#कोलेबिरा #कृषि_प्रशिक्षण : लाह उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु किसानों को प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध कराए गए।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा में लाह उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 180 किसानों ने भाग लेकर उन्नत तकनीकों की जानकारी हासिल की। कार्यक्रम के अंत में किसानों को टूल किट वितरित किए गए, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह पहल किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
- कोलेबिरा बरसात प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन।
- 180 किसानों ने लिया भाग, लाह की उन्नत खेती की जानकारी प्राप्त।
- सिद्धू-कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ, रांची का सहयोग।
- प्रशिक्षण में उत्पादन, कीट प्रबंधन और विपणन की जानकारी दी गई।
- सभी किसानों को टूल किट का वितरण, उत्पादन क्षमता बढ़ाने का प्रयास।
- जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने किसानों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। कोलेबिरा बरसात प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा आयोजित इस एक दिवसीय लाह प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से लाह उत्पादन के लिए प्रशिक्षित करना था, ताकि वे कम लागत में अधिक लाभ कमा सकें।
प्रशिक्षण में दी गई उन्नत खेती की जानकारी
कार्यक्रम का आयोजन सिद्धू-कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लिमिटेड, रांची के सहयोग से किया गया। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को लाह की खेती से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां विस्तार से दीं।
किसानों को बताया गया कि किस प्रकार उचित पेड़ों का चयन, समय पर बीज लाह का उपयोग और फसल की नियमित देखभाल से उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है। इसके साथ ही कीट एवं रोग प्रबंधन तथा फसल संरक्षण के आधुनिक तरीकों पर भी विशेष जोर दिया गया।
बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने पर फोकस
प्रशिक्षण में किसानों को यह भी समझाया गया कि लाह की खेती केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार से सही जुड़ाव भी उतना ही जरूरी है। विशेषज्ञों ने विपणन के बेहतर विकल्पों और बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन करने के तरीकों पर भी मार्गदर्शन दिया।
किसानों को बताया गया कि लाह की खेती कम लागत में बेहतर मुनाफा देने वाली खेती है और इसे अपनाकर ग्रामीण परिवार अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकते हैं।
टूल किट वितरण से मिलेगा व्यावहारिक सहयोग
कार्यक्रम के समापन पर सभी 180 किसानों के बीच टूल किट का वितरण किया गया। इन टूल किट में लाह उत्पादन से जुड़े आवश्यक उपकरण शामिल हैं, जो किसानों को व्यावहारिक रूप से मदद करेंगे।
इस पहल से किसानों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और वे बेहतर तरीके से लाह की खेती कर सकेंगे। यह कदम किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने किया प्रेरित
कार्यक्रम में उपस्थित सिद्धकोफेड के सीनियर मैनेजर सौरभ ने किसानों को लाह खेती के महत्व के बारे में बताया।
सौरभ ने कहा: “लाह की खेती किसानों की आय बढ़ाने और आजीविका के नए अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।”
वहीं कोलेबिरा प्रखंड प्रमुख दुतामी हेमरोम और लचड़ागढ़ पंचायत की मुखिया जिरेन मड़की ने भी किसानों को इस खेती को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
दुतामी हेमरोम ने कहा: “इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम क्षेत्र के किसानों के लिए बेहद लाभकारी हैं और इससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कोलेबिरा बरसात प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की प्रबंध निदेशक नीलम बरजो और सीईओ सोनू सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना की और भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।
कार्यक्रम ने न केवल किसानों को नई तकनीकों से परिचित कराया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित किया।
न्यूज़ देखो: प्रशिक्षण और संसाधन से मजबूत होंगे किसान
कोलेबिरा में आयोजित यह लाह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि टूल किट वितरण के माध्यम से किसानों को व्यावहारिक सहयोग भी दिया गया है। ऐसे प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। अब जरूरी है कि इस पहल को निरंतरता मिले और अधिक से अधिक किसान इससे जुड़ें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
नई तकनीक अपनाएं और आत्मनिर्भर बनें
आज के दौर में खेती केवल परंपरा नहीं, बल्कि तकनीक और ज्ञान का समन्वय बन चुकी है। अगर किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो वे कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को नई दिशा देने का काम करते हैं। हमें चाहिए कि हम इन अवसरों का पूरा लाभ उठाएं और अपने गांव व क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएं।
