
#कुरडेग #लोहड़ी_पर्व : सिमडेगा में कांग्रेस नेताओं ने लोकपर्व के सामाजिक महत्व को रेखांकित किया।
लोहड़ी पर्व के अवसर पर सिमडेगा जिला कांग्रेस अध्यक्ष सह विधायक भुषण बाड़ा और महिला जिला अध्यक्ष जोशीमा खाखा ने जिलेवासियों को शुभकामनाएं दीं। कुरडेग में दिए गए संदेश में उन्होंने लोहड़ी को मेहनत, प्रकृति और खुशहाली का प्रतीक बताया। नेताओं ने लोकपर्वों की भूमिका सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण बताई। इस संदेश का उद्देश्य साझा संस्कृति और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करना रहा।
- विधायक भुषण बाड़ा ने लोहड़ी को मेहनत, प्रकृति और खुशहाली का प्रतीक बताया।
- महिला जिला अध्यक्ष जोशीमा खाखा ने सामाजिक समरसता और भाईचारे पर बल दिया।
- कुरडेग में पर्व अवसर पर जिलेवासियों को दी गई शुभकामनाएं।
- नई फसल और नई ऊर्जा के प्रतीक के रूप में लोहड़ी का उल्लेख।
- महिलाओं, किसानों और मजदूरों की सुख-समृद्धि की कामना।
लोहड़ी पर्व के पावन अवसर पर सिमडेगा जिले में जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए संदेश ने लोकसंस्कृति के महत्व को रेखांकित किया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष सह विधायक भुषण बाड़ा और महिला जिला अध्यक्ष जोशीमा खाखा ने इस पर्व को केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना से जोड़कर देखा। नेताओं ने कहा कि ऐसे पर्व समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने जिलेवासियों से परंपराओं को सम्मान देने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने की अपील की। इस अवसर पर सांस्कृतिक विविधता और साझा विरासत पर विशेष जोर दिया गया।
लोहड़ी पर्व का सांस्कृतिक महत्व
लोहड़ी उत्तर भारत के प्रमुख लोकपर्वों में से एक है, जिसे नई फसल और ऋतु परिवर्तन के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व किसानों की मेहनत, प्रकृति के प्रति आभार और सामूहिक उल्लास को दर्शाता है। सिमडेगा जैसे बहुसांस्कृतिक जिले में लोहड़ी का संदेश केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह साझा संस्कृति की भावना को आगे बढ़ाता है। लोकपर्वों के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नई शुरुआत का भाव जागृत होता है।
विधायक भुषण बाड़ा का संदेश
इस अवसर पर विधायक भुषण बाड़ा ने लोहड़ी के व्यापक सामाजिक अर्थों पर प्रकाश डाला।
भुषण बाड़ा ने कहा: “लोहड़ी पर्व मेहनत, प्रकृति और खुशहाली का प्रतीक है, जो देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को एक सूत्र में बांधता है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह पर्व नई फसल, नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संदेश देता है। उनके अनुसार भारत की पहचान विविधता में एकता से है, और लोकपर्व इसी भावना को मजबूत करते हैं। विधायक ने जिलेवासियों से आपसी सहयोग और सद्भाव बनाए रखने की अपील की।
महिला जिला अध्यक्ष जोशीमा खाखा की प्रतिक्रिया
महिला जिला अध्यक्ष श्रीमती जोशीमा खाखा ने लोकपर्वों की सामाजिक भूमिका को रेखांकित किया।
जोशीमा खाखा ने कहा: “लोहड़ी जैसे पारंपरिक त्योहार सामाजिक समरसता, भाईचारे और पारिवारिक एकता को मजबूत करते हैं।”
उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं, किसानों और मजदूर वर्ग के सुख-समृद्धि की कामना की। उनके अनुसार लोकपर्व समाज को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर महिलाओं की भागीदारी और सामूहिकता को भी सशक्त बनाते हैं।
लोकपर्व और सामाजिक समरसता
लोकपर्व किसी भी समाज की आत्मा होते हैं। लोहड़ी जैसे पर्व सामूहिक सहभागिता, आपसी सहयोग और समानता की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। सिमडेगा जिले में विभिन्न समुदायों की उपस्थिति के बीच ऐसे संदेश सामाजिक सौहार्द को और मजबूत करते हैं। पर्व के माध्यम से समाज में सकारात्मक संवाद, आपसी समझ और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है। यह परंपराएं नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करती हैं।
जिले में सांस्कृतिक एकता का संदेश
सिमडेगा जिला अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। यहां विभिन्न लोकपर्वों का सम्मान और सहभागिता सामाजिक एकता की मिसाल प्रस्तुत करती है। नेताओं द्वारा दिया गया यह संदेश जिले में सांस्कृतिक समावेशन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को बल देता है। लोकपर्वों के अवसर पर ऐसे विचार समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक होते हैं।
न्यूज़ देखो: लोकपर्वों से मजबूत होती सामाजिक एकता
लोहड़ी पर्व पर दिए गए संदेश से यह स्पष्ट होता है कि जनप्रतिनिधि लोकसंस्कृति को सामाजिक विकास से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसे अवसरों पर नेताओं की भूमिका केवल शुभकामनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने की भी होती है। लोकपर्वों के महत्व को रेखांकित करना सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में भी ऐसे संदेश सामाजिक एकता को कितनी मजबूती प्रदान करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
परंपराओं से जुड़कर ही बनता है मजबूत समाज
लोकपर्व हमें मेहनत का सम्मान करना, प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना और एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा करना सिखाते हैं। ऐसे संदेश समाज में सकारात्मक सोच और सामूहिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देते हैं। आज जरूरत है कि हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझें और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं।





