज

बालूमाथ में आयोजित यह सम्मेलन इस बात का संकेत है कि समाज के विभिन्न संगठन अब एक मंच पर आकर सामूहिक रूप से आगे बढ़ना चाहते हैं। सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में ऐसे प्रयास समाज को नई दिशा दे सकते हैं। यदि समाज के लोग मिलकर शिक्षा, जागरूकता और संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान दें तो आने वाले समय में इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

समाज की ताकत उसकी एकता में छिपी होती है

किसी भी समाज की असली ताकत उसकी एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान में होती है। जब लोग अपने इतिहास, परंपरा और मूल्यों को समझते हुए एक साथ आगे बढ़ते हैं, तभी समाज मजबूत बनता है।

यदि हम सभी अपनी संस्कृति और सामाजिक एकता को बनाए रखने के लिए प्रयास करें तो आने वाली पीढ़ियों को एक मजबूत पहचान और बेहतर भविष्य मिल सकता है।

आप भी समाज से जुड़े ऐसे सकारात्मक प्रयासों पर अपनी राय जरूर दें। इस खबर को अपने दोस्तों और परिचितों तक साझा करें और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

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Written by

खलारी, रांची

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