महुआडांड़ प्रखंड में रोजगार की कमी से बढ़ता पलायन, चुनावी वादे साबित हो रहे खोखले

महुआडांड़ प्रखंड में रोजगार की कमी से बढ़ता पलायन, चुनावी वादे साबित हो रहे खोखले

author Ramprawesh Gupta
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#महुआडांड़ #बेरोजगारी : प्रखंड के ग्रामीण रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं, चुनावी वादे अधूरे साबित हो रहे हैं
  • महुआडांड़ प्रखंड के कई गांवों में बेरोजगारी की स्थिति गंभीर।
  • ग्रामीण रोजगार की तलाश में केरल, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों का रुख कर रहे हैं।
  • पलायन से खेती-बाड़ी प्रभावित, बच्चों की पढ़ाई बाधित और परिवार टूटने की कगार पर।
  • ग्रामीणों का आरोप कि मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं का सही संचालन नहीं हो रहा।
  • जिला प्रशासन और सरकार से स्थायी रोजगार, स्वरोजगार और प्रशिक्षण की मांग।

महुआडांड़ प्रखंड के ओरसा पंचायत सहित अन्य गांवों में ग्रामीण गंभीर बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर न होने के कारण सैकड़ों मजदूर हर साल अन्य राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। इस पलायन के चलते गांवों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति कमजोर होती जा रही है।

पलायन और उसके प्रभाव

ग्रामीणों के अनुसार, महुआडांड़ प्रखंड से युवा, पुरुष और महिलाएं रोजगार की तलाश में केरल, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों का रुख कर रहे हैं। इस पलायन से खेती-बाड़ी प्रभावित हो रही है, बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है और कई परिवार टूटने की कगार पर हैं।

ग्रामीणों ने बताया: “यदि स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार की व्यवस्था नहीं हुई, तो पलायन और तेज होगा, जिससे पूरे क्षेत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।”

चुनावी वादे और अधूरी योजनाएँ

ग्रामीणों का आरोप है कि झारखंड सरकार द्वारा चुनाव के समय स्थायी रोजगार, स्वरोजगार और मजदूरी बढ़ाने के कई वादे किए गए थे, लेकिन आज स्थिति जस की तस बनी हुई है। मनरेगा जैसी योजनाओं का सही तरीके से संचालन नहीं होने के कारण ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर 100 दिन का रोजगार भी नहीं मिल पा रहा।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और झारखंड सरकार से मांग की है कि प्रखंड क्षेत्र में:

  • स्थायी रोजगार की व्यवस्था की जाए।
  • छोटे उद्योग और स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जाए।
  • सरकारी योजनाओं को पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।
  • युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।

एक ग्रामीण ने कहा: “हमारे गांव के युवा अगर समय रहते रोजगार न पाए, तो भविष्य में पलायन और अधिक बढ़ेगा, जिससे सामाजिक और आर्थिक संकट और गंभीर होगा।”

न्यूज़ देखो: महुआडांड़ में बेरोजगारी का संकट

महुआडांड़ प्रखंड का यह मामला दिखाता है कि बेरोजगारी और सरकारी योजनाओं की अनुपस्थिति ग्रामीण जीवन पर सीधे प्रभाव डालती है। स्थानीय रोजगार, स्वरोजगार और प्रशिक्षण पर ध्यान दिए बिना पलायन की समस्या बढ़ती ही जाएगी। जिला प्रशासन और सरकार की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक रहें और समाधान के लिए आवाज उठाएँ

अपने गांव और क्षेत्र के युवाओं के भविष्य के लिए सजग रहें। बेरोजगारी और पलायन के मुद्दे पर सक्रिय बनें, स्थानीय अधिकारियों से समाधान की मांग करें और अपनी आवाज साझा करें। इस खबर को फैलाएं और सरकार तथा प्रशासन पर दबाव बनाएं ताकि स्थायी रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर सुनिश्चित हों। अपने अधिकारों और भविष्य के लिए सजग रहना ही सशक्त नागरिकता है।

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Written by

महुवाडांड, लातेहार

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