बरवाडीह प्रखंड कार्यालय में अटका मंईयां सम्मान योजना का फॉर्म, पोर्टल बंद होने से ग्रामीण परेशान

बरवाडीह प्रखंड कार्यालय में अटका मंईयां सम्मान योजना का फॉर्म, पोर्टल बंद होने से ग्रामीण परेशान

author News देखो Team
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#बरवाडीह #योजना_अटकी : मंईयां सम्मान योजना और अबुआ आवास के फॉर्म प्रखंड कार्यालय में जमा, पोर्टल बंद होने से एंट्री ठप
  • सरकार आपके द्वार शिविर में मिले मंईयां सम्मान योजना और अबुआ आवास के सभी फॉर्म प्रखंड कार्यालय में लंबित।
  • पोर्टल बंद, एंट्री न होने से फॉर्म की कुल संख्या तक स्पष्ट नहीं।
  • ग्रामीण और महिलाएं योजना के लाभ के इंतजार में चिंतित।
  • प्रखंड कार्यालय पोर्टल खुलने की निश्चित तारीख बताने में असमर्थ।

बरवाडीह प्रखंड में सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम “सरकार आपके द्वार” के तहत शिविरों में जमा किए गए मंईयां सम्मान योजना और अबुआ आवास योजना के आवेदन पिछले कई दिनों से प्रखंड कार्यालय में अटके पड़े हैं। वजह है—सरकारी पोर्टल का न खुलना। फॉर्मों की एंट्री न होने के कारण यह तक पता नहीं चल पा रहा है कि विभिन्न पंचायतों के शिविरों में कुल कितने आवेदनों की प्राप्ति हुई थी।

ग्रामीणों के मुताबिक शिविर में आवेदन जमा करते समय उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही योजना का लाभ मिलेगा, लेकिन फॉर्म कार्यालय के भीतर “पड़े रहने” के अलावा कोई प्रगति नहीं हो रही है। कई महिलाओं ने कहा कि वे रोज़ पूछने आती हैं, लेकिन उन्हें एक ही जवाब मिलता है—“पोर्टल खुला नहीं है।”

प्रखंड कार्यालय की स्थिति

कार्यालय सूत्रों के अनुसार विभागीय पोर्टल कब चालू होगा, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कर्मचारियों का कहना है कि जैसे ही पोर्टल खुलेगा, लंबित फॉर्मों की एंट्री शुरू कर दी जाएगी।
लेकिन फिलहाल कार्यालय में फॉर्मों का ढेर लगा हुआ है, जिससे आवेदकों की बेचैनी लगातार बढ़ रही है।

ग्रामीणों की उम्मीदें और बढ़ती परेशानी

ग्रामीण बताते हैं कि मंईयां सम्मान योजना उनके लिए राहत और सहयोग की महत्वपूर्ण योजना है।
वहीं अबुआ आवास योजना गरीब परिवारों के लिए घर का सपना पूरा करने का साधन है।
ऐसे में आवेदन प्रक्रिया में देरी से महिलाओं और आम लोगों की उम्मीदें अधर में लटक गई हैं।
लोगों ने प्रखंड प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है।

न्यूज़ देखो: योजनाओं की रफ्तार क्यों अटकी?

सरकारी योजनाओं की सफलता उनकी गति और पारदर्शिता पर निर्भर करती है। पोर्टल के तकनीकी मुद्दों के कारण फॉर्मों का अटकना बताता है कि डिजिटल सिस्टम मजबूत किए बिना योजनाओं के लाभ लोगों तक समय पर नहीं पहुंच पाएंगे। प्रशासन को चाहिए कि पोर्टल संचालन और निगरानी को प्राथमिकता दे, ताकि ग्रामीणों की परेशानी कम हो।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

योजनाओं की राह तब ही आगे बढ़ेगी

जब व्यवस्था सुचारू हो, तभी लाभ समय पर मिलते हैं। ग्रामीणों और महिलाओं की उम्मीदें इन योजनाओं से जुड़ी हैं। अब जरूरत है कि सिस्टम की देरी दूर हो और योजनाओं की प्रक्रिया तेज हो।
आपकी पंचायत में भी ऐसी समस्या है? अपनी बात कमेंट में लिखें, खबर आगे भेजें और जागरूकता फैलाएं।

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