Latehar

तमिलनाडु में मजदूरी कर रहे लालू यादव की मौत, शव लाने में श्रम विभाग ने की 50 हजार की सहायता

#लातेहार #प्रवासीमजदूरमृत्यु : कोयंबटूर में काम कर रहे लातेहार के मजदूर की मौत — पत्नी ने लगाई शव लाने की गुहार, श्रम विभाग ने दिखाई संवेदनशीलता
  • लातेहार जिले के होशिर गांव निवासी लालू यादव की तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुई मौत
  • पत्नी मनोरमा देवी ने आर्थिक तंगी में शव लाने में असमर्थता जताई
  • झामुमो प्रवक्ता सुशील यादव और विलास यादव ने श्रम अधीक्षक से मिलकर की मदद की मांग
  • श्रम अधीक्षक दिनेश भगत ने उपायुक्त के निर्देश पर 50,000 रुपये की त्वरित सहायता राशि प्रदान की
  • परिजनों और ग्रामीणों ने श्रम विभाग की संवेदनशील पहल के लिए जताया आभार

प्रवासी मजदूर की मौत से गांव में शोक, पत्नी ने उठाई इंसानियत की पुकार

लातेहार सदर थाना क्षेत्र के पेशरार पंचायत अंतर्गत होशिर गांव निवासी लालू यादव रोजी-रोटी की तलाश में तमिलनाडु के कोयंबटूर गए थे। बुधवार को उनकी अचानक मौत की सूचना गांव पहुंची, जिससे पूरे परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी मनोरमा देवी ने बताया कि उनके तीन छोटे बच्चे हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने अपने पति का शव गांव लाने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई थी, क्योंकि उनके पास इतना पैसा नहीं था कि शव वापस ला सकें

झामुमो नेताओं की पहल पर मिला त्वरित सहयोग

मनोरमा देवी की पीड़ा को सुनकर झामुमो जिला प्रवक्ता सुशील कुमार यादव एवं विलास यादव ने सक्रियता दिखाई और सीधे श्रम अधीक्षक दिनेश भगत से संपर्क किया। उन्होंने परिवार की परिस्थिति बताकर मदद की अपील की। श्रम अधीक्षक ने जिला उपायुक्त के निर्देश पर तुरंत 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की और राशि मनोरमा देवी तक पहुंचाई गई

श्रम अधीक्षक दिनेश भगत ने कहा: “मजदूरों के साथ दुख की घड़ी में खड़ा होना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। मृतक के परिवार को हरसंभव सहायता दी जाएगी।”

परिजनों ने जताया आभार, गांव में भी सराहना

श्रम विभाग की इस त्वरित और मानवीय पहल की गांव में भी खूब सराहना हो रही हैमनोरमा देवी और अन्य परिजनों ने भावुक होकर प्रशासन और श्रम अधीक्षक का आभार व्यक्त किया। इस दौरान छोटू यादव, सुमित कुमार यादव सहित अन्य ग्रामीण भी मौजूद रहे।

न्यूज़ देखो: प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल

जब पीड़ित परिवार की पुकार को व्यवस्था ने सुना और त्वरित सहायता दी, तो यह साबित करता है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो प्रशासनिक मशीनरी संवेदनशील बन सकती है। प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर न्यूज़ देखो लगातार आवाज़ उठाता रहा है
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

एकजुट समाज ही दुख की घड़ी में बनता है सहारा

इस घटना ने फिर दिखा दिया कि समाज और शासन मिलकर किसी की पीड़ा को कम कर सकते हैं। ऐसे ही प्रयासों से हमारा समाज और अधिक मानवीय बन सकता है। इस खबर को साझा करें और अपने आसपास के जरूरतमंदों के लिए भी एक आवाज़ बनें।

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