#खलारी #बिरसा_पुण्यतिथि : रैयत विस्थापित मोर्चा ने श्रद्धांजलि देकर संघर्षों को याद किया।
रांची जिले के खलारी स्थित डकरा में रैयत विस्थापित मोर्चा ने भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई। कार्यक्रम में मोर्चा के पदाधिकारियों और सदस्यों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने बिरसा मुंडा के जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। इस दौरान जनजातीय अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को लेकर भी विचार व्यक्त किए गए।
- डकरा, खलारी स्थित रैयत विस्थापित मोर्चा कार्यालय में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ।
- भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
- मोर्चा अध्यक्ष बिगन सिंह भोगता ने उनके संघर्ष और बलिदान को याद किया।
- जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई।
- वक्ताओं ने सीएनटी एक्ट 1908 को जनजातीय अधिकारों की सुरक्षा से जोड़ा।
- कार्यक्रम में मोर्चा के कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर मंगलवार को खलारी क्षेत्र में श्रद्धा और सम्मान का माहौल देखने को मिला। रैयत विस्थापित मोर्चा द्वारा डकरा स्थित कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उनके संघर्ष, त्याग और जनजातीय समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए किए गए योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि वे जल, जंगल और जमीन की रक्षा के सबसे बड़े प्रतीक के रूप में आज भी जनमानस के बीच जीवित हैं।
माल्यार्पण कर दी गई श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत रैयत विस्थापित मोर्चा के सदस्यों द्वारा भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद उपस्थित सभी लोगों ने बारी-बारी से पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
श्रद्धांजलि सभा में भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और बलिदान पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने अपने अल्प जीवन में जनजातीय समाज को संगठित कर अन्याय और शोषण के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका था।
जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए किया संघर्ष
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रैयत विस्थापित मोर्चा के अध्यक्ष बिगन सिंह भोगता ने भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को याद किया।
बिगन सिंह भोगता ने कहा, “भगवान बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया तथा अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनका जीवन समाज को अपने अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देता है।”
उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा का आंदोलन केवल एक विद्रोह नहीं था, बल्कि सामाजिक न्याय और स्वाभिमान की लड़ाई थी, जिसने जनजातीय समाज को नई चेतना प्रदान की।
सीएनटी एक्ट को बताया संघर्ष का परिणाम
अपने संबोधन में बिगन सिंह भोगता ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष और बलिदान का प्रभाव इतना व्यापक था कि जनजातीय समुदायों की भूमि की सुरक्षा के लिए छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) 1908 लागू किया गया।
बिगन सिंह भोगता ने कहा, “उनके संघर्ष और बलिदान के परिणामस्वरूप सीएनटी एक्ट 1908 लागू हुआ, जिससे आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और सभ्यता की रक्षा सुनिश्चित हो सकी।”
उन्होंने कहा कि यह कानून आज भी जनजातीय समाज के अधिकारों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और इसे संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
उनके बताए मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा को केवल स्मरण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके विचारों और आदर्शों को व्यवहार में उतारना भी जरूरी है।
बिगन सिंह भोगता ने कहा, “भगवान बिरसा मुंडा को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम उनके बताए मार्ग पर चलें और समाज तथा प्रकृति की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करते रहें।”
उन्होंने कहा कि आज पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और सामाजिक न्याय के मुद्दे पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। ऐसे समय में बिरसा मुंडा के विचार समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं।
रैयत विस्थापित मोर्चा ने संघर्ष जारी रखने का लिया संकल्प
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में रैयत विस्थापित मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि संगठन भी जल, जंगल और जमीन की रक्षा के मुद्दों पर लगातार संघर्ष कर रहा है।
मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी स्थानीय लोगों के अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए संगठन अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष संगठन के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
बड़ी संख्या में सदस्य रहे उपस्थित
कार्यक्रम में रैयत विस्थापित मोर्चा के कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।
मौके पर जगरनाथ महतो, रामलखन गंझू, नरेश गंझू, विनय खलखो, अमृत भोगता, प्रभाकर गंझू, सुनील यादव सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।
सभी ने भगवान बिरसा मुंडा के संघर्षों को याद करते हुए समाज और प्रकृति की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।
सामाजिक चेतना का संदेश
कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा गया कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा का संदेश है। उन्होंने जनजातीय समाज को अधिकारों के प्रति जागरूक किया और शोषण के खिलाफ संगठित संघर्ष का रास्ता दिखाया।
आज भी उनके विचार समाज में समानता, स्वाभिमान और न्याय की भावना को मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं।
न्यूज़ देखो: बिरसा मुंडा के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक
भगवान बिरसा मुंडा का जीवन संघर्ष, स्वाभिमान और प्रकृति संरक्षण की अमूल्य विरासत है। उनकी पुण्यतिथि केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने का भी समय है। जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दे आज भी समाज के सामने महत्वपूर्ण चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में उनके आदर्शों पर आधारित जनजागरण और सामाजिक सहभागिता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संघर्ष और संरक्षण की विरासत को आगे बढ़ाने का समय
प्रकृति और समाज की रक्षा केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। भगवान बिरसा मुंडा ने हमें अपने अधिकारों के लिए जागरूक रहने और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की सीख दी है।
आइए उनके आदर्शों को केवल स्मरण तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने जीवन और समाज में उतारने का प्रयास करें।
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