
#पांकी #पलामू #अवैधपोस्ताखेती : वन भूमि पर चल रही अवैध अफीम खेती को प्रशासन ने संयुक्त अभियान में किया ध्वस्त।
पलामू जिले के पांकी थाना क्षेत्र में अवैध मादक खेती के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। 21 जनवरी 2026 को ग्राम कसमार के जंगली इलाके में वन भूमि पर उगाई जा रही अफीम और पोस्ता की फसल को पुलिस एवं वन विभाग की संयुक्त टीम ने नष्ट किया। यह कार्रवाई करीब छह एकड़ क्षेत्र में की गई, जिससे मादक पदार्थों की अवैध आपूर्ति पर सीधा प्रहार हुआ। प्रशासन ने दोषियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
- पांकी थाना क्षेत्र के ग्राम कसमार में वन भूमि पर अवैध खेती का खुलासा।
- करीब 06 एकड़ में लगी अफीम/पोस्ता की फसल का पूर्ण विनष्टीकरण।
- अभियान में पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम शामिल।
- पु.अ.नि. गोपाल कुमार राय समेत कई पदाधिकारी रहे मौजूद।
- दोषियों की पहचान के बाद वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की तैयारी।
पलामू जिले में मादक पदार्थों की अवैध खेती के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। पांकी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कसमार के जंगली इलाके में वन भूमि पर लंबे समय से अफीम और पोस्ता की अवैध खेती किए जाने की सूचना पर पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने बुधवार को बड़ा अभियान चलाया। इस कार्रवाई में लगभग छह एकड़ में फैली अवैध फसल को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। प्रशासन की इस पहल को क्षेत्र में नशा कारोबार पर रोक लगाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
कैसे सामने आया अवैध खेती का मामला
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि ग्राम कसमार के वन क्षेत्र में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा अफीम और पोस्ता की खेती की जा रही है। यह खेती वन भूमि पर की जा रही थी, जो कानूनन गंभीर अपराध है। सूचना की पुष्टि के बाद पांकी थाना और ताल पिकेट की टीम ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की योजना बनाई।
संयुक्त अभियान में शामिल अधिकारी और बल
इस विनष्टीकरण अभियान में पांकी थाना के पदाधिकारी पु.अ.नि. गोपाल कुमार राय, स.अ.नि. श्यामलाल यादव, स.अ.नि. रामनाथ मंडल, ताल पिकेट के पदाधिकारी स.अ.नि. सुनील सुभाष भेंगरा सहित पांकी थाना और ताल पिकेट के जवान शामिल रहे। इसके साथ ही वन विभाग की टीम ने भी सक्रिय भूमिका निभाई और वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर अफीम और पोस्ता की फसल को उखाड़कर नष्ट किया गया। अभियान के दौरान सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
पु.अ.नि. गोपाल कुमार राय ने कहा: “अवैध अफीम और पोस्ता की खेती किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों की पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
वन भूमि पर अवैध खेती बना चिंता का विषय
वन भूमि पर इस तरह की अवैध खेती न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण और समाज दोनों के लिए गंभीर खतरा भी है। अफीम और पोस्ता जैसी फसलों की अवैध खेती से नशे का कारोबार बढ़ता है, जिसका सीधा असर युवाओं और सामाजिक ताने-बाने पर पड़ता है। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की खेती पर समय रहते रोक लगाना बेहद जरूरी है।
दोषियों पर होगी कानूनी कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस अवैध खेती में संलिप्त व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। नाम-पता सत्यापन पूरा होने के बाद संबंधित दोषियों के खिलाफ वन अधिनियम के अंतर्गत वन वाद दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही पुलिस अन्य कानूनी धाराओं के तहत भी कार्रवाई पर विचार कर रही है।
अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि यदि इस खेती का संबंध किसी बड़े नशा नेटवर्क से जुड़ा पाया गया, तो मामले की जांच और दायरा बढ़ाया जाएगा।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
पुलिस और वन विभाग ने साफ कहा है कि मादक पदार्थों की अवैध खेती और तस्करी के खिलाफ ऐसे अभियान आगे भी लगातार चलाए जाएंगे। सीमावर्ती और जंगली क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।
न्यूज़ देखो: नशा मुक्त समाज की दिशा में जरूरी कदम
पांकी के कसमार जंगल में हुई यह कार्रवाई दिखाती है कि प्रशासन अब अवैध मादक खेती को लेकर गंभीर है। छह एकड़ फसल का विनष्टीकरण केवल एक कार्रवाई नहीं, बल्कि नशा कारोबारियों के लिए स्पष्ट चेतावनी है। सवाल यह है कि क्या ऐसे अभियान नियमित रूप से चलेंगे और दोषियों को सख्त सजा मिलेगी? इन जवाबों पर ही आगे की सफलता निर्भर करेगी।
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नशे के खिलाफ एकजुटता ही समाधान
अवैध मादक खेती केवल कानून की समस्या नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। यदि ग्रामीण और स्थानीय लोग सजग रहें और ऐसी गतिविधियों की जानकारी समय पर प्रशासन तक पहुंचाएं, तो नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। अपने आसपास हो रही गलत गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाएं।
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