
#रांचीसमाचार #शहादतदिवस : मोरहाबादी मैदान में पारंपरिक विधि से होगा भव्य आयोजन।
रांची के मोरहाबादी मैदान स्थित नीलाम्बर-पीताम्बर पार्क में 28 मार्च को अमर शहीद वीर नीलाम्बर-पीताम्बर का शहादत दिवस मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम में पूरे झारखंड से लाखों लोगों के शामिल होने की तैयारी है। आयोजन को लेकर अंतिम चरण की तैयारियां जारी हैं और स्थल का निरीक्षण भी किया गया। यह आयोजन आदिवासी समाज की एकता और गौरव का प्रतीक माना जा रहा है।
- 28 मार्च को रांची के मोरहाबादी मैदान में शहादत दिवस का आयोजन।
- खरवार भोगता संगम विकास संघ के नेतृत्व में तैयारियां अंतिम चरण में।
- दर्शन गंझू सहित पदाधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल का किया निरीक्षण।
- पूरे झारखंड से लाखों लोग पारंपरिक वेशभूषा में होंगे शामिल।
- पाहन एवं चट्टी द्वारा पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना की जाएगी।
- कार्यक्रम में मंत्री, विधायक और समाज के वरिष्ठ नेता होंगे आमंत्रित।
रांची के मोरहाबादी मैदान स्थित नीलाम्बर-पीताम्बर पार्क में 28 मार्च को आयोजित होने वाले शहादत दिवस को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। यह आयोजन अमर शहीद वीर नीलाम्बर-पीताम्बर की स्मृति में हर वर्ष मनाया जाता है, लेकिन इस बार इसे विशेष रूप से भव्य बनाने की योजना है। पूरे राज्य से बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए प्रशासन और आयोजन समिति दोनों सतर्क हैं।
कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण और तैयारियों का जायजा
खरवार भोगता संगम विकास संघ के केंद्रीय अध्यक्ष दर्शन गंझू के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने मोरहाबादी मैदान स्थित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्मारक स्थल की सजावट, मंच निर्माण और पंडाल की व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान आयोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और यह सुनिश्चित किया गया कि कार्यक्रम में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। समाज के लोगों से भी बातचीत कर उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
दर्शन गंझू ने कहा: “इस वर्ष शहादत दिवस को विशेष रूप से मनाने की तैयारी की गई है, जिसमें पूरे झारखंड से हमारे समाज के लोग शामिल होंगे।”
पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुति होगी आकर्षण का केंद्र
इस आयोजन की सबसे खास बात यह होगी कि इसमें शामिल होने वाले लोग पारंपरिक वेशभूषा में नजर आएंगे। ढोल-नगाड़ों की धुन पर समाज के लोग अपने सांस्कृतिक गौरव को प्रदर्शित करेंगे। आयोजन समिति द्वारा अतिथियों के स्वागत के लिए विशेष सांस्कृतिक टीम का गठन किया गया है, जो कार्यक्रम को और भी आकर्षक बनाएगी।
यह आयोजन न केवल श्रद्धांजलि देने का अवसर होगा, बल्कि आदिवासी संस्कृति और परंपरा को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण मंच भी बनेगा।
पारंपरिक विधि-विधान से पूजा और श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के दौरान समाज के पाहन एवं चट्टी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि नीलाम्बर-पीताम्बर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
इस अवसर पर झारखंड सरकार के मंत्री, विभिन्न क्षेत्रों के विधायक और आदिवासी समाज के कई वरिष्ठ नेता एवं प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। इससे कार्यक्रम का महत्व और बढ़ जाता है।
समाज के लोगों से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील
आयोजकों ने पूरे झारखंड के आदिवासी समाज के लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करें। यह आयोजन समाज की एकता, संस्कृति और इतिहास को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
प्रमुख लोगों की उपस्थिति
कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें केंद्रीय सलाहकार झलकु गंझू, केंद्रीय उपाध्यक्ष रामलखन गंझू, युवा संघ के केंद्रीय अध्यक्ष उमेश सिंह भोगता, रांची जिला अध्यक्ष अमृत भोगता, प्रभाकर गंझू, ओरमांझी प्रखंड अध्यक्ष अमरनाथ भोगता सहित अन्य लोग शामिल थे।
इन सभी ने आयोजन को सफल बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने का संकल्प लिया।
न्यूज़ देखो: आदिवासी एकता और गौरव का प्रतीक बनता आयोजन
नीलाम्बर-पीताम्बर शहादत दिवस केवल एक स्मरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह झारखंड की आदिवासी पहचान और इतिहास को जीवित रखने का माध्यम है। हर वर्ष बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि समाज अपने नायकों को लेकर जागरूक और संगठित है। प्रशासन और आयोजकों की जिम्मेदारी है कि इतने बड़े आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया जाए। आने वाले समय में ऐसे आयोजनों को और व्यापक स्वरूप देने की जरूरत है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपने इतिहास को जानें और एकता की ताकत को मजबूत करें
नीलाम्बर-पीताम्बर जैसे वीरों का बलिदान हमें अपने अधिकारों और पहचान के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजन केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का अवसर भी होते हैं।






