लातेहार जिले में पेयजल संकट: 1500 चापाकल खराब, दो लाख आबादी प्रभावित

लातेहार जिले में पेयजल संकट: 1500 चापाकल खराब, दो लाख आबादी प्रभावित

author News देखो Team
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#लातेहार — खराब चापाकलों से बढ़ा पेयजल संकट, ग्रामीण इलाकों में हाहाकार:

  • लातेहार जिले के 1500 से अधिक चापाकल खराब पड़े हैं
  • दो लाख से अधिक ग्रामीण आबादी को पानी की समस्या का सामना
  • भूमिगत जलस्तर 10 से 15 मीटर नीचे पहुंचा
  • डार्क जोन इलाकों में संकट ज्यादा गंभीर
  • प्रशासन और पीएचईडी विभाग मरम्मत के लिए कर रहा प्रयास

लातेहार जिले के विभिन्न प्रखंडों में गर्मियों की शुरुआत के साथ ही पेयजल संकट गहराने लगा है। जिले के बारियातू, सदर प्रखंड, चंदवा, हेरहंज, बालूमाथ, मनिका, महुआडांड़, बरवाडीह, गारू और सरयू प्रखंडों में लगभग 1500 चापाकल खराब पड़े हैं। इन बंद चापाकलों के कारण करीब दो लाख की आबादी को पीने के पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

पिछले साल सामान्य से कम बारिश और तापमान में हो रही तेज़ वृद्धि के कारण भूमिगत जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। मार्च के अंत तक पानी का स्तर 10 से 15 मीटर तक नीचे चला गया है। डार्क ज़ोन इलाकों में यह स्थिति और भयावह हो चुकी है, जहां जलस्तर 30 मीटर तक नीचे चला जाता है।

करोड़ों की लागत से लगे चापाकल भी बेकार

पीएचईडी विभाग, एनआरईपी, विशेष प्रमंडल, सांसद और विधायक मद तथा 14वें एवं 15वें वित्त आयोग की सहायता से कभी करोड़ों की लागत से लगाए गए चापाकल अब बेकार पड़े हैं। ग्रामीणों की शिकायत है कि नहर, तालाब, डोभा और कुएं तक सूखने की कगार पर हैं।

“हमारे विभाग द्वारा लगाए गए खराब पड़े चापाकलों को दुरुस्त कराने का प्रयास जारी है। गर्मियों में जलस्तर में असामान्य उतार-चढ़ाव आम बात है।” — दीपक कुमार महतो, कार्यपालक अभियंता, पीएचईडी विभाग

डार्क जोन में हालात ज्यादा गंभीर

डार्क ज़ोन घोषित इलाकों में तो ग्रामीणों को एक-एक बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यहां जलस्तर सामान्य समय में भी कम रहता है और गर्मियों में यह और भी नीचे चला जाता है।

प्रशासन की चिंता और कदम

हालांकि प्रशासन की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा। ग्रामीण इलाकों में पानी के टैंकर और वैकल्पिक इंतजाम की मांग तेज़ हो गई है।

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