
#मेदिनीनगर #शैक्षणिक_आयोजन : डाक विभाग ने छात्रों में पत्र लेखन की परंपरा और अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ावा देने हेतु प्रतियोगिता आयोजित की
- संत मरियम स्कूल में डाक विभाग द्वारा “ढाई आखर” थीम पर पत्र लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई।
- कार्यक्रम का संचालन डेवलपमेंट ऑफिसर श्री राहुल गुप्ता के मार्गदर्शन में हुआ।
- उत्कर्ष देव और रोशन राज की विशेष उपस्थिति में छात्रों को प्रेरक सुझाव दिए गए।
- विभिन्न कक्षाओं के छात्रों ने “लेटर टू माइ रोल मॉडल” विषय पर पत्र लिखकर भाग लिया।
- प्रतियोगिता का उद्देश्य भाषा कौशल, रचनात्मक अभिव्यक्ति और पत्र लेखन की परंपरा को पुनर्जीवित करना था।
मेदिनीनगर स्थित संत मरियम स्कूल में शनिवार को डाक विभाग की ओर से एक प्रेरणादायक और शैक्षणिक माहौल देखने को मिला। भारत संचार मंत्रालय के निर्देशन में आयोजित इस प्रतियोगिता ने छात्रों को पत्र लेखन जैसे विलुप्त होते कला रूप से पुनः जुड़ने का अवसर दिया। “ढाई आखर” थीम पर आधारित कार्यक्रम में छात्रों ने अपने मनपसंद रोल मॉडल को पत्र लिखकर अपनी भावनाएं और विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की शुरुआत विभागीय अधिकारियों द्वारा पत्र लेखन की प्रासंगिकता और डाक सेवा के महत्व पर विस्तार से जानकारी देने के साथ हुई।
ढाई आखर थीम और पत्र लेखन का महत्व
प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य छात्रों में भाषा के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना था। श्री राहुल गुप्ता ने छात्रों को बताया कि आधुनिक तकनीक के युग में भी पत्र एक ऐसा माध्यम है जो भावनाओं को सीधे और सजीव रूप में प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा:
श्री राहुल गुप्ता ने कहा: “पत्र केवल शब्द नहीं होते, यह व्यक्ति की भावनाओं का संकलन होते हैं जिन्हें पढ़ने वाला भी दिल से महसूस करता है।”
उन्होंने छात्रों को पत्र लेखन की प्रक्रिया, भाषा की शुद्धता और अभिव्यक्ति की कला के बारे में विस्तार से समझाया।
अतिथियों ने बढ़ाया छात्रों का मनोबल
कार्यक्रम में छात्रावास अधीक्षक श्री उत्कर्ष देव और सीनियर कोऑर्डिनेटर श्री रोशन राज की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। दोनों ने छात्रों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों की सोच को विस्तृत बनाते हैं और उन्हें आत्मविश्वास प्रदान करते हैं।
श्री रोशन राज ने कहा: “आपकी लेखनी में वह शक्ति है जो आपके विचारों को समाज तक पहुंचा सकती है। ऐसी प्रतियोगिताएं आपको अपने भीतर की प्रतिभा पहचानने में मदद करती हैं।”
छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी
विभिन्न कक्षाओं के छात्रों ने उत्साहपूर्वक “लेटर टू माइ रोल मॉडल” टॉपिक पर पत्र प्रस्तुत किए। किसी ने शिक्षक को, किसी ने माता-पिता को, तो किसी ने अपने प्रेरक व्यक्तित्व को संबोधित पत्र लिखकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कई पत्रों में सामाजिक संदेश, प्रेरक विचार और संवेदनशील भावनाएं देखने को मिलीं। शिक्षक और आयोजक टीम ने सभी पत्रों को ध्यानपूर्वक पढ़ा और छात्रों की ईमानदार कोशिशों की सराहना की।
विद्यालय प्रशासन का सहयोग
विद्यालय प्रबंधन ने इस तरह के आयोजनों को छात्रों के समग्र विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। प्रशासन का कहना है कि भाषा कौशल और अभिव्यक्ति क्षमता शिक्षा का मूल हिस्सा हैं और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे।

न्यूज़ देखो: शिक्षा में रचनात्मकता को नई दिशा
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि छात्रों ने दिल से लिखी गई भावनाओं को कागज पर उतारा और पत्र लेखन की पुरानी परंपरा को फिर से जीवंत किया। यह आयोजन न केवल एक प्रतियोगिता था बल्कि नई पीढ़ी को संवाद की संवेदनशीलता समझाने वाला अहम प्रयास भी साबित हुआ। शिक्षा में ऐसी पहलें बच्चों के भीतर आत्मविश्वास, स्पष्ट अभिव्यक्ति और भाषा पर पकड़ मजबूत करती हैं।
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लेखनी से बढ़ेगी चेतना
ऐसे रचनात्मक आयोजन न केवल बच्चों की भाषा क्षमता को निखारते हैं, बल्कि उन्हें भावनाओं को संवेदनशीलता के साथ व्यक्त करना भी सिखाते हैं। पत्र लेखन जैसा अभ्यास बच्चों को धैर्य, अनुशासन और विचारों की स्पष्टता की ओर प्रेरित करता है। आज जब तेज संचार माध्यमों ने लिखने की आदत को कम कर दिया है, ऐसे कार्यक्रम नए उत्साह और सीख का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।
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