#बगोदर #जिलाकमिटीबैठक : दो दिवसीय बैठक में बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और आंदोलन तेज करने पर जोर दिया गया।
गिरिडीह जिले के बगोदर विधानसभा क्षेत्र के बेको में माले की दो दिवसीय जिला कमिटी बैठक संपन्न हुई। बैठक में संगठन विस्तार, केडर रिन्यूअल और जनआंदोलन को तेज करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। नेताओं ने बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और योजनाओं की जमीनी जांच पर जोर दिया। 13-14 जून को मधुबन में जिला सम्मेलन आयोजित करने की भी घोषणा की गई।
- बेको (बगोदर) में माले जिला कमिटी की दो दिवसीय बैठक संपन्न।
- विनोद सिंह ने बूथ स्तर पर संगठन निर्माण पर दिया जोर।
- जनार्दन प्रसाद ने संगठन मजबूती और सक्रियता की बात कही।
- 13-14 जून को मधुबन में जिला सम्मेलन का निर्णय।
- 22 अप्रैल तक केडर रिन्यूअल की अंतिम तिथि तय।
- राजेश सिन्हा, अशोक पासवान समेत कई नेता बैठक में शामिल।
बगोदर विधानसभा क्षेत्र के बेको में माले की दो दिवसीय जिला कमिटी बैठक आयोजित की गई, जिसमें गिरिडीह जिले के विभिन्न प्रखंडों से जिला और राज्य कमिटी के सदस्य शामिल हुए। बैठक में संगठन को मजबूत करने, जनता के मुद्दों पर आंदोलन तेज करने और आगामी कार्यक्रमों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
संगठन विस्तार और तालमेल पर जोर
बैठक में जिला कमिटी के सचिव अशोक पासवान ने सभी नेताओं और केडरों को आपसी तालमेल के साथ काम करने और आंदोलनात्मक रवैया अपनाने की आवश्यकता बताई।
अशोक पासवान ने कहा: “संगठन के हर निर्णय को लागू करने के लिए सभी लीडर और केडर को मिलकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी।”
पूर्व विधायक विनोद सिंह ने कहा कि पूरे जिले में जनता के सवालों पर आंदोलन तेज करना जरूरी है। उन्होंने नए परिसीमन को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक बूथ पर संगठन खड़ा करने पर जोर दिया।
विनोद सिंह ने कहा: “जनआंदोलन को मजबूत करने के लिए बूथ स्तर तक संगठन बनाना जरूरी है।”
संगठन मजबूती को लेकर स्पष्ट निर्देश
पोलित ब्यूरो सदस्य जनार्दन प्रसाद ने कहा कि संगठन को मजबूत करने के लिए जिला, राज्य, प्रखंड और ब्रांच स्तर तक सभी इकाइयों को सक्रिय होना होगा।
जनार्दन प्रसाद ने कहा: “यदि संगठन विस्तार में कोताही बरती गई तो इसमें देरी होगी, इसलिए सभी केडरों को आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभानी होगी।”
जिला सम्मेलन और केडर रिन्यूअल का निर्णय
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 13 और 14 जून को मधुबन में जिला सम्मेलन धूमधाम से आयोजित किया जाएगा, जिसमें हजारों कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
साथ ही यह भी तय हुआ कि सभी केडरों का रिन्यूअल 22 अप्रैल तक पूरा किया जाएगा, जो राज्य कमिटी की बैठक में निर्धारित किया गया है।
योजनाओं की समीक्षा और आंदोलन की रणनीति
राज्य कमिटी के सदस्यों ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की समीक्षा कर यह देखा जाएगा कि वे जमीन पर लागू हो रही हैं या नहीं। यदि योजनाएं केवल फाइलों तक सीमित हैं, तो संबंधित विभागों और अधिकारियों के खिलाफ आंदोलन तेज किया जाएगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिला मुख्यालय से लेकर 13 प्रखंडों तक जनहित के मुद्दों पर आंदोलन को तेज किया जाएगा।
विभिन्न संगठनों को मजबूत करने पर जोर
राज्य कमिटी सदस्य पूरन महतो और सीताराम सिंह ने कहा कि माले से जुड़े विभिन्न संगठन जैसे आईसा, इंकलाबी नौजवान सभा, एप्वा, झामस, मजदूर संगठन और अखिल भारतीय किसान महासभा को तेजी से विस्तार दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि नए नेतृत्व को आगे लाने, खासकर महिलाओं और युवाओं को अधिक अवसर देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बैठक में बड़ी संख्या में नेताओं की मौजूदगी
इस बैठक में कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें जनार्दन प्रसाद, विनोद सिंह, पूरन महतो, अशोक पासवान, सीताराम सिंह, परमेश्वर महतो, जयंती चौधरी, भोला मण्डल, राजेश सिन्हा, मीना दास, कौशल्या दास, लालमणि यादव, संदीप जायसवाल, पवन महतो, कयूम अंसारी, रामू बैठा, राम किशुन यादव, शेखर सुमन, विजय पांडेय, कन्हाई पांडेय, मेहताब अली मिर्जा, रामलाल मुर्मू, नागेश्वर महतो, रामेश्वर चौधरी, धानेश्वर पासवान, पूनम महतो, मुस्तकीम अंसारी, सहदेव यादव, अभिमन्यु राम, रीतलाल प्रसाद, राजकुमार दास, सोनू पांडेय सहित अन्य सदस्य शामिल हुए।
बैठक में उस्मान अंसारी को गांडेय विधानसभा का प्रभारी पुनः बनाया गया। वहीं भोला मण्डल को बगोदर प्रखंड के पश्चिम क्षेत्र और सीताराम सिंह को सरिया प्रखंड की जिम्मेदारी दी गई।
न्यूज़ देखो: संगठन और संघर्ष की नई दिशा
बेको में हुई यह बैठक साफ संकेत देती है कि माले संगठनात्मक मजबूती के साथ जनआंदोलन को नई धार देने की तैयारी में है। बूथ स्तर तक विस्तार और योजनाओं की जमीनी समीक्षा जैसे निर्णय राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। अब देखना होगा कि इन रणनीतियों का असर आने वाले समय में जनता के बीच कितना दिखाई देता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
लोकतांत्रिक भागीदारी से ही होगा बदलाव
एक मजबूत लोकतंत्र के लिए जरूरी है कि नागरिक अपने अधिकारों और मुद्दों के प्रति जागरूक रहें। संगठन और जनभागीदारी के माध्यम से ही व्यवस्था में सुधार संभव है।
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