Garhwa

डंडई में धूमधाम से सम्पन्न हुआ भगवान बलभद्र पूजन: ब्याहुत कलवार समाज की बड़ी भागीदारी

#गढ़वा #समाजिककार्यक्रम : भगवान बलभद्र पूजन समारोह में हजारों श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से अतिथि पहुंचे
  • ब्याहुत कलवार समाज ने डंडई में किया भगवान बलभद्र पूजन।
  • राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्वनाथ भगत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल।
  • छत्तीसगढ़ से विजय कुमार और जवाहर प्रसाद विशिष्ट अतिथि बने।
  • शोभायात्रा में हजारों महिला-पुरुष ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
  • दहेज प्रथा खत्म करने और बेटा-बेटी में समानता पर दिया संदेश।

गढ़वा जिले के डंडई प्रखंड मुख्यालय में रविवार को ब्याहुत कलवार समाज ने भगवान बलभद्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया। किसान उच्च विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय गांवों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। आयोजन की भव्यता और उमंग देखने लायक रही।

शोभायात्रा से हुआ शुभारंभ

पूजन कार्यक्रम से पहले भगवान बलभद्र की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह यात्रा हरिहर मंदिर से प्रारंभ होकर देवी धाम, मुख्य बाजार और अंबेडकर चौक होते हुए किसान उच्च विद्यालय परिसर तक पहुंची। शोभायात्रा में समाज के हजारों महिला-पुरुष और बच्चे शामिल हुए। यात्रा के दौरान पूरे इलाके का माहौल भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंग गया।

अतिथियों का सम्मान और पूजन

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्वनाथ भगत और विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ के समाज अध्यक्ष विजय कुमारजवाहर प्रसाद का शॉल ओढ़ाकर और भगवान बलभद्र की प्रतिमा भेंट कर सम्मान किया गया। इस अवसर पर स्थानीय समिति के अध्यक्ष अलख निरंजन प्रसाद, सचिव वरुणेंद्र कुमार, कोषाध्यक्ष चंद्रशेखर प्रसाद, उपाध्यक्ष अनिल प्रसाद सहित समिति के सभी पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

समाज को संगठित रहने का संदेश

अपने संबोधन में राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्वनाथ भगत ने कहा कि ब्याहुत कलवार समाज एक संगठित और प्रगतिशील समाज है। उन्होंने लोगों से आपसी एकजुटता बनाए रखने और नई पीढ़ी को बचपन से ही अच्छे संस्कार देने पर जोर दिया।

दहेज प्रथा और भेदभाव पर चर्चा

विशिष्ट अतिथि विजय कुमार ने समाज की महिलाओं को संबोधित करते हुए दहेज प्रथा को अभिशाप बताया। उन्होंने कहा कि बेटा और बेटी में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए और समाज को इस सोच से बाहर निकलना होगा। साथ ही उन्होंने बाल विवाह की प्रथा पर रोक लगाने और बच्चों की शादी विवाह नियत समय पर करने की अपील की।

बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी

कार्यक्रम में रामनाथ साह, नंदू प्रसाद, ताराचंद साह, नरेश प्रसाद, ओमप्रकाश, मुनीलाल प्रसाद, रामगुलाम साह, संजय प्रसाद, देवशरण प्रसाद समेत सैकड़ों लोग उपस्थित थे। ग्रामीणों ने कार्यक्रम को समाज की एकता और शक्ति का प्रतीक बताया।

न्यूज़ देखो: समाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण

डंडई में हुआ भगवान बलभद्र पूजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज की एकता और जागरूकता का भी संदेश देता है। दहेज प्रथा और भेदभाव जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा समाज सुधार की दिशा में सकारात्मक पहल है। इस तरह के आयोजन समाज को संगठित करने और नई पीढ़ी को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था और सुधार का संगम

डंडई का यह कार्यक्रम बताता है कि जब आस्था और सामाजिक सुधार एक मंच पर आते हैं तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव होता है। अब समय है कि हम सब दहेज और भेदभाव जैसी बुराइयों के खिलाफ खड़े हों। अपनी राय कमेंट में साझा करें और इस खबर को आगे बढ़ाकर समाज में जागरूकता फैलाएं।

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Shashi Bhushan Mehta

डंडई, गढ़वा

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