News dekho specials
Garhwa

गढ़वा नगर परिषद चुनाव से पहले झामुमो को बड़ा झटका: अध्यक्ष पद की प्रत्याशी अनीता दत्त ने दिया इस्तीफा, निर्दलीय मैदान में डटीं रहेंगी

#गढ़वा #नगरपरिषदचुनाव : प्रचार के अंतिम दिन इस्तीफे की चिट्ठी वायरल होने से राजनीतिक हलचल तेज

गढ़वा नगर परिषद चुनाव के प्रचार के अंतिम दिन राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया जब अध्यक्ष पद की प्रत्याशी और पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष अनीता दत्त ने सोशल मीडिया पर अपनी इस्तीफे की चिट्ठी साझा कर दी। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने झामुमो के सभी पदों से इस्तीफा देने और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा की। चुनावी समीकरणों पर इसका सीधा असर पड़ता दिख रहा है और क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • अनीता दत्त ने सोशल मीडिया पर साझा की झामुमो जिलाध्यक्ष को लिखी इस्तीफा चिट्ठी
  • अध्यक्ष पद का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ने का किया ऐलान।
  • झामुमो समर्थित प्रत्याशी संतोष कुमार केशरी के पक्ष में पार्टी कार्यकर्ता सक्रिय।
  • पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर की अगुवाई में झामुमो का जोरदार प्रचार अभियान।
  • 23 फरवरी को गढ़वा नगर परिषद चुनाव के लिए मतदान निर्धारित।

गढ़वा नगर परिषद चुनाव के प्रचार का अंतिम दिन राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम साबित हुआ, जब पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष एवं वर्तमान अध्यक्ष पद की प्रत्याशी अनीता दत्त ने झारखंड मुक्ति मोर्चा से अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी। जैसे ही उनकी चिट्ठी सोशल मीडिया पर सामने आई, पूरे चुनावी माहौल में नई चर्चा शुरू हो गई। प्रचार का शोर भले ही थमने जा रहा हो, लेकिन इस घटनाक्रम ने चुनावी समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है।

इस्तीफा पत्र से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

अनीता दत्त द्वारा झामुमो जिलाध्यक्ष को लिखे गए पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वह पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे रही हैं। उन्होंने पत्र में यह भी लिखा कि वह गढ़वा नगर परिषद अध्यक्ष पद का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मजबूती से लड़ रही हैं और अब झामुमो की प्राथमिक सदस्य नहीं हैं। इस घोषणा ने चुनाव के अंतिम चरण में राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।

उनकी ओर से चिट्ठी को सार्वजनिक किए जाने के बाद समर्थकों और विरोधियों के बीच चर्चा का नया दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले लिया गया यह निर्णय रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।

झामुमो का आधिकारिक प्रत्याशी और संगठन की सक्रियता

ज्ञात हो कि गढ़वा नगर परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए झामुमो की ओर से समर्थित प्रत्याशी संतोष कुमार केशरी हैं। पार्टी संगठन पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर की अगुवाई में अपने प्रत्याशी के पक्ष में लगातार प्रचार कर रहा है। कार्यकर्ताओं द्वारा जनसंपर्क अभियान, बैठकों और प्रचार कार्यक्रमों के माध्यम से चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने की कोशिश की जा रही है।

इसी बीच अनीता दत्त का इस्तीफा पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह पहले नगर परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं और क्षेत्र में उनकी अलग पहचान और जनसमर्थन माना जाता है।

दबाव की अटकलों के बीच निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा चल रही है कि अनीता दत्त पर किसी अन्य उम्मीदवार को समर्थन देने का दबाव बनाया जा रहा था। हालांकि उन्होंने इन अटकलों के बीच अपने जनसमर्थन पर भरोसा जताते हुए चुनाव मैदान में डटे रहने का निर्णय कायम रखा। यह निर्णय उनके समर्थकों के बीच उत्साह का विषय बना हुआ है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना जोखिम भरा कदम जरूर है, लेकिन मजबूत व्यक्तिगत जनाधार होने पर यह रणनीति कई बार चुनावी परिणामों को प्रभावित भी करती है।

News dekho specials

अंतिम दिन भी जारी रहा घर-घर जनसंपर्क अभियान

प्रचार के आखिरी दिन भी अनीता दत्त सक्रिय रूप से जनसंपर्क करती नजर आईं। विशेष रूप से खादी बाजार वार्ड संख्या 5 में उन्होंने घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क किया और समर्थन की अपील की। उनके इस सक्रिय अभियान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि वह चुनाव को पूरी गंभीरता और मजबूती से लड़ रही हैं।

वहीं दूसरी ओर विभिन्न प्रत्याशियों ने भी अंतिम दिन तक प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी, जिससे चुनावी माहौल पूरी तरह हाई वोल्टेज बना रहा।

प्रचार थमेगा, लेकिन नहीं थमेगी चुनावी चर्चा

गढ़वा नगर परिषद चुनाव का प्रचार भले ही आज समाप्त हो जाएगा, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं का दौर जारी रहेगा। इस्तीफा प्रकरण के बाद चुनावी रणनीतियों, समर्थन समीकरणों और संभावित परिणामों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चुनाव अब और अधिक रोमांचक और बहुकोणीय मुकाबले में बदलता दिख रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रचार समाप्त होने के बाद भी प्रत्याशियों की जमीनी पकड़, संगठन की मजबूती और व्यक्तिगत छवि ही चुनाव परिणाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

23 फरवरी को मतदान, 48 घंटे बेहद अहम

गढ़वा नगर परिषद चुनाव के लिए मतदान की तिथि 23 फरवरी निर्धारित है। ऐसे में प्रचार समाप्ति के बाद के 48 घंटे चुनावी रणनीति और मतदाताओं के मनोविज्ञान के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इस दौरान प्रत्याशी और उनके समर्थक शांत प्रचार के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।

हाई वोल्टेज मुकाबले में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किस प्रत्याशी पर अपना भरोसा जताती है और किसके पक्ष में मतदान का रुख जाता है।

न्यूज़ देखो: चुनावी समीकरण में बड़ा मोड़

अनीता दत्त का इस्तीफा गढ़वा नगर परिषद चुनाव में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल पार्टी समीकरण प्रभावित हुए हैं, बल्कि चुनाव को त्रिकोणीय और अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है। अंतिम समय में बदलते राजनीतिक घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि इस चुनाव का परिणाम पूरी तरह जनमत और स्थानीय समीकरणों पर निर्भर करेगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

लोकतंत्र के महापर्व में जरूर करें मतदान और अपने शहर का भविष्य चुनें

नगर परिषद चुनाव सिर्फ एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं बल्कि शहर के विकास की दिशा तय करने का अवसर है।
आपका एक वोट स्वच्छ व्यवस्था, बेहतर विकास और मजबूत नेतृत्व तय कर सकता है।
मतदान करना आपका अधिकार ही नहीं, जिम्मेदारी भी है।
23 फरवरी को घर से निकलें और अपने स्वविवेक से योग्य प्रतिनिधि का चयन करें।
जागरूक मतदाता ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान होते हैं।
इस खबर को शेयर करें, जागरूकता फैलाएं और लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

News dekho specials


IMG-20250723-WA0070
IMG-20251223-WA0009
News dekho specials

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Related News

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: