लातेहार में ओलावृष्टि से बर्बाद हुई रवि फसल, किसान बेहाल, मुआवजे का इंतजार

लातेहार में ओलावृष्टि से बर्बाद हुई रवि फसल, किसान बेहाल, मुआवजे का इंतजार

author News देखो Team
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#Latehar – ओलावृष्टि से तबाह हुई फसल, सरकार से मुआवजे की गुहार:

  • लातेहार जिले के महुआडांड़ क्षेत्र में भीषण ओलावृष्टि से किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद
  • तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, गर्मी और संकट दोनों बढ़े
  • किसानों को अब तक सरकारी मुआवजा नहीं मिला, आर्थिक तंगी से जूझ रहे
  • प्रशासन से जल्द राहत राशि देने की मांग, किसान आंदोलन की तैयारी में

ओलावृष्टि ने बर्बाद की रवि फसल

लातेहार जिले के महुआडांड़ और आसपास के गांवों में कुछ दिन पहले आई भीषण ओलावृष्टि ने किसानों की पूरी फसल तबाह कर दी। गेहूं, सरसों, चना और दलहन की खड़ी फसलें तेज ओलों के कारण जमीन पर बिछ गईं। इससे किसानों की मेहनत पल भर में राख हो गई और उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

गर्मी और संकट की दोहरी मार

ओलावृष्टि के तुरंत बाद तापमान अचानक 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। खेतों में पड़ी फसलें अब सड़ने लगी हैं, जिससे नुकसान और बढ़ सकता है।

किसानों का दर्द – “बिना मुआवजे के कैसे जिएं?”

चुटिया महुआडांड़ के किसान चमन यादव ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा:

“हमारी पूरी फसल तबाह हो गई है, लेकिन अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली। खेती ही हमारी रोजी-रोटी का एकमात्र साधन है। अगर जल्द मुआवजा नहीं मिला तो हम अगली बुवाई कैसे करेंगे?”

किसानों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को तुरंत सर्वे कराकर राहत राशि जारी करनी चाहिए, ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।

प्रशासन से उम्मीद, आंदोलन की चेतावनी

अब किसानों की उम्मीदें सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं। वे चाहते हैं कि:

  • तत्काल फसल क्षति का सर्वे हो और नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा जारी किया जाए
  • प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए किसानों के लिए बीमा योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए
  • यदि जल्द राहत नहीं मिली, तो किसान विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे

न्यूज़ देखो – किसानों के दर्द को कौन सुनेगा?

ओलावृष्टि से तबाह हुए किसानों की हालत बद से बदतर हो रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस सरकारी सहायता नहीं मिली। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि वह तुरंत प्रभावित किसानों को राहत राशि दे, ताकि वे अपने जीवनयापन और भविष्य की खेती को फिर से शुरू कर सकें। क्या सरकार किसानों की इस गंभीर समस्या को गंभीरता से लेगी, या फिर वे सिर्फ आश्वासन के भरोसे रह जाएंगे?

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